सड़क पर नमाज नहीं तो योग क्यों? कोलकाता में PM मोदी के कार्यक्रम पर सियासी बवाल!

सड़क पर नमाज नहीं तो योग क्यों? कोलकाता में PM मोदी के कार्यक्रम पर सियासी बवाल!

21 जून को देश ही नहीं, पूरी दुनिया में योग किया जाएगा. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के इस मौके पर पीएम मोदी कोलकाता में हजारों लोगों के साथ योग करेंगे. कोलकाता के रेड रोड पर होने वाले इस कार्यक्रम के लिए पूरी तैयारी की जा रही है. पीएम सिक्योरिटी के प्रोटोकॉल के लिए कुछ सड़कों को बंद भी किया जाएगा. अब इसी बात पर कोलकाता में बखेड़ा हो रहा. मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने सड़क पर नमाज बैन करने का हवाला देते हुए कहा कि सड़क पर योग कराना सरकार का दोहरा रवैया है. 

पीएम मोदी के साथ 21 जून को कोलकाता में करीब 30 हजार लोगों के योग करने की तैयारी है. कार्यक्रम को देखते हुए प्रशासन ने रेड रोड समेत शहर की सात प्रमुख सड़कों को आधी रात से लेकर कार्यक्रम समाप्त होने तक बंद रखने का फैसला किया है. मुस्लिम समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों और धार्मिक नेताओं का कहना है कि इसी साल ईद की नमाज को रेड रोड से हटाकर ब्रिगेड परेड ग्राउंड में करा दिया गया. उस समय तर्क दिया गया था कि सड़क बंद होने से आम लोगों को परेशानी होती है और यातायात प्रभावित होता है.

जलपाईगुड़ी मस्जिद के इमाम हाफिज मोहम्मद नईमुद्दीन गाजी ने कहा कि वह भारतीय नागरिक हैं और संविधान का अनुच्छेद 15 सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सड़क पर नमाज को यातायात की समस्या बताकर हटाया गया, तो फिर योग दिवस के लिए रेड रोड पर कार्यक्रम की अनुमति क्यों दी गई? उनका कहना है कि यदि सड़क बंद होने से लोगों को परेशानी होती है तो यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होना चाहिए.

इसी तरह खातिम मोहम्मद ने भी प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय ने प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए रेड रोड पर नमाज नहीं पढ़ी, लेकिन अब योग दिवस के लिए उसी स्थान पर बड़े आयोजन की अनुमति दी जा रही है. कानून और नियम सभी धर्मों के लिए समान होने चाहिए.

इधर, भाजपा नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए इन आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि वर्षों तक रेड रोड समेत कोलकाता की कई सड़कों पर नमाज के कारण लंबे समय तक जाम लगता रहा. प्रधानमंत्री का कार्यक्रम राष्ट्रीय महत्व का आयोजन है. पीएम की सिक्योरिटी में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा सकती. इसीलिए कुछ सड़कें कुछ घंटे के लिए बंद करना जरूरी है. 

दिलीप घोष ने कहा कि पहले कई वर्षों तक रेड रोड पर नमाज पढ़ी जाती थी, जबकि आसपास कई मस्जिदें मौजूद हैं. आज जब प्रधानमंत्री का कार्यक्रम हो रहा है तो उस पर सवाल उठाए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री का कार्यक्रम ऐसी जगह होना चाहिए, जहां लोगों की आवाजाही अपेक्षाकृत कम हो. अगर यह आयोजन किसी अन्य मैदान में होता तो सुरक्षा कारणों से उसके आसपास का इलाका भी बंद करना पड़ता. जो कुछ हो रहा है वह जनहित में है और सभी को कानून के दायरे में रहना सीखना चाहिए. 

Bureau Report

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