विक्रम-1 ने रचा इतिहास: आर्बिट में पहुंचा रॉकेट, 450 किमी पर पेलोड स्थापित कर भारत बना दुनिया का तीसरा देश

विक्रम-1 ने रचा इतिहास: आर्बिट में पहुंचा रॉकेट, 450 किमी पर पेलोड स्थापित कर भारत बना दुनिया का तीसरा देश

भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है. हैदराबाद की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का पूरी तरह से भारत में बना प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट Vikram-1 श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च हो चुका है. जैसे ही रॉकेट ने आग के गोलों के साथ आसमान की ओर रुख किया, पूरा लॉन्च पैड तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. इसके साथ ही भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में अपनी पहली प्राइवेट कमर्शियल छलांग लगा दी है.

मिशन फतेह!  

भारत के पहले प्राइवेट स्पेस मिशन ने इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज करा दिया है. स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 की टेस्ट फ्लाइट-1 ने अपने मिशन को शत-प्रतिशत सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है.

भारत के इतिहास में पहली बार प्राइवेट सेक्टर से तैयार किए गए किसी ऑर्बिटल रॉकेट का टेस्ट पूरी तरह सफल रहा. इस सफलता के साथ ही मिशन आगमन के सभी टारगेट पूरे हो गए हैं, जिसने भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान में एक नए और ऐतिहासिक युग की शुरुआत कर दी है.

भारत को मिली बड़ी कामयाबी

भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 ने अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा यानी ऑर्बिट में सफलतापूर्वक प्रवेश कर लिया है. रॉकेट ने अपने सफर का अंतिम बर्न पूरी सटीकता के साथ पूरा किया, जिसके बाद इसने अपने साथ गए सभी पेलोड्स को लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में स्थापित कर दिया है.

इस ऐतिहासिक कामयाबी के साथ ही भारत ने वैश्विक पटल पर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया है. अब भारत प्राइवेट ऑर्बिटल लॉन्च क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का तीसरा देश बन गया है.

10 मिनट से भी कम समय में चारों चरण पूरे

स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट ने लॉन्च होने के मात्र 10 मिनट से भी कम समय के अंदर अपनी पहली उड़ान के चारों चरणों को सफलतापूर्वक पूरा करके एक बहुत बड़ा मील का पत्थर हासिल कर लिया है. भारत के पहले निजी तौर पर विकसित ऑर्बिटल रॉकेट के लिए यह एक बहुत बड़ी कामयाबी है.

इस सफर के दौरान रॉकेट ने ध्वनि की गति को पार किया, अत्यधिक दबाव वाले क्षेत्र मैक्स-क्यू को पार किया, अंतरिक्ष में प्रवेश किया और योजना के अनुसार अपने सभी चरणों को एक-एक कर अलग किया. यह मिशन अब अपने बिल्कुल आखिरी चरण में है, जहां ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल पेलोड को अंतरिक्ष की उनकी तय कक्षा में स्थापित करने का काम कर रहा है.

सॉलिड-प्रोपल्शन फेज हुआ पूरा

विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 ने अपनी यात्रा का एक और बड़ा पड़ाव पार कर लिया है. रॉकेट का तीसरा चरण भी अब मेन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया है, जिसके साथ ही इस मिशन का सॉलिड-प्रोपल्शन फेज पूरी तरह समाप्त हो गया है.

योजना के मुताबिक, विक्रम-1 के सभी सॉलिड स्टेजेस ने एक-एक करके सही तरीके से काम किया और काम पूरा होने के बाद वे अलग होते गए. अब रॉकेट अपने अगले पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, जहां ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल अपना काम शुरू करेगा.

तीसरे चरण का काम शुरू

मिशन की तय योजना के अनुसार, अब रॉकेट के तीसरे चरण ने काम करना शुरू कर दिया है और यह सफलतापूर्वक ऑन हो गया है. इस चरण का नाम Kalam-100 है, जो इस रॉकेट का सबसे छोटा और सबसे अधिक ऊंचाई पर उड़ान भरने वाला सॉलिड स्टेज है. कलाम-100 के फायर होते ही विक्रम-1 टेस्ट फ्लाइट-1 को अंतरिक्ष की निर्धारित कक्षा में पहुंचने के लिए अगला सबसे बड़ा पुश मिल गया है.

