बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस देश छोड़ गए 3 इतालवी, एयर इंडिया की चूक पर उठे सवाल; क्या है एयरलाइन ‘ईजी कनेक्ट’ सर्विस?

बिना इमिग्रेशन क्लीयरेंस देश छोड़ गए 3 इतालवी, एयर इंडिया की चूक पर उठे सवाल; क्या है एयरलाइन 'ईजी कनेक्ट' सर्विस?

दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी खामी का मामला सामने आया है. जी हां, सुरक्षा जांच से जुड़ी यह खबर बेहद चौंकाने वाली है. यहां तीन इतालवी नागरिक बिना किसी इमिग्रेशन क्लीयरेंस और सिक्योरिटी क्लीयरेंस के दिल्ली से म्यूनिख के लिए उड़ान भर गए. सितंबर के पहले हफ्ते की इस घटना ने देश की सुरक्षा एजेंसियों और सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के होश उड़ा दिये हैं. इस मामले के सामने आने के बाद सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने टाटा ग्रुप की एयरलाइन ‘एयर इंडिया’ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

यह मामला 3 सितंबर की रात का बताया जा रहा है, जब तीन इतालवी यात्रियों ने अमृतसर से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की कनेक्टिंग फ्लाइट ली थी. इसके बाद 4 सितंबर की तड़के तीनों नागरिक दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे. दिल्ली में इमिग्रेशन काउंटर से गुजरे बिना वे तीनों सीधे म्यूनिख जाने वाली लुफ्थांसा की इंटरनेशनल फ्लाइट में सवार हो गए. यह गंभीर लापरवाही उस समय सामने आई जब फ्लाइट रवाना होने के बाद यात्रियों के डेटा का मैनुअल मिलान किया गया. इस गड़बड़ी के सामने आने के बाद मिनिस्ट्री की तरफ से एयर इंडिया को 7 दिन के अंदर लिखित जवाब देने का आदेश दिया है.

क्या है एयर इंडिया की ‘ईजी कनेक्ट’ सर्विस?

भारी सुरक्षा और तमाम स्टॉफ के बीच यह चूक कैसे हुई? पूरी चूक को समझने के लिए पहले आपको एयर इंडिया के ‘हब-एंड-स्पोक’ यानी ‘ईजी कनेक्ट’ मॉडल को जानना जरूरी है. इस सर्विस के तहत अमृतसर, वाराणसी और अहमदाबाद जैसे चुनिंदा डोमेस्टिक एयरपोर्ट से दिल्ली होकर विदेश जाने वाले यात्रियों को उनके पहले ही एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन फैसेलिटी दे दी जाती है. ऐसे इंटरनेशनल यात्रियों के बोर्डिंग पास पर स्पेशल कोड ‘I’ दर्ज होता है. इससे वे दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद बिना रुके सीधे इंटरनेशनल डिपार्चर गेट की की तरफ बढ़ जाते हैं. लेकिन, जिन यात्रियों को दिल्ली में इमिग्रेशन प्रोसेस पूरा करना होता है उनके बोर्डिंग पास पर ‘D’ लिखा होता है.

कोड की गलतफहमी से हुई चूक

सूत्रों के अनुसार तीनों इतालवी नागरिक ‘ईजी कनेक्ट’ सर्विस के लिए पात्र नहीं थे. ये तीनों आगे एयर इंडिया की बजाय लुफ्थांसा की फ्लाइट से जर्मनी जा रहे थे. उनके बोर्डिंग पास पर नियमानुसार ‘D’ कोड लिखा था. जिसका सीधा सा मतलब यह था कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट के डोमेस्टिक अराइवल से बाहर आना था और फिर से इमिग्रेशन प्रोसेस को पूरा करना था. लेकिन एयरलाइन स्टाफ और ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी की अनदेखी से तीनों यात्री ‘I’ कोड वाले इंटरनेशनल यात्रियों के साथ मिलकर सीधे बोर्डिंग गेट पर चले गए और वहां उन्हें किसी ने नहीं रोका.

सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के तीखे सवाल

घटना से नाराज सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने एयर इंडिया मैनेजमेंट से कई तीखे सवाल पूछे हैं. सरकार ने यह भी पूछा कि आखिर ‘D’ कोड वाले यात्री इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया में खुलेआम कैसे घूमते रहे और उन्हें अराइवल एरिया की तरफ रिडायरेक्ट क्यों नहीं किया गया. सरकार ने दिल्ली एयरपोर्ट पर ट्रांसफर यात्रियों की जिम्मेदारी संभालने वाली एयर इंडिया की ग्राउंड हैंडलिंग एजेंसी ‘AISATS’ के कामकाज को लेकर भी जवाब मांगा है. मिनिस्ट्री की तरफ से इस बात पर सख्त आपत्ति जताई गई है कि अमृतसर से आई फ्लाइट के डोमेस्टिक और इंटरनेशनल डेटा का मिलान तुरंत क्यों नहीं किया गया.

होम सेक्रेटरी की अध्यक्षता में होगी जांच

मामले की संवेदनशीलता देखते हुए होम सेक्रेटरी गोविंद मोहन जल्द ही बड़ी समीक्षा बैठक बुलाने वाले हैं. इस मीटिंग में सिविल एविएशन मिनिस्ट्री, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, एयर इंडिया और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टॉप लेवल अधिकारी शामिल होंगे. एयर इंडिया का यह हब एंड स्पोक मॉडल कुछ समय पहले ही सरकार के सपोर्ट से शुरू किया गया था. इससे देश को ग्लोबल एविएशन हब बनाया जा सकेगा और यात्रियों का समय बचाया जा सकेगा. लेकिन इस तरह की सिक्योरिटी डिफाल्ट ने पूरे सिस्टम और एयरपोर्ट सिक्योरिटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Bureau Report

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