उत्तर प्रदेश अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में दान और चढ़ावे में हेराफेरी का मामला इन दिनों सुर्खियों में है. जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस विवाद में नए और चौंकाने वाले मोड़ आ रहे हैं.
जांच के घेरे में ट्रस्ट के पदाधिकारी
मंदिर के दान और आभूषणों की सुरक्षा की सीधी जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज की है. इस पूरे घोटाले के सामने आने के बाद, मंदिर आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और आलोचकों ने उनसे जवाबदेही की मांग की है. लोगों का कहना है कि दान की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने में चूक हुई है, जिसके लिए कोषाध्यक्ष को अपनी सफाई देनी चाहिए.
विवाद उस समय और गहरा गया जब मीडिया रिपोर्टों में स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज के पुणे स्थित निजी बंगले का जिक्र आया. इसके बाद जनता के मन में यह संदेह गहरा गया कि क्या मंदिर के दान का उपयोग और प्रबंधन पूरी तरह सुरक्षित और भ्रष्टाचार मुक्त था. इन आरोपों के बाद अब एसआईटी (SIT) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए मंदिर के सभी वित्तीय लेन-देन और सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से जांच शुरू कर दी है.
मैं इस्तीफा नहीं दूँगा स्वामी गोविंद देव गिरि का बयान
इस पूरे विवाद के बीच, स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज का एक बड़ा बयान सामने आया है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे. उन्होंने अपने बचाव में सफाई देते हुए कहा कि अयोध्या में दान और खातों के प्रबंधन का सारा काम चंपत राय और अनिल मिश्रा देखते थे. स्वामी जी का कहना है कि यदि मंदिर के स्थानीय खातों में कोई गड़बड़ी हुई है, तो इसके लिए वे जिम्मेदार नहीं हैं. उनका दावा है कि उन्होंने ट्रस्ट के धन की सुरक्षा के लिए अपनी ओर से कोई कोताही नहीं बरती है.
आगे क्या?
अब एसआईटी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या यह दान चोरी का मामला सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों की साजिश है या इसमें प्रशासनिक स्तर पर भी कोई बड़ी मिलीभगत शामिल है. चंपत राय पर लगे इन आरोपों के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रस्ट इस पर क्या रुख अपनाता है और जांच की दिशा किस ओर मुड़ती है. फिलहाल, करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक इस मंदिर में हुए इस खुलासे ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
Bureau Report
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