थाली में परोसा जा रहा है Slow Poison! 14 साल के हिंदुस्तानी बच्चे के गैजेट ने खोली सब्जियों की पोल

थाली में परोसा जा रहा है Slow Poison! 14 साल के हिंदुस्तानी बच्चे के गैजेट ने खोली सब्जियों की पोल

आजकल के यूथ में हेल्थ और फिटनेस का ट्रेंड बहुत तेजी से बढ़ रहा है. हम सब डाइट में ज्यादा से ज्यादा फ्रूट्स, ग्रीन वेजीज और सलाद शामिल करते हैं. लेकिन बाजार से लाए इन फ्रेश आइटम्स को जब हम किचन में पानी से धोते हैं, तो मन में एक डर हमेशा बना रहता है कि क्या इनमें छिपे जहरीले पेस्टिसाइड्स (कीटनाशक) सच में पूरी तरह साफ हो पाए हैं. पानी से धोने के बाद भी केमिकल्स के अंश बचे रह जाते हैं, जिन्हें हम खाली आंखों से नहीं देख सकते.

इसी डेली लाइफ की बड़ी प्रॉब्लम का बहुत ही टेक-सैवी और स्मार्ट हल ढूंढा है 14 साल के भारतीय मूल के स्टूडेंट सिरिश सुबाष ने. सिरिश ने एक ऐसा AI पॉकेट डिवाइस बनाया है जिसका नाम उन्होंने ‘PestiSCAND’ रखा है. यह छोटा सा गैजेट यह जांचने में मदद करता है कि धोने के बाद भी फल या सब्जी पर पेस्टिसाइड बचा है या नहीं. इस कमाल के आविष्कार के लिए सिरिश को अक्टूबर 2024 में अमेरिका का प्रतिष्ठित ‘America’s Top Young Scientist’ का खिताब और 25,000 डॉलर (करीब 21 लाख रुपये) का प्राइज मिला था. इसके बाद फरवरी 2025 में सिरिश को जॉर्जिया स्टेट कैपिटोल में उनके इस इनोवेशन के लिए आधिकारिक रूप से सम्मानित (Honored) भी किया गया. किचन में फल-सब्जियां धोने के बाद भी केमिकल रह जाने की आम टेंशन को देखकर सिरिश को यह आईडिया आया था, जिस पर वे अभी भी लगातार सुधार और काम कर रहे हैं.

किचन की छोटी सी टेंशन से आया बड़ा AI आइडिया

जॉर्जिया के स्नेलविले में रहने वाले सिरिश सुबाष अभी सिर्फ 9वीं क्लास में पढ़ाई कर रहे हैं. सिरिश के मन में इस डिवाइस को बनाने का ख्याल अपने ही घर के किचन से आया. उन्होंने नोटिस किया कि उनके घर में जब भी फल या सब्जियां लाई जाती हैं, तो उन्हें पानी में काफी देर तक धोया जाता है. लेकिन धोने के बाद भी किसी को यह पक्का नहीं पता होता था कि वे 100% केमिकल-फ्री हुए हैं या नहीं.

लैब में जाकर सब्जियों की जांच कराना आम इंसान के लिए पॉसिबल नहीं है. इसी इन्फॉर्मेशन गैप को खत्म करने के लिए सिरिश ने सोचा कि क्यों न एक ऐसी पोर्टेबल और आसान मशीन बनाई जाए जिसे कोई भी अपने किचन में आसानी से इस्तेमाल कर सके. बस फिर क्या था, इसी सोच ने जन्म दिया PestiSCAND डिवाइस को.

AI टेक्नोलॉजी और 85% से ज्यादा की शानदार एक्यूरेसी

PestiSCAND कोई आम गैजेट नहीं है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और लाइट-बेस्ड स्पेक्ट्रोस्कोपी तकनीक का कॉम्बिनेशन यूज किया गया है. जब आप इस डिवाइस को किसी फल या सब्जी के पास ले जाते हैं, तो यह उस पर खास तरह की लाइट डालता है और वहां से रिफ्लेक्ट होने वाले सिग्नल को एनालाइज करता है. AI एल्गोरिदम तुरंत बता देता है कि उस फ्रूट या वेजी के सरफेस पर पेस्टिसाइड मौजूद है या नहीं.

