फोनपे, गूगलपे, पेटीएम जैसे ऐप्स से अगर आप भी डिजिटल पेमेंट करते हैं, तो ये खबर आपको झटका दे सकती है. ऑनलाइन ट्रांजैक्शन में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. सरकार ने संसद में नया बिल पेश किया है. अगर ये बिल कानून बना, तो डिजिटल पेमेंट फ्री नहीं रहेगा. UPI पेमेंट के लिए फीस चुकानी पड़ सकती है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘ Payment and Settlement Systems Act’ पेश किया है. अगर ये बिल पास हुआ, तो यूपीआई पेमेंट पर फीस का भुगतान करना पड़ सकता है.
UPI पेमेंट में बड़े बदलाव की तैयारी
UPI से हर महीने करोड़ों का पेमेंट होता है. जुलाई 2026 में करीब 23.7 अरब पेमेंट यूपीआई के जरिए हुए और करीब 29,9 लाख करोड़ रुपये का ट्रांजैक्शन किया गया. अब तक कुछ बड़े पेमेंट को छोड़कर यूपीआई से ट्रांजैक्शन फ्री है, यानी आपको या दुकानदार को कोई चार्ज नहीं देना पड़ता है, लेकिन आने वाले दिनों में इसमें कुछ बदलाव हो सकते हैं . UPI पेमेंट पर सर्चेंट चार्ज लग सकता है. ये कितना होगा, किसे देना होगा, कौन-से पेमेंट पर लगेगा? ये सारे सवाल अनसुलझे हैं और सरकारी नोटिफिकेशन के बाद की इन सवालों के जवाब मिलेंगे.
2000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगेगा फीस ?
माना जा रहा है कि 2000 रुपये से अधिक की रकम पर चार्ज लग सकता है, हालांकि फिलहाल कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. यहां से भी समझना जरूरी है कि वित्त मंत्रालय की ओर से पेश किए ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट एक्ट’ बिल से तुरंत कोई चार्ज नहीं लगेगा. इस बिल से एक ऐसा कानून बनेगा, जो सरकार को MDR लागू करने का अधिकार मिल जाएगा.
किन्हें देना होगा UPI पर चार्ज ?
विचार किए जाने वाले प्रस्तावों के मुताबिक 2000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.3 फीसदी से 0.5 फीसदी का MDR चार्ज लग सकता है. ये चार्ज आम ग्राहकों पर नहीं, बल्कि व्यापारियों, दुकानदारों पर लगेगा. छोटे व्यापारियों को इसमें छूट मिल सकती है. जिनका सालाना चार्ज 1.5 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें MDR भरना पड़ सकता है.
MDR लाने की जरूरत क्यों पड़ी ?
साल 2020 में सरकार ने डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए MDR शुल्क खत्म कर दिया था, लेकिन लंबे वक्त से बैंक और फिनटेक कंपनियां इसकी मांग कर रही है. उनका कहना है कि डिजिटल पेमेंट का दायरा बढ़ रहा है और इस इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए निवेश की जरूरत है. जीरो चार्ज के लिए UPI पेमेंट को लंबे वक्त तक जारी रखना कंपनियों के लिए मुश्किल खड़ा कर सकता है. Google Pay, Phone Pe, Paytm जैसी तमाम पेमेंट कंपनियों ने इसकी मांग की है.
किसे देना पड़ेगा UPI फीस, किसके लिए फ्री?
MDR फीस डिजिटल पेमेंट के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक या सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों को दिया जाता है. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक MDR का बोझ मुख्य तौर पर बड़े कारोबारियों, बिजनेसमैन को देना पड़ सकता है. छोटे दुकानदारों, छोटे रिटेलर्स और आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पेमेंट आगे भी फ्री रहने वाला है.
UPI पर फीस लगा, तो क्या होगा?
लोकलसर्किल्स ने एक सर्वे में पाया कि 53 फीसदी लोग इस बात की तैयारी कर रहे हैं कि अगर यूपीआई पर MDR शुल्क लगता है, तो वो पेमेंट के दूसरे मोड की ओर जा सकते हैं. सर्वे में शामिल 53 फीसदी लोगों का कहना है कि अगर यूपीआई पर फीस लगता है, तो वो फ्री लीमिट से अधिक के रकम के लिए यूपीआई का इस्तेमाल नहीं करेंगे. 27 फीसदी लोगों का कहना है कि वो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 12 फीसदी लोग बैंक ट्रांसफर या कैश ट्रांसफर का विक्लप चुनने की बात कर रहे हैं. जबकि 12 फीसदी लोगों फीस लगने के बाद भी UPI के साथ बने रहने की वकालत करते दिखे. लोकलसर्किल्स के इस सर्वे में 322 जिले के 45000 लोगों ने हिस्सा लिया .
Bureau Report
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