दूसरा चरण भी सफल

स्काईरूट के विक्रम-1 रॉकेट ने अंतरिक्ष की ओर बढ़ते हुए अपनी सफलता का एक और बड़ा पड़ाव पार कर लिया है. रॉकेट के दूसरे चरण, जिसका नाम Kalam-250 है, उसने अपनी पूरी ऊर्जा समाप्त होने के बाद मुख्य रॉकेट से सफलतापूर्वक खुद को अलग कर लिया है.

कलाम-250 का काम रॉकेट को अंतरिक्ष की गहराई में धकेलना था, जिसे उसने पूरी सटीकता से निभाया. इस चरण के अलग होने के साथ ही रॉकेट का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है और अब वह अपनी निर्धारित कक्षा में पहुंचने के अगले चरण की ओर तेजी से कदम बढ़ा चुका है. 

विक्रम-1 रॉकेट का पहला चरण सफलतापूर्वक हुआ अलग

स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट ने अपनी ऐतिहासिक उड़ान के बाद बड़ी सफलता हासिल की है. उड़ान भरने के बाद, जब रॉकेट ने ध्वनि की गति से पांच गुना तेजकी हैरतअंगेज रफ्तार पकड़ी तो, इसका फर्स्ट स्टेज मेन रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग हो गया.

अंतरिक्ष अभियानों में स्टेज सेपरेशन यानी चरणों का अलग होना सबसे कठिन प्रोसेस माना जाता है. पहला चरण अलग होने का मतलब है कि रॉकेट के शुरुआती बूस्टर ने अपना काम पूरी तरह से और सही समय पर निपटा लिया है. अब रॉकेट का अगला हिस्सा बाकी बचे सफर को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा. यह सफलता भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ी कामयाबी है.

अंतरिक्ष के सफर पर निकला विक्रम-1

भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है! हैदराबाद की निजी कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस का Vikram-1 रॉकेट श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलतापूर्वक लॉन्च हो गया है. 12:05 पर रॉकेट के शक्तिशाली 3D प्रिंटेड इंजनों ने आग उगलना शुरू किया और देखते ही देखते यह आसमान का सीना चीरते हुए अंतरिक्ष की ओर रवाना हो गया. इस लिफ्ट-ऑफ के साथ ही भारत की धरती से पहला निजी ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च हो चुका है. मिशन कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों और इसरो के अधिकारियों के बीच जश्न का माहौल है. रॉकेट पूरी तरह सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.

ध्वनि से 5 गुना तेज होगी रफ्तार

स्काईरूट के मिशन प्रोफाइल के मुताबिक, विक्रम-1 रॉकेट अपनी ऐतिहासिक लॉन्चिंग के तुरंत बाद बहुत तेजी से आसमान की ओर निकलेगा. उड़ान भरने के मात्र 25 सेकंड के भीतर ही यह ध्वनि की गति को पार कर जाएगा. इसके बाद इसकी रफ्तार और बढ़ेगी और लॉन्च के ठीक 1 मिनट 30 सेकंड पर यह ध्वनि से पांच गुना तेज रफ्तार पकड़ लेगा, जिसके तुरंत बाद रॉकेट का फर्स्ट स्टेज इससे अलग हो जाएगा.

अब 12:05 पर होगा लान्चिंग

कुछ तकनीकी कारणों से विक्रम-1 की लॉन्चिंग में देरी हो रही है. अब विक्रम-1 के लॉन्चिंग का नया समय सामने आ गया है. भारत का प्राइवेट राकेट 12:05 पर उड़ान भरेगा.

जांच जारी, कुछ देर में इतिहास रचेगा भारत

विक्रम-1 की लॉन्चिंग को कुछ समय के लिए होल्ड पर रखा गया है. जांच चल रही है, कुछ ही समय में विक्रम-1 की लॉन्चिंग होगी. विक्रम 1 की लॉन्चिंग के साथ भारत इतिहास रचेगा.

विक्रम-1 की लॉन्चिंग पर लगा ‘इंटरनल होल्ड’, सिस्टम की जांच जारी

लॉन्चिंग प्रक्रिया के बीच एक बड़ी खबर आ रही है. विक्रम-1 रॉकेट के लॉन्च सीक्वेंस को कुछ समय के लिए इंटरनल होल्ड पर रख दिया गया है, यानी उल्टी गिनती को अस्थाई रूप से रोक दिया गया है.

अगले 5 मिनट में होगी लॉन्चिंग!

