प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो ब्लॉक करने से लेकर इंस्टाग्राम पर चाइल्ड एब्यूज मटीरियल यानी CSAM और AI-डीपफेक तक, सोशल मीडिया कंपनी Meta की मुश्किलों का ग्राफ भारत में लगातार बढ़ता ही जा रहा है. पीएम मोदी का वीडियो डिलीट करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए भारत सरकार ने कड़ा एक्शन लिया है और Meta की ग्लोबल टीम को 5 और 6 अगस्त को समन कर दिल्ली तलब किया है. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं IT मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने साफ कर दिया है कि दुनिया की इतनी बड़ी टेक कंपनी की तकनीकी गड़बड़ी वाली सफाई से सरकार किसी भी तरह से संतुष्ट नहीं है और अब Mark Zuckerberg की टीम से सीधे और कड़े सवाल पूछे जाएंगे.
MeitY ने मेटा की ग्लोबल टीम को 5 और 6 अगस्त को भारत तलब किया है. सरकार मेटा से यह समझना चाहती है कि दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल होने के बाद भी उसके सिस्टम में बार-बार ऐसी बड़ी लापरवाही क्यों हो रही है.
MeitY सचिव ने उठाए गंभीर सवाल
मंगलवार को AI4Bharat के एक कार्यक्रम के दौरान IT सचिव एस. कृष्णन ने इस बात की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि हम Meta से कई अहम मुद्दों पर सवाल-जवाब करेंगे. इनमें CSAM पर अब तक उठाए गए कदम, AI से बने फर्जी कंटेंट की पहचान करना और उन पर रोक लगाना और वेरिफाइड अकाउंट्स के कंटेंट टेक-डाउन को लेकर जरूरी सेफगार्ड्स शामिल हैं. सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि हम समझना चाहते हैं कि Meta की टेक्नोलॉजी उस तरह काम क्यों नहीं कर रही जैसा उसे करना चाहिए.
क्या है पूरा मामला?
सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान नीट पेपर को लेकर Meta ने पीएम नरेंद्र मोदी की उस फेसबुक पोस्ट को एक्सेस करने से रोक दिया था, जिसमें उन्होंने NEET-UG 2026 पेपर लीक के पीड़ित छात्रों को संबोधित करते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था.
इस मामले को लेकर मेटा ने जवाब दिया कि एक तकनीकी खराबी के कारण ऐसा हुआ था और पोस्ट रिस्टोर कर माफी मांगी थी. जिसके बाद IT मंत्रालय ने Meta के इस स्पष्टीकरण को अपर्याप्त बताया था.
इन मामलों पर भी घिरी Meta
CSAM
इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों में बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट सामने आने के बाद सरकार ने कंपनी को नोटिस जारी किया था. इस मामले में भी अपडेट मांगा जाएगा.
वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा
IT सचिव ने जोर देकर कहा कि किसी भी बड़े हस्ती के कंटेंट को हटाने से पहले कड़े नियमों और जांच का पालन होना चाहिए.
Safe Harbour खत्म करने की मांग
इससे पहले सोमवार को कम्युनिकेशंस और IT से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने भी मेटा के अधिकारियों को आड़े हाथों लिया. बैठक में PM मोदी के वीडियो को हटाने, कंटेंट मॉडरेशन, एल्गोरिदम के पक्षपात, डीपफेक और CSAM जैसे मुद्दों पर घंटों पूछताछ हुई.
समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर मेटा के CEO मार्क ज़ुकरबर्ग इस घटना पर खुद माफी नहीं मांगते हैं, तो कंपनी को IT एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला Safe Harbour यानी कानूनी ढाल का संरक्षण खत्म कर देना चाहिए.
4 घंटे तक गायब रहा वीडियो
सासंद दुबे के अनुसार, मेटा ने माना है कि पीएम मोदी का वीडियो 4 घंटे से अधिक समय तक प्लेटफॉर्म से गायब रहा.
गृह मंत्रालय की चेतावनियों की अनदेखी
इसके साथ ही सांसद ने आरोप लगाया कि Meta और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बच्चों और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने में नाकाम रहे हैं और उन्होंने गृह और IT मंत्रालय के सवालों के सही जवाब नहीं दिए हैं.
सिर्फ माफी से काम नहीं चलेगा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, संसदीय समिति के सामने Meta के प्रतिनिधियों ने PM की पोस्ट पर लगी रोक के लिए माफी मांगने की बात कही. हालांकि, कई सांसदों ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सिर्फ माफी मांगना काफी नहीं है, इस बड़ी चूक के लिए कानूनी जवाबदेही तय की जानी चाहिए. इस संसदीय बैठक में MeitY, गृह मंत्रालय के साथ-साथ मेटा, गूगल, X, YouTube और Snapchat के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
Bureau Report
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