चीनी की ‘कड़वी’ मिठास के बाद रुला रहा प्याज, 3 महीने में 82% बढ़ी महंगाई, ‘कांदा एक्सप्रेस’ से भी राहत नहीं

चीनी की 'कड़वी' मिठास के बाद रुला रहा प्याज, 3 महीने में 82% बढ़ी महंगाई, 'कांदा एक्सप्रेस' से भी राहत नहीं

चीनी के बाद अब प्याज की महंगाई रुला रही है. मंडी में प्याज की कीमत 55 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है. अगर आप बिग बास्केट, ब्लिंकिट जैसे ईकॉमर्स प्लेटफॉर्म से प्याज खरीदते हैं, तो कीमत 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है. उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते साढ़े 3 महीनों में प्याज की कीमतों में 82 फीसदी से अधिक की तेजी आ चुकी है.

रॉकेट की रफ्तार से भागी प्याज की महंगाई 

जून के बाद से ही प्याज के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. प्याज की खुदरा कीमत जो 29 से 30 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, उसके रेट 17 सितंबर के आसपास 53 से 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुके हैं. मतलब जून से सितंबर के बीच प्याज की खुदरा कीमत में 82 फीसदी से अधिक का उछाल आया हुआ है. थोक बाजार की बात करें, तो जून में प्याज का औसत थोक मूल्य 22.60 रुपये प्रति किलो पर था, सितंबर के पहले हफ्ते में 46.20 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया. थोक मूल्य भी दोगुनी हो चुकी है.  

त्योहारों से पहले प्याज की महंगाई की वजह क्या है  

 गर्मी की वजह से प्याज के फसलों को क्षति: महाराष्ट्र प्याज का प्रमुख उत्पादक राज्य है, लेकिन गर्मी की वजह से फसलों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं बेमौसम बरसात ने प्याज की फसलों क भारी नुकसान पहुंचाया है.बारिश और गर्मी की वजह से प्याज के फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिसकी वजह से प्याज के गिरते स्टॉक के साथ कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है.  खरीफ की नई फसल आने में देरी के चलते बाजार में प्याज के सप्लाई पर दबाव बना हुआ है, जिसकी वजह से कीमतें कम नहीं हो रही हैं.  त्योहारी सीजन में मांग बढ़ रही है, लेकिन सप्लाई डिमांड के अनुरूप नहीं होने से कीमतों में तेजी आ रही है. भारी बारिश और बाढ़ की वजह से लॉजिस्टिक्स चुनौतियां भी प्याज की कीमतों को बढ़ा रहा है.  मंडियों तक प्याज नहीं पहुंच पा रहा है.  पुरानी फसल का स्टॉक खत्म होने और नई फसल के आने में लगने वाला समय प्याज के दाम और उसकी आपूर्ति को असंतुलित कर रहा है.  

कब तक गिरेंगे प्याज के दाम, क्या कर रही है सरकार    

प्याज की कीमतों में अभी तेजी जारी है,जिसे कुछ हफ्ते ऐसे हालात बने रह सकते हैं. नई फसल के बाजार में आने के बाद प्याज की कीमत गिर सकती है. प्याज की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने कांदा एक्सप्रेस चलाने का फैसला किया. बफर स्टॉक से राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही है. घरेलू जरूरत को पूरा करने के लिए निर्यात पर रोक-टोक जैसे कदम उठाए हैं. घरेलू खुदरा बाजार में प्याज की कीमतों  को नियंत्रित करने के लिए सरकार हर संभव कोशिश कर रही है. अब उम्मीद है कि नई फसल के आवक के साथ प्याज की कीमत कंट्रोल हो सकेगी. 

Bureau Report

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