तीसरी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, लेक‍िन क्‍या कंपन‍ियों को अब फायदा हुआ या नहीं?

तीसरी बार महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, लेक‍िन क्‍या कंपन‍ियों को अब फायदा हुआ या नहीं?

होर्मुज संकट के बाद इंटरनेशनल लेवल पर क्रूड ऑयल का दाम र‍िकॉर्ड लेवल पर चल रहा है. तेल महंगा होने से कंपन‍ियों घाटा हो रहा है. इसकी भरपाई के लि‍ए तेल कंपन‍ियों ने एक बार फ‍िर से पेट्रोल-डीजल के रेट में इजाफा कर द‍िया है. प‍िछले 10 द‍िन के दौरान तेल लगातार तीसरी बार महंगा हुआ है. इस बार पेट्रोल 87 पैसे और डीजल 91 पैसे महंगा हो गया है. तेल कंपन‍ियों ने पहली बार 15 मई को पेट्रोल-डीजल के रेट में 3 रुपये लीटर का इजाफा क‍िया. इसके बाद 19 मई को बढ़ोतरी की गई. आज कीमत में एक बार फ‍िर से बढ़ोतरी की गई है. 

प‍िछले 10 द‍िन पर गौर करें तो पिछले कुछ समय के दौरान ही तेल कंपन‍ियों ने पेट्रोल-डीजल का दाम करीब 4.8 रुपये प्रति लीटर बढ़ा द‍िया है. दरअसल, पिछले करीब दो महीने से सरकारी तेल कंपन‍ियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ग्‍लोबल मार्केट में क्रूड महंगा होने का पूरा बोझ उठा रही थीं. यह ग्‍लोबल क्राइस‍िस ईरान संघर्ष के कारण बना हुआ है.

दाम बढ़ाने से पूरा खत्‍म नहीं होगा घाटा

मई की शुरुआत में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इशारा क‍िया था क‍ि मौजूदा फाइनेंश‍ियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में तेल कंपनियों का घाटा बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये से लेकर सवा लाख करोड़ तक पहुंच सकता है. आंकड़े का मतलब हुआ क‍ि सरकारी कंपनियां रोजाना करीब 1,100 से 1,300 करोड़ का भारी-भरकम नुकसान झेल रही थीं. ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमत में हुई बढ़ोतरी भारी घाटे को पूरी तरह खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि कंपनियों को रोजाना हो रहे बड़े नुकसान के असर को थोड़ा कम करने की कोश‍िश है.

87 पैसे की बढ़ोतरी से कितनी राहत?

सवाल यह है क‍ि क्या पेट्रोल पर 87 पैसे और डीजल पर 91 पैसे की बढ़ोतरी से तेल कंपनियों का संकट दूर हो जाएगा. इसका जवाब देश में होने वाली तेल की कुल खपत के आंकड़ों में छ‍िपा है. देश में हर द‍िन करीब 46.3 करोड़ लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत होती है. देश के कुल रिटेल पंपों के 90 फीसदी हिस्से पर इन्‍हीं तीन सरकारी कंपनियों का कंट्रोल है. इसका मतलब हुआ क‍ि IOCL, BPCL और HPCL म‍िलकर रोजाना करीब 41.7 करोड़ लीटर तेल की ब‍िक्री करती हैं. हाल‍िया बढ़ोतरी से तीनों कंपनियों को रोजाना करीब 38 करोड़ रुपये का रेवेन्‍यू मिलेगा.

तेल कंपन‍ियों का घाटा क‍ितना कम हुआ?

इससे पहले दाम दो बार में की गई 3.9 रुपये की बढ़ोतरी से तेल कंपन‍ियों का कुल 163 करोड़ रुपये का घाटा कम हुआ है. इस तरह देखें तो अब तक कंपन‍ियों ने करीब 4.8 रुपये की बढ़ोतरी की है. इससे तेल कंपन‍ियों का कुल 200 करोड़ रुपये का नुकसान कम हुआ है. अब हम 200 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई की तुलना कंपनियों को रोजाना होने वाले 1100 से 1300 करोड़ रुपये के कुल घाटे से करें तो यह ग‍िरकर 900 से 1100 करोड़ रुपये रह जाता है. यानी यह राहत तेल कंपनियों के ल‍िए काफी कम है.

कीमत में बढ़ोतरी से तेल कंपन‍ियों को क‍ितनी राहत?

  • तेल कंपन‍ियों की रोजाना की ब‍िक्री—-417 म‍िल‍ियन लीटर
  • एक लीटर पर हुई बढ़ोतरी—-87 से 91 पैसे प्रत‍ि लीटर
  • हर द‍िन का एक्‍स्‍ट्रा रेवेन्‍यू—-38 करोड़ रुपये
  • पहले कीमत बढ़ाने से क‍ितना रेवेन्‍यू म‍िला—163 करोड़ रुपये
  • कीमत में बढ़ोतरी से अब तक कुल राहत—-करीब 200 करोड़ रुपये

Bureau Report

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