उत्तराखंड में पिछले कुछ दिनों से निहंगों और स्थानीय प्रशासन के बीच चल रहा तनाव गुरुवार रात उस समय चरम पर पहुंच गया, जब निहंगों का एक जत्था पुलिस और प्रशासन को चकमा देकर देहरादून में दाखिल हो गया. इस घटना के बाद राजधानी में रात भर हड़कंप मचा रहा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई.
विवाद की शुरुआत ?
इस पूरे विवाद की जड़ 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुई एक घटना में है. यहां निहंग श्रद्धालुओं और स्थानीय युवक के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हो गई, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गई. इस घटना के विरोध में 20 जून को कुछ निहंगों ने रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब पर कब्जा कर लिया और वहां के सेवादारों को बंधक बना लिया. करीब तीन दिनों तक चले इस कब्जे के बाद प्रशासन और पंजाब से आए एक प्रतिनिधिमंडल की मध्यस्थता से गुरुद्वारे को मुक्त कराया गया और वे वापस लौट गए थे.
देहरादून में तनावपूर्ण स्थिति
गुरुवार को निहंगों ने फिर से उत्तराखंड में प्रवेश करने की घोषणा की, जिससे पुलिस-प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया. विकासनगर के कुल्हाल बॉर्डर पर भारी पुलिस बल, पीएसी और पैरामिलिट्री तैनात कर दी गई थी. शाम के समय निहंगों का जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे पहुंचा. वहां अधिकारियों ने उनसे वार्ता की, लेकिन वे उत्तराखंड में प्रवेश करने की जिद पर अड़े रहे. उनकी मांग थी कि कर्णप्रयाग मामले में गिरफ्तार चारों निहंगों को रिहा कर पंजाब भेजा जाए, साथ ही उन्होंने हेमकुंड साहिब जाने की इच्छा जताई.
गुरुवार देर रात, सुरक्षा घेरे को चकमा देकर निहंगों का जत्था देहरादून शहर के भीतर पहुँच गया और रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारे में जा पहुंचा. इस सूचना के मिलते ही शहर में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया. जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल देर रात तक खुद मौके पर मौजूद रहे.
प्रशासन की कार्रवाई और वापसी
पुलिस और निहंगों के बीच लंबी बातचीत चली. प्रशासन ने पूरी स्थिति को बहुत ही संयम और संवेदनशीलता के साथ संभाला. अंत में , रात करीब 2:30 बजे निहंग जत्था दो जिप्सियों में वापस लौटने को तैयार हुआ. प्रशासन ने सुरक्षा के साथ पुलिस की टीमें जत्थे के साथ भेजीं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सुरक्षित पांवटा साहिब बॉर्डर पार कर जाएं। फिलहाल, प्रशासन ने दावा किया है कि सभी निहंग वापस भेजे जा चुके हैं.
वर्तमान स्थिति और चेतावनी
हालांकि निहंग जत्था वापस लौट गया है, लेकिन मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है. निहंग संगत ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए सुबह 11 बजे तक अपनी मांगें मानने का अल्टीमेटम दिया है. स्थानीय स्तर पर भी लोगों में आक्रोश और चिंता देखी जा रही है. जिला प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र में कड़ी निगरानी रखी हुई है.
Bureau Report
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