मध्य प्रदेश के मशहूर कान्हा टाइगर रिजर्व से दुखद खबर सामने आई है, जहां कान्हा परिक्षेत्र की नकटीघाटी बीट (कक्ष क्रमांक 138) में एक 11 माह की मादा बाघ शावक मृत पाई गई. वन विभाग की पेट्रोलिंग टीम को अपने नियमित गश्त के दौरान शव मिला. शावक के शरीर पर कई चोटें और खरोंच के निशान पाए गए, जिससे वन अधिकारियों को शक है कि किसी बड़े जानवर या किसी दूसरे आक्रामक जंगली जानवर के साथ लड़ाई में उसकी मौत हुई होगी. घटना की जानकारी मिलने पर कान्हा प्रबंधन की एक सीनियर टीम मौके पर पहुंची, इलाके को सील किया और जांच शुरू की.
प्रोटोकॉल के तहत किया गया अंतिम संस्कार
शावक का पोस्टमार्टम किया गया और फोरेंसिक जांच के लिए जरूरी सैंपल सुरक्षित रखे गए. वन्यजीव प्रोटोकॉल के अनुसार शावक का अंतिम संस्कार किया गया. वन विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि किस शिकारी जंगली जानवर के साथ हुई लड़ाई में शावक की जान गई. कान्हा टाइगर रिजर्व के सहायक संचालक पी. के. वर्मा ने बताया कि पेट्रोलिंग टीम को सबसे पहले उस इलाके में बाघ के पंजों के निशान और खून के धब्बे मिले. इसके बाद आस-पास तलाशी लेने पर शावक का शव मिला. फिलहाल मौत की असली वजह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी.
पहले भी हो चुकी हैं मौतें
बता दें कि इससे पहले एक नर बाघ का शव मिला था. यह घटना तब हुई थी, जब मई के महीने में 15 दिनों के भीतर कान्हा और उसके आस-पास के इलाकों में वन्यजीवों की मौत की कई घटनाएं सामने आईं थी. साल की शुरुआत में भी कान्हा टाइगर रिजर्व और उसके आस-पास के इलाकों से बाघों और तेंदुओं की संदिग्ध मौत के मामले सामने आए थे, जिनकी जांच के लिए फॉरेंसिक सैंपल भेजे गए थे.
वहीं अब कान्हा टाइगर रिजर्व में नन्हे शावक की यह मौत वन्यजीव प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ा झटका है. हालांकि जंगल में अपने इलाके के लिए संघर्ष एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन इस तरह बाघों की असमय मौत चिंता का विषय है. अब यह देखना बाकी है कि फ़ोरेंसिक रिपोर्ट से क्या तथ्य सामने आते हैं और पार्क में मौजूद दूसरे शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग क्या कड़े कदम उठाता है.
Bureau Report
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