मुंबई में मॉनसून की भारी बारिश सिर्फ आम जनता के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी आफत लेकर आई है. मुंबई के पवई इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब एक घनी आबादी वाले रिहायशी इलाके में अचानक 7 फीट लंबा खूंखार मगरमच्छ रेंगता हुआ दिखाई दिया. दरगाह के पास इस विशालकाय शिकारी को देखकर स्थानीय लोगों की सांसें अटक गईं, जिसके बाद आधी रात को ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करना पड़ा.
मुंबई में पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदी-नाले और झीलें उफान पर हैं. इसी बीच पवई झील के पास स्थित मोरारजी नगर इलाके में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक स्थानीय दरगाह के पास करीब 7 फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई दिया. रात के अंधेरे में इतने बड़े मगरमच्छ को अपनी बस्ती के पास देखकर लोगों में दहशत फैल गई. देखते ही देखते यह खबर पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई और लोग अपनी सुरक्षा को लेकर डर गए.
वन विभाग को दी गई सूचना
मगरमच्छ को आबादी वाले क्षेत्र में घूमता देख स्थानीय नागरिकों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत वन विभाग के कंट्रोल रूम को इसकी जानकारी दी. रिहायशी इलाके में मगरमच्छ होने की खबर मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स की एक स्पेशल रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर रवाना हो गई. तब तक स्थानीय लोग मगरमच्छ से सुरक्षित दूरी बनाकर उसकी हर हरकत पर नजर रख रहे थे.
टीम का सफल रेस्क्यू ऑपरेशन
मौके पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने बेहद सूझबूझ और सावधानी के साथ अपना काम शुरू किया. रिहायशी इलाका होने के कारण टीम के सामने चुनौती बड़ी थी, क्योंकि जरा सी चूक से मगरमच्छ आक्रामक हो सकता था या उसे चोट लग सकती थी. आखिरकार वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने एक संयुक्त ऑपरेशन चलाकर उस 7 फीट लंबे मगरमच्छ को बिना कोई नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से काबू में कर लिया. मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद ही स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली.
मेडिकल जांच के बाद मिलेगी आजादी
वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, पकड़े गए मगरमच्छ को तुरंत एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. वहां वन्यजीव डॉक्टरों की देखरेख में उसकी पूरी मेडिकल जांच की जा रही है. शुरुआती जांच में मगरमच्छ पूरी तरह से स्वस्थ और उसकी स्थिति स्थिर बताई गई है. डॉक्टरों से ‘फिटनेस सर्टिफिकेट’ मिलने के बाद इस मगरमच्छ को फिर से उसके प्राकृतिक आवास यानी पानी में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मॉनसून के दौरान जब पवई झील और आसपास के जलाशयों का वाटर लेवल बहुत बढ़ जाता है, तो पानी के तेज बहाव के साथ मगरमच्छ अक्सर रास्ता भटक जाते हैं. भारी बारिश के कारण पानी सड़कों और सोसायटियों तक आ जाता है, जिसके सहारे ये जीव रिहायशी इलाकों में दाखिल हो जाते हैं. प्रशासन ने अपील की है कि अगर ऐसी स्थिति दोबारा बने, तो लोग घबराएं नहीं बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें.
Bureau Report
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