हम यहां किसी और की नहीं, बल्कि 2024 में रिलीज हुई राजकुमार राव, शरद केलकर और ज्योतिका की सबसे बड़ी मास्टरपीस फिल्म ‘श्रीकांत’ की बात कर रहे हैं, जिसको 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट हिंदी फीचर फिल्म का अवॉर्ड मिला. ये फिल्म ब्लाइंड बिजनेसमैन श्रीकांत बोल्ला की जिंदगी पर बनी है. अवॉर्ड जीतने के बाद डायरेक्टर तुषार हीरानंदानी और प्रोड्यूसर निधि परमार हीरानंदानी बहुत खुश हैं. उन्होंने बताया कि इस फिल्म को बनाना आसान नहीं था. इसे बजट से लेकर रिलीज डेट तक हर मोड़ पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन किसी ने हार नहीं मानी.
पूरी टीम की मेहनत रंग लाई और फिल्म ने देश का सबसे बड़ा सिनेमा सम्मान अपने नाम किया. डायरेक्टर तुषार हीरानंदानी के मुताबिक, ये फिल्म सिर्फ इसलिए बन पाई, क्योंकि इसके कलाकारों ने बहुत कम पैसों में काम किया. लीड रोल निभाने वाले राजकुमार राव, ज्योतिका और अलाया एफ ने अपनी फीस में घटा दी थी. मेक-अप और बाकी खर्चों में भी कलाकारों ने मेकर्स की काफी मदद की. यहां तक कि शरद केलकर ने तो इस फिल्म में काम करने के लिए सिर्फ एक रुपया लिया. पूरी स्टारकास्ट ने इस कहानी पर भरोसा जताया और मेकर्स का हर कदम पर साथ दिया.
टी-सीरीज के भूषण कुमार ने दिया पूरा साथ
निधि परमार हीरानंदानी के मुताबिक, जब सिनेमा का दौर थोड़ा धीमा चल रहा था, तब ‘टी-सीरीज’ के मालिक भूषण कुमार आगे आए और उन्होंने इस फिल्म को पूरा सपोर्ट किया. ये कोई बहुत बड़ी कमर्शियल फिल्म नहीं थी, फिर भी भूषण कुमार ने डायरेक्टर्स की सोच पर पूरा भरोसा रखा. निधि का मानना है कि एक सही बजट वाली फिल्म में इतने सारे बड़े स्टार्स को साथ लाना आसान नहीं था. ऊपर से 5 अलग-अलग जगहों पर शूटिंग करना भी काफी मुश्किल काम था. लेकिन सबसे अच्छी बात ये रही कि किसी भी एक्टर ने अपनी फीस या पैसों को लेकर कोई भी किचकिच नहीं की.
ज्योतिका की 26 साल बाद बॉलीवुड में वापसी
ज्योतिका ने लगभग 26 सालों के लंबे ब्रेक के बाद हिंदी सिनेमा में कदम रखा है. शुरुआत में वे इस प्रोजेक्ट को लेकर थोड़ी झिझक रही थीं. साउथ इंडस्ट्री का बड़ा नाम होने के चलते उन्हें डर था कि इतने समय बाद बॉलीवुड में उन्हें सम्मान मिलेगा या नहीं. निर्माताओं के लिए उन्हें मनाना बिल्कुल आसान नहीं था. निधि के मुताबिक, तुषार ने कई बार ज्योतिका से मुलाकात की और आखिरकार उन्हें राजी कर ही लिया. इस पूरे प्रोसेस में ज्योतिका के पति और तमिल स्टार सूर्या ने भी मेकर्स की काफी मदद की. आखिरकार फैंस का इंतजार खत्म हुआ और उनकी वापसी मुमकिन हो सकी.
मुश्किलों से भरी थी फिल्म बनाने की राह
निधि परमार का कहना है कि हर फिल्म अपनी एक अलग कहानी लेकर आती है. फिल्म ‘श्रीकांत’ को बनाने में भी पैसों की काफी तंगी झेलनी पड़ी थी. नौबत तो यहां तक आ गई थी कि डायरेक्टर तुषार हीरानंदानी ने मान लिया था कि अब बात नहीं बनेगी. ऐसे मुश्किल समय में कलाकारों और पूरी टीम ने हिम्मत दिखाई. सबको कहानी पर पूरा यकीन था, जिसकी वजह से डूबता प्रोजेक्ट फिर से खड़ा हो गया. टीम ने विदेशी शूटिंग से लेकर हर छोटे-बड़े काम को बहुत समझदारी से संभाला और आखिरकार एक शानदार मास्टरपीस फिल्म बनकर तैयार हुआ और लोगों को खूब पसंद भी आई.
टीम के भरोसे ने दिलाई बड़ी कामयाबी
आज नेशनल अवॉर्ड जीतने के बाद पूरी टीम बेहद इमोशनल और शुक्रगुजार है. मेकर्स का कहना है कि वे दुनिया की सबसे बेहतरीन फिल्म बनाने का दावा तो नहीं करते, लेकिन इतनी अच्छी जरूर बनाई कि इसे देश का सबसे बड़ा अवॉर्ड मिल सके. अगर सभी कलाकार और प्रोड्यूसर भूषण कुमार एक साथ खड़े न होते, तो ये सफर पूरा होना नामुमकिन था. ‘श्रीकांत’ की ये जीत सिनेमा की सच्ची कहानी और टीम वर्क की बड़ी मिसाल है. बता दें, लगभग ₹35-47 करोड़ में बनी इस इस फिल्म ने भारत में करीब ₹56-59 करोड़ और दुनियाभर में लगभग ₹60-63 करोड़ कमाए थे.
Bureau Report
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