विक्रम-1 रॉकेट के लॉन्च होने में अब सिर्फ 5 मिनट का समय बचा है. रॉकेट का ऑटोमैटिक लॉन्च सीक्वेंस ऑन कर दिया गया है. इसका मतलब है कि अब यह पूरा मिशन पूरी तरह से ऑटोमैटिक मोड पर आ गया है और इंसानों की जगह कंप्यूटर ने इसकी कमान संभाल ली है. उड़ान भरने से ठीक पहले की जितनी भी जांच होती हैं, उन्हें अब कंप्यूटर खुद कर रहा है. बस कुछ ही मिनटों में भारत का यह पहला प्राइवेट रॉकेट इतिहास रचने के लिए आसमान की तरफ कूच करेगा.

ISRO के मिशन कंट्रोल रूम में बढ़ी हलचल 

स्काईरूट के इस ऐतिहासिक मिशन को लेकर ISRO का मिशन कंट्रोल रूम भी पूरी तरह एक्शन में है. विक्रम-1 रॉकेट की लॉन्चिंग की निगरानी के लिए इसरो ने अपने कंट्रोल रूम के सिस्टम को इस प्राइवेट रॉकेट के डेटा और तकनीक के हिसाब से पूरी तरह अपडेट किया है. इस बड़े मौके पर इसरो के बड़े अधिकारियों और पूर्व प्रमुखों के साथ-साथ भारतीय एस्ट्रोनॉट्स भी मौजूद हैं.

हैदराबाद में बना मिशन कंट्रोल रूम!

स्काईरूट एयरोस्पेस ने इस ऐतिहासिक लॉन्चिंग की कमान संभालने के लिए हैदराबाद में अपने हेडक्वार्टर के अंदर एक बहुत ही एडवांस मिशन कंट्रोल रूम तैयार किया है. लॉन्च के इस बड़े मौके पर हैदराबाद में बैठे वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स की यह टीम श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर मौजूद टीम के साथ लगातार पल-पल का तालमेल बिठा रही है. रॉकेट की उड़ान से लेकर उसके अंतरिक्ष में पहुंचने तक, हर एक मूवमेंट की मॉनिटरिंग इसी कंट्रोल रूम से की जा रही है.

लॉन्च से पहले बड़ी कामयाबी

विक्रम-1 रॉकेट के लॉन्च होने से ठीक पहले वैज्ञानिकों की टीम ने एक बहुत बड़ा और जरूरी टेस्ट पूरा कर लिया है. रॉकेट के गाइडेंस, नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम की जांच पूरी हो चुकी है और इसके सभी सिस्टम उड़ान के लिए बिल्कुल फिट पाए गए हैं.

कार्बन कंपोजिट से तैयार है रॉकेट

विक्रम-1 कई मायनों में बहुत खास है. यह भारत का पहला ऐसा ऑर्बिटल रॉकेट है, जो पूरी तरह से ऑल-कार्बन कंपोजिट से तैयार है. यह मैटेरियल स्टील से ज्यादा हल्का होता है साथ ही मजबूती भी कम नहीं होती है, जिससे रॉकेट की परफॉर्मेंस कई गुना बढ़ जाती है. इससे साथ ही यह 24 घंटे सें असेंबल कर लिया जाता है और इसे तैयार करने में कीमत भी कम लगती है.

स्पेस में भेजा जा रहा अनोखा ट्रिब्यूट

विक्रम-1 रॉकेट में एक छोटा सा सोने का रॉकेट भी भेजा जा रहा है, जिसके अंदर भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई, सर सीवी रमन और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की बेहद सूक्ष्म मूर्तियां बनाई गई हैं. एक अनोखे पेलोड के रूप में विक्रम-1 अपने साथ कॉस्मिक ब्लूम नाम का एक लैब-ग्रोन डायमंड भी अंतरिक्ष में ले जा रहा है, जो आर्ट और साइंस का एक अनोखा संगम है.

अंतरिक्ष की सफाई भी करने की तैयारी

विक्रम-1 रॉकेट के पेलोड्स में EMBRACE मिशन को भी शामिल किया गया है. यह एक रोबोटिक आर्म टेक्नोलॉजी है, स्पेस में इसका इस्तेमाल भविष्य में अंतरिक्ष में फैले कचरे को साफ करने के लिए किया जाएगा.

अंतरिक्ष में जाएगा पीएम मोदी का हाथ से लिखा पोस्टकार्ड

स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट जब आज यानी 18 जुलाई को श्रीहरिकोटा से उड़ान भरेगा, तो यह अंतरिक्ष में सिर्फ सैटेलाइट और उपकरण ही लेकर नहीं जाएगा. इस ऐतिहासिक मिशन में बेहद खास और प्रतीकात्मक संदेश भी अंतरिक्ष भेजा जा रहा है. विक्रम-1 रॉकेट अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हाथ से लिखा एक पोस्टकार्ड लेकर जाएगा, जिस पर वंदे मातरम लिखा हुआ है.

