‘BJP को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग ने लांघी हदें’, रोहिणी आचार्य ने बंगाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर बोला हमला

'BJP को फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग ने लांघी हदें', रोहिणी आचार्य ने बंगाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ी पर बोला हमला

राजद सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए पश्चिम बंगाल में हुए चुनावी घटनाक्रम और मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर भारतीय जनता पार्टी और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए, ताकि भाजपा को चुनावी लाभ पहुंचाया जा सके. रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ‘भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए बंगाल में चुनाव आयोग सारी हदें लांघ गया. बंगाल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नामों को हटाया गया है, रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 90 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं.

उन्होंने लिखा, ‘कुछ क्षेत्रों में तो करीब 25% वोटर्स हटाए जाने की बात सामने आई है. ये सीधे तौर पर जनतांत्रिक अधिकारों (वोट देने के अधिकार) से वंचित किए जाने का मामला है. वैध दस्तावेज होने के बावजूद लोगों के नाम हटाए गए हैं. परिवार के कुछ सदस्य वोटर लिस्ट में हैं और कुछ नहीं , ऐसे अनेकों मामले भी सामने आए हैं. SIR की पूरी प्रक्रिया में गंभीर त्रुटियां और मनमानी बरती गई है. चुनाव आयोग के द्वारा पूरी प्रक्रिया बिना पारदर्शिता के निष्पादित की गयी है और दर्ज कराई गयी आपत्तियों को बिना किसी पड़ताल के सिरे से खारिज और नजरअंदाज और खारिज किया गया है.

रोहिणी ने आगे लिखा, ‘हैरान करने वाली बात है कि आयोग के द्वारा लाखों वोटर्स तक नोटिस एक “अप्रमाणित सॉफ्टवेयर” के जरिए भेजे गए और मानवीय जांच की जगह ऑटोमेटेड फैसले लिए गए. पूरी प्रक्रिया बहुत कम समय में अव्यवस्थित तरीके से हड़बड़ी में एक साजिश की तरह संचालित की गयी और भाजपा के निर्देश पर चिह्नित जायज वोटर्स को भी वोटर लिस्ट से बाहर रखने का निर्णय लिया गया. गंभीर चिंता का विषय तो ये रहा कि वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए बनाया गया अपील सिस्टम भी मजह खानापूर्ति करता दिखा.’

उन्होंने लिखा, ‘कहीं भी अपील ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे थे, लाखों लोग अपना नाम वापस जुड़वाने के लिए संघर्ष करते रहे और अंततः नाम जुड़वा पाने में असफल ही रहे , साफ़ तौर पर लोगों को न्याय पाने से वंचित किया गया. नाम की स्पेलिंग और ऐसी ही अन्य छोटी त्रुटियों पर भी लोगों को नोटिस भेजे गए और उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया. अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जान-बूझ का निशाना बनाया गया और पक्षपातपूर्ण तरीके से बड़ी संख्या में उनका नाम वोटर लिस्ट हटाया गया. बिल्कुल साफ है कि वोट चोरी के मकसद से भाजपा को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए चुनाव आयोग सारी हदें लांघ गया.’

Bureau Report

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