3M और कॉम्पिटिशन के जजों द्वारा की गई टेस्टिंग में इस डिवाइस को पालक और टमाटर पर टेस्ट किया गया. टेस्टिंग के दौरान PestiSCAND ने 85% से भी ज्यादा एक्यूरेसी के साथ पेस्टिसाइड्स को डिटेक्ट किया. सिरिश का यह प्रोजेक्ट अपनी स्पीड और सटीकता दोनों में ही टेस्टिंग के पैरामीटर्स पर बिल्कुल खरा उतरा.

धोने का ऑप्शन नहीं, बल्कि सेफ्टी की एक और लेयर

सिरिश ने अपने इंटरव्यूज में यह बात बहुत साफ की है कि उनका यह AI डिवाइस सब्जियां धोने का विकल्प बिल्कुल नहीं है. ऐसा नहीं है कि आप सब्जी लाएं और बिना धोए सीधे स्कैनर का इस्तेमाल कर लें. सिरिश का कहना है कि लोगों को अपनी डेली हैबिट के मुताबिक पहले फल और सब्जियों को पानी से अच्छे से धोना ही चाहिए.

सब्जियों को धोने के बाद PestiSCAND को एक एक्स्ट्रा चेकिंग टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए ताकि आप पूरी तरह श्योर हो सकें कि जो खाना आप खा रहे हैं, वो सेफ है. यह डिवाइस आपके किचन में खाने की सुरक्षा के लिए एक एक्स्ट्रा गार्ड की तरह काम करता है.

आखिर पेस्टिसाइड्स को लेकर इतनी चिंता क्यों जरूरी है

अगर आप सोच रहे हैं कि पेस्टिसाइड्स को लेकर इतना हाइप क्यों है, तो US फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़े देखना बहुत जरूरी है. सिरिश ने अपने प्रोजेक्ट रिसर्च में FDA का डेटा शेयर किया, जिसमें सामने आया था कि लगभग 70.6% सैंपल प्रोड्यूस में किसी न किसी तरह के पेस्टिसाइड रेसिड्यू पाए गए थे.

हालांकि, किसी फल पर पेस्टिसाइड का थोड़ा सा अंश होना ही तुरंत बीमारी की वजह नहीं बनता, क्योंकि इसका असर केमिकल के टाइप, उसकी मात्रा और आप उसके संपर्क में कितने समय तक रहते हैं, इस पर डिपेंड करता है. लेकिन लंबे समय तक पेस्टिसाइड्स वाला खाना खाने से कैंसर और न्यूरोलॉजिकल डिसीज जैसी गंभीर बीमारियों का रिस्क बढ़ सकता है. सिरिश का मकसद किसी बीमारी का इलाज करना नहीं था, बल्कि लोगों को उनके खाने के बारे में सही जानकारी देना था.

बड़े सेटअप से ब्लूटूथ वाले पॉकेट डिवाइस तक का सफर

कोई भी बड़ा इनोवेशन एक झटके में तैयार नहीं होता. सिरिश को भी PestiSCAND को इस मुकाम तक लाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. शुरुआत में जब सिरिश ने काम शुरू किया था, तब उनका सेटअप काफी बड़ा और भारी था, जिसे कहीं ले जाना बहुत मुश्किल था.

