कई हफ्तों से दे रहे थे चेतावनी… Telegram पर सरकार का बड़ा खुलासा, कोर्ट में लगाए गंभीर आरोप; क्या हमेशा के लिए बैन होगा?

कई हफ्तों से दे रहे थे चेतावनी... Telegram पर सरकार का बड़ा खुलासा, कोर्ट में लगाए गंभीर आरोप; क्या हमेशा के लिए बैन होगा?

NEET-UG 2026 री-एग्जामिनेशन से ठीक पहले भारत में टेलीग्राम पर अस्थायी बैन लगाया गया है, जिसके खिलाफ टेलीग्राम कोर्ट पहुंच गया है. इस कानूनी मामले के बीच अब केंद्र सरकार दिल्ली हाई कोर्ट में टेलीग्राम को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है. सरकार का दावा है कि टेलीग्राम देश की सुरक्षा और डेटा शेयरिंग को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है. चर्चा ये भी है कि सरकार टेलीग्राम पर हमेशा के लिए बैन लगा सकती है. आखिर सरकार और टेलीग्राम के बीच ये विवाद कहां तक पहुंच गया है? आइए जानते हैं…

सरकारी सूत्रों केल मुताबिक, केंद्र की सबसे बड़ी चिंता उन संदिग्ध टेलीग्राम चैनल्स से जुड़ी है जो जांच के घेरे में हैं. सरकार का आरोप है कि टेलीग्राम ने इन चैनल्स के डेटा और उनके सोर्स जानकारी कहां से आ रही, इसका खुलासा नहीं किया. सरकार ने बार-बार इन मुद्दों को उठाया, लेकिन कंपनी की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला.

अचानक नहीं लिया गया फैसला

इससे पहले बुधवार को हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने अपने फैसले का बचाव किया. सरकार की ओर से बोलेत हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हाई कोर्ट को बताया कि टेलीग्राम के खिलाफ यह एक्शन रातों रात नहीं लिया गया है. हम मई के महीने से ही टेलीग्राम के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहे हैं. मई से ही हमें लगातार शिकायतें मिल रही थीं.
उन्होंने कोर्ट में यह भी कहा कि सरकार के पास ऐप के दुरुपयोग से जुड़े चौंकाने वाले सबूत और आंकड़े मौजूद हैं, जिन्हें वे कोर्ट के सामने पेश करेंगे. सरकार ने यह कार्रवाई आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत अपनी इमरजेंसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए की है.

टेलीग्राम का क्या कहना है?

दूसरी ओर, टेलीग्राम ने सरकार के इस फैसले को मनमाना और जरूरत से ज्यादा सख्त बताया है. टेलीग्राम के सीनियर लायर ध्रुव मेहता ने दलील दी कि कंपनी ने सरकार का पूरा सहयोग किया है और अधिकारियों द्वारा बताए गए चैनल्स को ब्लॉक भी किया है. टेलीग्राम का कहना है कि इस तरह के अस्थायी प्रतिबंध से देश के करोड़ों आम यूजर्स प्रभावित हो रहे हैं, जो कि एक तरह से ब्लैंकेट बैन यानी पूरी तरह से प्रतिबंध के जैसा है.

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी कर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. अब सरकार द्वारा सबूत और आंकड़े पेश किए जाने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई होगी.

Bureau Report

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