ठीक 11. 40 पर घनघनाए फोन, कुर्सी छोड़ खड़े हो गए लोग… जानें आज देश में कौन सा टेस्ट हुआ?

ठीक 11. 40 पर घनघनाए फोन, कुर्सी छोड़ खड़े हो गए लोग... जानें आज देश में कौन सा टेस्ट हुआ?

आज 2 मई को 11: 40 पर अचानक घनघनाने लगे फोन. आवाज इतनी तेज थी कि लोग घबरा कर अपनी सीट से उठ खड़े हुए.. कुछ पल के लिए तो लोग डर गए कि कहीं आग लग गई क्या, जो अचानक सायरन बजने लगा. लेकिन जब लोगों ने मोबाइल फोन देखा तो स्थिति साफ हुई. फोन पर DoT अलर्ट मैसेज और सायरन बज रहा था.

दरअसल भारत सरकार देशभर में एक नए मोबाइल-आधारित डिजास्टर अलर्ट सिस्टम का ट्रायल की. इस दौरान लोगों के मोबाइल फोन पर टेस्ट मैसेज आए. भारत सरकार देशभर में एक नया मोबाइल बेस्ड डिजास्टर अलर्ट सिस्टम टेस्ट किया. इस मोबाइल डिजास्टर कम्युनिकेशन सिस्टम या इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम को दूरसंचार विभाग ने नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथिरिटी यानी NDMA के साथ मिलकर तैयार किया है. इस टेस्ट का मकसद इमरजेंसी की स्थिति में लोगों को एक साथ अलर्ट करना है. इमसें हिंदी अंग्रेजी समेत कई क्षेत्रीय भाषा में अलर्ट भेजे गए. इस टेस्ट में एक साथ करोड़ों लोगों के मोबाइल पर अलर्ट का मैसेज भेजा गया.

लोगों के फोन पर आए ये मैसेज

India, launches Cell Broadcast using indigenous technology, for instant disaster alerting service for its citizens. Alert citizens, safe nation. No action is required by the public upon receipt of this message. This is a test message. -Government of India.

भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी. सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र. इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है. यह एक परीक्षण संदेश है. भारत सरकार

इस सिस्टम की ये है खास बात

यह अलर्ट सिस्टम एक खास टेक्नोलॉजी पर काम करता है जिसे कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल यानी CAP कहते हैं. इस सिस्टम का काम लोगों को संभावित आपदाओं के बारे में समय रहते जानकारी देना है. जब किसी इलाके में खतरा होता है, तो वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन पर तुरंत चेतावनी भेजी जाती है. यह अलर्ट SMS के रूप में आती है और कई बार फोन में तेज अलार्म या सायरन भी बजता है, जिससे लोग तुरंत सावधान हो जाएं.

इस सिस्टम की खास बात यह है कि यह हर किसी को मैसेज नहीं भेजता, बल्कि सिर्फ उसी क्षेत्र के लोगों को अलर्ट भेजता है जहां खतरा होने की संभावना होती है. इसके लिए सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे एक ही समय पर बड़ी संख्या में मोबाइल डिवाइस तक संदेश पहुंचाया जा सकता है.

If you receive a message like this on your phone, it is just a test alert as part of India’s new nationwide mobile-based Disaster Communication System, developed by the C-DoT team at DoT_India with @ndmaindia, using cell broadcast technology.

क्यों हुआ ये टेस्ट

NDMA के इस अलर्ट ट्रायल का मुख्य कारण उन स्थितियों में लोगों को मैसेज देना है, जहां समय बहुत कम होता है. जैसे सुनामी, भूकंप या आकाशीय बिजली गिरने जैसी स्थिति. इसके साथ ही गैस लीक या रसायनों के खतरे जैसी मानव निर्मित दुर्घटनाओं या प्राकृतिक आपदा के समय भी यह सिस्टम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तुरंत अलर्ट भेजेगा.

कहां कहां हो रहा ये अलर्ट टेस्ट

यह मोबाइल अलर्ट टेस्ट दिल्ली-NCR और आस पास के इलाकों में भेजा गया है.

साथ ही देश के दूसरे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अलग-अलग समय पर टेस्ट होना है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक देश के सीमावर्ती इलाकों (बॉर्डर एरिया) में यह टेस्ट नहीं किया होगा.
जिन राज्यों में अभी चुनाव चल रहे हैं, वहां भी मोबाइल पर इस तरह का कोई अलर्ट मैसेज नहीं भेजा जाएगा.

DoT ने पहले ही दी थी जानकारी

मोबाइल फोन पर आने वाले इस टेस्ट को लेकर कोई  घबराए या परेशान न हो, इसके लिए DoT ने पहले ही सूचना दी थी. DoT के मुताबिक यह एक इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम का ट्रायल है.

साइलेंट मोड़ पर होगा फोन तब भी बजेगा सायरन

अलर्ट मैसेज के साथ बजने वाली सायरन जैसी आवाज भी इस ट्रायल सिस्मट का हिस्सा है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि अगर आपका फोन साइलेंट मोड़ पर भी हो तब भी आपके फोन में यह आवाज बजेगी और आपको अलर्ट मिल जाएगा. सरकार का मानना है कि आपदा के समय एक सेकेंड की भी देरी भारी पड़ सकती है, इसलिए यह तय किया गया है कि जरूरत पड़ने पर लोगों को बिना देरी अलर्ट मिल सके.

लोगों की जान बचाएगा यह सिस्टम!

भारत जैसे बड़े और अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाले देश में, जहां हर साल बाढ़, चक्रवात और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं, वहां ऐसा अलर्ट सिस्टम लोगों की मदद कर सकता है. यह पहले ही खतरे के बारे में अलर्ट कर देगा, जिससे उस इलाके में मौजूद लोग सुरक्षित जगह पर पहुंच सकेंगे. इससे जान और संपत्ति दोनों के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है.

Bureau Report

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