इसके बाद उन्होंने डिवाइस के साइज पर काम किया और इसे छोटा, हल्का और हैंडहेल्ड (हाथ में पकड़े जाने लायक) बनाया. इसके लेटेस्ट वर्जन में ब्लूटूथ कनेक्टिविटी दी गई है. इसका मतलब है कि यह डिवाइस बिना किसी केबल के सीधे आपके स्मार्टफोन से कनेक्ट हो सकता है. इसे आप अपने किचन से लेकर सुपरमार्केट तक कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं. सिरिश ने कॉम्पिटिशन में प्रेजेंट करने से पहले इसके कई राउंड्स टेस्ट किए ताकि रिजल्ट्स में कोई गड़बड़ न हो.

America’s Top Young Scientist कॉम्पिटिशन क्या है

यह कॉम्पिटिशन अमेरिका का बहुत ही प्रतिष्ठित साइंस फेयर है. इसे हर साल साइंस टेक्नोलॉजी की दिग्गज कंपनी 3M और Discovery Education मिलकर ऑर्गनाइज करते हैं. इसमें पूरे अमेरिका के मिडल स्कूल (6वीं से 8वीं/9वीं क्लास) के सैकड़ों स्टूडेंट्स भाग लेते हैं. इस कॉम्पिटिशन का मेन फोकस ऐसे STEM प्रोजेक्ट्स पर होता है जो दुनिया की रियल-लाइफ प्रॉब्लम्स का साइंस से सॉल्यूशन निकाल सकें.

हर साल जून के महीने में देशभर से टॉप 10 फाइनलिस्ट चुने जाते हैं. इन 10 बच्चों को 4 महीने का टाइम दिया जाता है, जिसमें 3M के टॉप साइंटिस्ट्स उन्हें वर्चुअली गाइड करते हैं और मेंटरशिप देते हैं. सिरिश को भी 3M के साइंटिस्ट्स के साथ काम करने और अपने PestiSCAND को और बेहतर बनाने का मौका मिला. इसके बाद अक्टूबर 2024 में मिनेसोटा में ग्रैंड फाइनल हुआ जहां फाइनलिस्ट्स ने अपने वर्किंग मॉडेल्स पेश किए.

25,000 डॉलर का बड़ा इनाम और सिरिश का ब्राइट फ्यूचर

14 और 15 अक्टूबर 2024 को हुए इस बड़े इवेंट में सिरिश सुबाष के PestiSCAND प्रोजेक्ट को सबसे ज्यादा इनोवेटिव और यूजफुल माना गया. जजों ने सिरिश को ‘America’s Top Young Scientist’ का विनर चुना. उन्हें ट्रॉफी के साथ 25,000 डॉलर का चेक दिया गया.

3M कंपनी का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म बच्चों को सिर्फ प्राइज देने तक सीमित नहीं है. इस कॉम्पिटिशन के पिछले विनर्स आगे चलकर अपने आइडिया का पेटेंट करवा चुके हैं, खुद की कंपनियां शुरू कर चुके हैं और फोर्ब्स की ’30 अंडर 30′ लिस्ट में भी जगह बना चुके हैं. सिरिश के लिए भी यह एक बहुत बड़ी शुरुआत है.

आज के यूथ के लिए सिरिश बने एक बड़े इंस्पिरेशन

सिरिश सुबाष की यह सक्सेस स्टोरी दिखाती है कि अगर आपके पास किसी प्रॉब्लम को सॉल्व करने का जुनून है, तो आपकी उम्र बिल्कुल मायने नहीं रखती. 14 साल की उम्र में जहां ज्यादातर बच्चे गेमिंग और सोशल मीडिया में बिजी रहते हैं, वहीं सिरिश ने अपनी कोडिंग और साइंस नॉलेज का सही इस्तेमाल करके एक ऐसा डिवाइस बनाया जो हर घर से जुड़ा है.

सिरिश का यह PestiSCAND डिवाइस अभी एक्सपेरिमेंटल स्टेज पर है, लेकिन आने वाले समय में यह हम सभी के किचन का एक जरूरी हिस्सा बन सकता है. सिरिश की यह कामयाबी पूरे देश और भारतीय समुदाय के लिए एक बहुत ही गर्व की बात है.

Bureau Report

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