भारत में सभी पेट्रोल पंपों पर 20% इथेनॉल मिक्स यानी E20 पेट्रोल मिल रहा है. E20 पेट्रोल को लेकर लोगों में बड़ी चिंता है. लोगों को इस बात की चिंता सता रही है कि E20 पेट्रोल से न सिर्फ उनके बाइक-कार के माइलेज पर असर होगा, बल्कि इंजन भी खराब हो सकता है. हालांकि इस चिंता को लेकर सरकार का कहना है कि अभी E20 पेट्रोल को लेकर टेस्टिंग की जा रही है, इसके परिणाम अगले साल तक सामने आएगा. इस बीच ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक नई रिपोर्ट ने पुरानी गाड़ियों के मालिकों की चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, जो गाड़ियां केवल E10 पेट्रोल के लिए बनी हैं, उनमें E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि टू-व्हीलर्स पर इसका कोई बुरा असर नहीं देखा गया है.
ARAI ने इस फ्यूल के असर को समझने के लिए अलग-अलग इंजनों पर लंबे समय तक टेस्ट किए-
टर्बोचार्ज्ड इंजन में समस्या
फोर-व्हीलर इंजन की टेस्टिंग के दौरान, एक BS-VI टर्बोचार्ज्ड इंजन में 265 घंटे चलने के बाद समस्याएं देखी गईं. हालांकि, एक पुराना BS-IV इंजन E20 फ्यूल पर ठीक-ठाक चला.
पार्ट्स का फेल होना
कार बनाने वाली कंपनियों ने अलग-अलग टेस्ट की तो, एक कंपनी की गाड़ी तो 400 घंटे के टेस्ट में पास हो गई, वहीं दूसरी कंपनी के इंजन में 809 घंटे की टेस्टिंग के बाद थर्मोमैकेनिकल फेलियर देखा गया, जिससे उसका एग्जॉस्ट वाल्व ज्यादा हीट और प्रेशर के कारण क्रैक या रैप हो गया. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके पीछे E20 के अलावा दूसरे कारण भी हो सकते हैं.
मेटल पार्ट्स सेफ
राहत की बात यह रही कि गाड़ियों के लोहे या मेटल वाले पार्ट्स पर E20 का कोई खराब असर नहीं पड़ा. गाड़ी स्टार्ट होने और चलने में भी कोई समस्या नहीं आई.
रबर पार्ट्स को सबसे ज्यादा खतरा
इंजीनियरों का कहना है कि इथेनॉल बहुत जल्दी नमी यानी पानी सोख लेता है. इस वजह से जिन गाड़ियों को E20 के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया है, उनके रबर और प्लास्टिक के पार्ट्स जैसे- होज पाइप, गैसकेट, सील और ओ-रिंग्स समय के साथ गल या कट सकते हैं और उन्हें बदलना पड़ सकता है.
कम हो गया माइलेज
रिपोर्ट में यह भी जानकारी सामने आई है कि E10 के मुकाबले E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर गाड़ियों की फ्यूल खपत 2 से 6 प्रतिशत तक बढ़ गई है. यानी लोगों को अब पहले के मुकाबले कम माइलेज मिल रहा है.
गाड़ियां पूरी तरह सुरक्षित-कंपनियों का दावा
भले ही इस रिपोर्ट में कुछ चिंताएं सामने आई हों, लेकिन मारुति सुजुकी, टोयोटा, हुंडई, हीरो मोटोकॉर्प, टीवीएस और बजाज जैसी देश की बड़ी कंपनियों ने E20 पेट्रोल को सेफ बताया है.
मारुति सुजुकी ने अपने सर्विस डेटा का हवाला देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2026 में उन्होंने 2.84 करोड़ गाड़ियों की सर्विस की. इनमें से 1.5 करोड़ से ज्यादा गाड़ियां 3 साल से ज्यादा पुरानी थीं, जो E20 के लिए सर्टिफाइड नहीं थीं, फिर भी उनमें जंग लगने या पार्ट्स खराब होने की कोई शिकायत नहीं मिली है. कंपनियों का कहना है कि भारतीय गाड़ियां पहले से ही सेफ्टी मार्जिन को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं.
आखिर क्यों परेशान हैं लोग?
भारत ने अप्रैल 2025 में ही देश भर में E20 पेट्रोल का टारगेट पूरा कर लिया है, जो कि 2030 के तय लक्ष्य से 5 साल आगे है. इतनी तेजी से हुए बदलाव के कारण 2012 से पहले की गाड़ियां और अप्रैल 2023 से पहले बनी गाड़ियां जो E20 सर्टिफाइड नहीं हैं उनके मालिक परेशान हैं. इसके अलावा सरकार अब E22 से लेकर E30 तक के ईंधन लाने की तैयारी कर रही है, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है.
Bureau Report
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