72 घंटे का अल्टीमेटम… मार्क जुकरबर्ग को भारत सरकार से मांगनी होगी माफी, वरना फेसबुक पर गिरेगी गाज!

72 घंटे का अल्टीमेटम... मार्क जुकरबर्ग को भारत सरकार से मांगनी होगी माफी, वरना फेसबुक पर गिरेगी गाज!

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नीट पेपर को लेकर वीडियो हटाना फेसबुक के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है. सरकार अब मेटा पर सख्त रुख दिखा रही है. संसदीय पैनल ने मेटा के CEO जुकरबर्ग को अल्टीमेटम देते हुए 3 दिन के अंदर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. सिर्फ इतना ही नहीं पैनल ने यह भी चेतावनी दी है कि माफी न मिलने पर आईटी एक्ट की धारा 79(3) के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour मेटा से वापस ले ली जाएगी और मैटा को एक पब्लिशर मानकर कार्रवाई की जाएगी.

संसद की संचार और सूचना प्रौद्योगिकी स्थायी समिति ने मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से हटाने के मामले में तीन दिनों के अंदर बिना शर्त माफी मांगने को कहा है. 

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला शुरू होता है, बीते महीने नीट पेपर को लेकर पीएम मोदी के वीडियो को लेकर. 23 जुलाई को NEET-UG 2026 परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक विवाद के बीच पीएम मोदी ने देश के युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए कड़े कानून बनाने का आश्वासन दिया था. मेटा ने इस वीडियो को फेसबुक से करीब 5 से 6 घंटे के लिए हटा दिया था.

संसदीय समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि मेटा ने खुद माना है कि पीएम का वीडियो 4 घंटे से ज्यादा समय तक प्लेटफॉर्म से गायब था. उन्होंने इसे बेहद गंभीर मामला बताते हुए कहा कि यह देश में अस्थिरता पैदा करने की कोशिश भी हो सकती है.

सेफ हार्बर सुरक्षा पर मंडराया खतरा

भारत में आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सेफ हार्बर यानी मध्यस्थ के रूप में कानूनी सुरक्षा मिलती है. इसका मतलब है कि यूजर द्वारा पोस्ट किए गए किसी भी कंटेंट के लिए सीधे तौर पर प्लेटफॉर्म को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. लेकिन, अगर यह सुरक्षा वापस ले ली जाती है, तो मेटा को एक पब्लिशर माना जाएगा और प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले किसी भी विवादित या गैर-कानूनी कंटेंट के लिए कंपनी और उसके अधिकारियों पर सीधे केस दर्ज किया जा सकेगा.

ऑनलाइन सुरक्षा और गूगल पर भी सख्त रुख

3 अगस्त को गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और मेटा, गूगल, X, स्नैपचैट व यूट्यूब जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में समिति ने महिलाओं और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी कड़ा रुख अपनाया. पैनल ने साफ किया कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री यानी CSAM और महिलाओं के प्रति अपमानजनक कंटेंट न हटाने वाले प्लेटफॉर्म्स की लीगल इम्युनिटी खत्म कर दी जाएगी.

Bureau Report

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