मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच क्रूड ऑयल का दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से चढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. इस दौरान भारत को भी अपनी एनर्जी जरूरतों को पूरा करने के लिए महंगे रेट पर क्रूड ऑयल खरीदना पड़ा. इससे देश के आयात बिल में इजाफा हो गया और फॉरेक्स रिजर्व पर दबाव बढ़ गया. इस दौरान रूपये में भी गिरावट देखी गई. लेकिन अब जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच ऐसे हालात नहीं बनें, इसके लिए सरकार प्लानिंग कर रही है. आने वाले समय में किसी भी तरह के संकट से निपटने के लिए भारत सरकार बड़ी और दूरगामी प्लानिंग पर काम कर रही है.
जंग के बीच चीन ने क्रूड ऑयल क्राइसिस को बहुत ही बेहतर तरीके से मैनेज किया. इसका कारण यह रहा कि चीन के पास पहले से ही क्रूड ऑयल का बड़ा रिजर्व स्टॉक था. चीन ने इस दौरान महंगा तेल नहीं खरीदा और अपने ऑयल रिजर्व का यूज किया. भारत भी अब जंग में चीन की स्ट्रैटजी से सबक ले रहा है. सूत्रों के अनुसार सरकार घरेलू तेल रिफाइनरियों को क्रूड ऑयल का स्टॉक बढ़ाने के लिए कह सकती है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और ग्लोबल लेवल पर उपजे संकट को देखते हुए देश की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करना जरूरी हो गया है.
होर्मुज संकट से पूरी तरह बदल गई सोच
नए प्रस्ताव के तहत भारतीय रिफाइनरियों को आने वाले समय में सप्लाई क्राइसिस से बचाने के लिए अपने पास क्रूड ऑयल का बड़ा रिजर्व रखना होगा. यह इसलिए ताकि किसी भी इमरजेंसी हालात में देश में ईंधन की किल्लत न हो. अब तक भारत के नीति निर्माताओं का मानना था कि खाड़ी देशों से भारत की भौगोलिक निकटता के कारण हमें बहुत ज्यादा स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) की जरूरत नहीं है. लेकिन पिछले दिनों होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई रुकावट ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है. आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनिया के दूसरे बड़े देशों की तुलना में भारत का एसपीआर (SPR) काफी कम है.
दिसंबर के अंत तक 2.1 करोड़ बैरल का एसपीआर
अमेरिकी एनर्जी इंफारमेंशन एडमिनिस्ट्रेशन . के आंकड़ों के अनुसार 2025 के अंत तक भारत के पास केवल 2.1 करोड़ बैरल का एसपीआर (SPR) था. इसके उलट चीन के पास 139.7 करोड़ बैरल, अमेरिका के पास 41.3 करोड़ बैरल और जापान के पास 26.3 करोड़ बैरल का रिजर्व मौजूद है. इस मुकाबले देखें तो भारत के पास काफी कम एसपीआर है. अभी भारतीय तेल रिफाइनरियां अपनी रोजाना की जरूरतों को पूरा करने के लिए करीब 15 दिन का क्रूड ऑयल स्टॉक में रखती हैं. लेकिन नए प्रपोजल के तहत उन्हें इस लिमिट से कहीं ज्यादा तेल का रिजर्व करने के लिए कहा जा सकता है.
योजना पूरी तरह शुरुआती चरण में
यह पूरी योजना अभी शुरुआती चरण में है. इसके अलग-अलग पहलुओं पर बारीकी से काम किया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार अभी तक इस पर किसी तरह का अंतिम फैसला नहीं हुआ है कि इसे कैसे और कब लागू किया जाएगा. दूसरी तरफ, तेल इंडस्ट्री से जुड़े दिग्गजों की तरफ से इस कदम का विरोध होना तय माना जा रहा है. दरअसल, भंडारण क्षमता बढ़ाने और भारी मात्रा में क्रूड ऑयल खरीदने के लिए तेल कंपनियों को भारी निवेश करने की जरूरत होगी.
हजारों करोड़ का करना होगा निवेश
इस पॉलिसी को यदि मंजूरी मिली और रिफाइनरियों को देश की 30 दिन की खपत के बराबर स्टॉक रखने का आदेश दिया जाता है, तो उन्हें करीब 15 करोड़ बैरल क्रूड ऑयल हर समय रिजर्व में रखना होगा. देश की रोजाना की खपत करीब 50 लाख बैरल की है. मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से भारतीय तेल रिफाइनरियों को करीब 60,000 करोड़ रुपये एक्स्ट्रा खर्च करने होंगे. इसके अलावा कंपनियों को बड़े-बड़े टैंक और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए भी हजारों करोड़ का खर्च करना पड़ेगा. जानकारों का मानना है कि यदि यदि सरकार इस तरह की कोई पॉलिसी लाती है तो उसे रिफाइनरियों को कई मामले में लचीलापन देना चाहिए.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ)
Q. मिडिल ईस्ट के तनाव का भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये पर क्या असर पड़ा?
A. मिडिल ईस्ट की जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई. इससे भारत को महंगे रेट पर तेल आयात करना पड़ा और आयात बिल काफी बढ़ गया. इसका असर विदेशी मुद्रा भंडार पर देखा गया.
Q. ऑयल क्राइसिस के बीच चीन की क्या स्ट्रैटजी रही?
A. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत आसमान छूने के बावजूद चीन पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा. कारण यह रहा कि चीन के पास पहले से ही क्रूड ऑयल का बहुत बड़ा ‘रिजर्व स्टॉक’ मौजूद था. चीन ने महंगे रेट पर नया तेल खरीदने के बजाय अपने पुराने रिजर्व स्टॉक का इस्तेमाल किया.
Q. होर्मुज स्ट्रेट ने भारतीय नीति निर्माताओं की सोच कैसे बदल दी?
A. होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट पैदा हुई तो तेल की सप्लाई चेन पर असर पड़ा. इस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि महज भौगोलिक निकटता के भरोसे नहीं रहा जा सकता. अपना खुद का बड़ा रिजर्व होना जरूरी है.
Q. SPR के मामले में भारत, चीन और अमेरिका जैसे देशों से कितना पीछे है?
A. EIA के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 के अंत तक भारत के पास 2.1 करोड़ बैरल का एसपीआर था. इसके उलट, चीन के पास 139.7 करोड़ बैरल, अमेरिका के पास 41.3 करोड़ बैरल और जापान के पास 26.3 करोड़ बैरल का रिजर्व मौजूद है.
Bureau Report
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