श्रीहरिकोटा से पहली झलक

विक्रम-1 स्काईरूट एयरोस्पेस का पहला ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल की पहली झलक सामने आई है. श्रीहरिकोटा पर रॉकेट लॉन्चिंग के लिए तैयार है. आप भी देखिए तस्वीर

2022 में विक्रम-एस रॉकेट का सफल टेस्ट

यह पहली बार है जब भारत की कोई पूरी तरह से प्राइवेट कंपनी भारतीय जमीन से एक पेलोड यानी सैटेलाइट को सीधे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित करने की कोशिश करेगी. कंपनी की शुरुआत के 4 साल बाद यह बड़ा मील का पत्थर सामने आया है. इससे पहले 2022 में कंपनी ने विक्रम-एस रॉकेट का सफल सबऑर्बिटल टेस्ट किया था.

कब और कहां देखें लाइव?

आप विक्रम-1 रॉकेट की ऐतिहासिक लॉन्चिंग शनिवार यानी आज, 18 जुलाई 2026 को देख सकते हैं. विक्रम-1 की लॉन्चिंग 11:30 बजे होगी. आप इसे  स्काईरूट एयरोस्पेस के ऑफिशियल YouTube चैनल पर देख सकते हैं. लाइव स्ट्रीमिंग लॉन्चिंग से लगभग 30 मिनट पहले शुरू हो जाएगी. 

दो पूर्व ISRO वैज्ञानिकों का कमाल

स्काईरूट एयरोस्पेस की स्थापना जुलाई 2018 में ISRO के दो पूर्व वैज्ञानिकों पवन चंदना और नागा भरत डाका ने की है. दोनों संस्थापकों का कहना है कि उनके लिए एक सफल लिफ्ट-ऑफ ही बड़ी कामयाबी होगी. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा डेटा जुटाना है, जिससे भविष्य के मिशनों को और बेहतर बनाया जा सके. भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए यह लॉन्चिंग सिर्फ एक शुरुआत नहीं, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में एक नए युग का आगाज है.

पीएम मोदी ने दी शुभकामनाएं

इस मिशन से पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट की टीम को शुभकामनाएं दी हैं. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आज अंतरिक्ष यात्रा के लिए एक नया सवेरा है! आज सुबह 11:30 बजे, स्काईरूट एयरोस्पेस भारत के पहले निजी तौर पर विकसित लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 की पहली ऑर्बिटल लॉन्चिंग करने जा रहा है. यह चार चरणों वाला रॉकेट बहुत ही कम समय में और ऑन-डिमांड लॉन्च सेवाएं देने के लिए तैयार किया गया है. यह मिशन हमारे युवाओं की प्रतिभा, दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता की भावना को भी दिखाता है. पीएम मोदी ने कहा कि मैं एक सफल लॉन्चिंग के लिए पूरी स्काईरूट एयरोस्पेस टीम को अपनी शुभकामनाएं देता हूं.

3D-प्रिंटेड इंजन और 350 किलो वजन उठाने की क्षमता

तकनीकी रूप से यह रॉकेट बहुत ही आधुनिक और शक्तिशाली है-

वजन क्षमता
विक्रम-1 अंतरिक्ष में 350 किलोग्राम तक के पेलोड यानी सैटेलाइट्स और उपकरण ले जाने में सक्षम है.

कार्बन कंपोजिट बॉडी
इस पूरे रॉकेट का ढांचा बेहद मजबूत और हल्के ऑल-कार्बन कंपोजिट से तैयार किया गया है.

स्वदेशी 3D-प्रिंटेड इंजन
रॉकेट को रफ्तार देने के लिए इसमें स्काईरूट द्वारा खुद विकसित किए गए अत्याधुनिक 3D-प्रिंटेड इंजन और हाई-थ्रस्ट सॉलिड रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल किया गया है.

अंतरिक्ष में क्या करेगा विक्रम-1? 

विक्रम-1 रॉकेट अंतरिक्ष में भारत की तकनीकी क्षमता का लोहा मनवाने के लिए पूरी तरह तैयार है. अपने इस पहले सफर में विक्रम-1 रॉकेट अंतरिक्ष में कई तकनीकी पेलोड्स को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित करने का प्रयास करेगा. यह रॉकेट इन पेलोड्स को 60-डिग्री के झुकाव पर, जमीन से करीब 450 किलोमीटर ऊपर लो अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाएगा.

Bureau Report

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