पटना, 19 सितंबर 2026 बिहार में बाढ़ का संकट गंभीर बना हुआ है। राज्य के 15 जिलों में करीब 50 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में घर, खेत और सड़कें पानी में डूबी हुई हैं, जबकि बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
राज्य सरकार की ओर से 14 सितंबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ से 15 जिलों के 88 प्रखंडों और 575 ग्राम पंचायतों में लगभग 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।
इन 15 जिलों में बाढ़ का असर
बाढ़ प्रभावित जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल हैं।
गंगा और राज्य की कई अन्य प्रमुख नदियों के उफान तथा भारी बारिश के कारण निचले इलाकों में बड़े पैमाने पर पानी भर गया है।
कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
कुछ स्थानों पर नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन, बागमती और घाघरा जैसी नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
पानी घटने वाले क्षेत्रों में भी लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। कई स्थानों पर जलजमाव के साथ-साथ नदी किनारे कटाव का खतरा बना हुआ है। प्रशासन संवेदनशील तटबंधों और कटाव वाले इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है।
1,200 से अधिक सामुदायिक रसोइयों के जरिए मदद
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया है। हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,260 सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से अब तक करीब 1.20 करोड़ भोजन की थालियां परोसी जा चुकी हैं।
इसके अलावा 13 राहत शिविरों में हजारों लोगों के रहने, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। प्रभावित इलाकों में करीब चार लाख तिरपाल और 73 हजार से अधिक सूखा राशन पैकेट भी वितरित किए गए हैं।
NDRF और SDRF की टीमें राहत कार्यों में जुटीं
प्रभावित क्षेत्रों में NDRF और SDRF की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। नावों के जरिए बाढ़ में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर ले जाने का काम किया जा रहा है।
बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर खेत पानी में डूब गए हैं। हालांकि, फसलों को हुए कुल नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी जारी है और पानी घटने के बाद नुकसान की विस्तृत तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
बारिश कम, फिर भी बाढ़ की मार
इस वर्ष बिहार में मानसून सीजन के दौरान कुल बारिश सामान्य से कम रही है, इसके बावजूद राज्य के बड़े हिस्से में गंभीर बाढ़ की स्थिति बनी। विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के बाद के चरण में हुई तेज बारिश, नदियों के बढ़े जलस्तर, मिट्टी में पहले से मौजूद नमी और जल निकासी से जुड़ी परिस्थितियों ने बाढ़ की स्थिति को प्रभावित किया है।
फिलहाल प्रशासन बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के साथ नदियों के जलस्तर, तटबंधों और कटाव संभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
Bureau Report
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