पंजाब में ड्रग्स समेत अन्य नशे की समस्या इतनी विकराल हो गई थी कि ‘उड़ता पंजाब’ नाम की एक फिल्म बन गई थी. महामारी जैसी बन चुकी नशे की समस्या अहम चुनावी मुद्दा रही है. राजनीतिक दल और सरकारें ‘नशा मुक्त पंजाब’ का नारा लगाकर अपने मिशन के लिए जान की बाजी लगा देने का दावा करती हैं, लेकिन हकीकत ये है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को अपनी जान देनी पड़ रही है. संगरूर में महीने भर के भीतर नशे के नेक्सस का खुलासा करने के बाद दूसरे शख्स ने अपनी जिंदगी में डर-धमकी से हताश होकर सुसाइड कर ली.
संगरूर में नशे के मुद्दे को लेकर एक बार फिर सियासी घमासान छिड़ गया है. संगरूर के डिप्टी कमिश्नर आफिस के बाहर जगसीर सिंह उर्फ जग्गा नाम के युवक ने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ निगल लिया. उसे फौरन इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी. जग्गा का आरोप था कि उसके गांव में नशे की बिक्री की शिकायतों के बावजूद पुलिस-प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की. इसके बाद बीजेपी, कांग्रेस और अकाली नेताओं ने भगवंत मान सिंह की आप सरकार को चौतरफा घेर लिया है.
जग्गा ने बनाए थे ड्रग्स पैडलर्स के वीडियो
जगसीर के साथ डीसी कार्यालय पहुंचे उसके दोस्त मनजिंदर सिंह ने दावा किया कि जगसीर ने गांव में कथित तौर पर चिट्टा बेचने वालों के वीडियो बनाए थे. इसके बाद उसके साथ मारपीट हुई. मनजिंदर ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई.
मामले की जानकारी मिलने पर संगरूर सिटी थाने के SHO मनप्रीत सिंह भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने तत्काल टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि युवक का इलाज चल रहा है और उसके उपचार के बाद मामले की ज्यादा जानकारी दी जा सकेगी. हालांकि दूसरे अस्पताल में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया.
नशा मुक्त पंजाब कब?
जग्गा की खुदकुशी के इस मामले में संगरूर के ही गुलजार सिंह की सुसाइड के मामले की यादें ताजा करा दी हैं. गुलजार ने कथित तौर पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने इलाके में नशे की उपलब्धता का मुद्दा उठाया था. उनके परिवार ने आरोप लगाया था कि इसके बाद उन पर दबाव बनाया गया और उन्हें परेशान किया गया. हालांकि इन आरोपों से जुड़े मामले की जांच चल रही है और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल में राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है.
पंजाब की मान सरकार ने 1 मार्च 2025 को ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान की शुरुआत करके पंजाब को नशा मुक्त कराने का दावा किया था आज करीब डेढ़ साल का वक्त बीतने के बाद भी ये समस्या विकराल होकर दूसरों को निगल रही है.
नशे के कारोबारियों में रत्ती भर खौफ भी नहीं दिखता, जबकि आम आदमी पार्टी की वेबसाइट में इसी साल 14 जुलाई 2026 में युद्ध नशों विरुद्ध अभियान के 500 दिन पूरे होने के मौके पर इस योजना की कामयाबी के खूब ढोल पीटे गए थे. स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने तब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शुरुआत की. जिसका मूल मंत्र ‘प्रोटेक्ट, हील एंड प्रिवेंट’ (सुरक्षा, उपचार और रोकथाम) है. यह पंजाब की आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित करने का मिशन है. मान ने पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त करने का जो वादा किया था, उसे हमारी सरकार पूरी ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और सुनियोजित रणनीति के साथ पूरा कर रही है.
‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ का फायदा क्या इन्हें नहीं मिला?
बलबीर सिंह ने तब कहा था कि इन 500 दिनों में ‘सेफ पंजाब हेल्पलाइन’ (97791-00200) पर 46,342 सूचनाएं प्राप्त हुईं, जिनके आधार पर 22,960 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया. इससे स्पष्ट है कि लोगों का सरकार और कानून लागू करने वाली एजेंसियों पर भरोसा लगातार बढ़ रहा है. अगर बलबीर सिंह के दावों में दम था तो सवाल अब ये उठता है कि अगर पुलिस-प्रशासन वाकई इतना सक्रिय है तो गुलजार और जग्गा को इस हेल्पलाइन या अन्य किसी मंच से शिकायत करने का लाभ क्यों नहीं मिला?
विपक्ष ने घेरा
कांग्रेस के पंजाब प्रभारी सचिन पायलट ने आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों पर दबाव बनाने के साथ उनके ऊपर हमले हो रहे हैं. जगसीर के मामले का हवाला देते हुए पायलट ने सरकार और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाए.
विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि संगरूर खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान का गृह जिला है और यहां नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले व्यक्ति के साथ ऐसी घटना गंभीर सवाल खड़े करती है. उन्होंने सरकार के ‘ड्रग फ्री पंजाब’ से जुड़े ‘युद्ध नशों विरुद्ध कैंपेन’ पर भी सवाल उठाए.
बीजेपी नेता परमिंदर सिंह बराड़ ने जगसीर के मामले को गुलजार सिंह और मोहंजीत सिंह से जुड़े हालिया घटनाक्रम से जोड़ते हुए आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा.
बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों को कथित तौर पर दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा है.
बताते चलें कि जगसीर सिंह के मामले में नशे की बिक्री, मारपीट, धमकी या पुलिस की निष्क्रियता से जुड़े आरोप अभी स्वतंत्र रूप से साबित नहीं हुए हैं. पुलिस की जांच और जगसीर का बयान ही घटनाक्रम की पूरी तस्वीर साफ करेंगे. लेकिन संगरूर में लगातार सामने आए इन दोनों मामलों ने पंजाब में नशे के खिलाफ भगवंत मान की सरकार के अभियान की जमीनी स्थिति पर बहस छेड़ दी है.
Bureau Report
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