कांग्रेस ने बढ़ती आर्थिक असमानता को देश की सबसे गंभीर चिंताओं में से एक बताते हुए केंद्र सरकार से महंगाई पर लगाम लगाने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि सरकार को आम लोगों पर बढ़ते आर्थिक दबाव की वास्तविकता स्वीकार करनी चाहिए और इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
कांग्रेस के महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परिवार बैंक जमा, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संपत्तियों में अधिक निवेश कर रहे हैं, लेकिन उनका नया कर्ज इससे कहीं तेजी से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में परिवारों की शुद्ध वित्तीय बचत करीब चार प्रतिशत घटकर 21.69 लाख करोड़ रुपये रह गई। पिछले वित्त वर्ष में यह 22.57 लाख करोड़ रुपये थी।
‘महंगाई बढ़ी, कर्ज बढ़ा और आमदनी घटी’
जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “बढ़ती महंगाई, बढ़ता कर्ज, घटती कमाई, मोदी सरकार में मध्यम वर्ग के हिस्से आई सिर्फ तबाही।” उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार महंगाई की वास्तविक स्थिति छिपाने के लिए आंकड़ों में हेरफेर कर रही है। रमेश ने कहा कि अर्थव्यवस्था में सुस्ती और रोजगार के घटते अवसरों का असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि कंपनियां कम भर्तियां कर रही हैं और कुछ लोगों की लंबे समय से चली आ रही नौकरियां भी जा रही हैं।
घरेलू बजट संभालने में परिवारों को परेशानी
कांग्रेस नेता ने कहा कि बढ़ती महंगाई के बीच लोगों की आमदनी और बचत पर दबाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, परिवार रोजमर्रा के खर्च पूरे करने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं। उन्होंने दावा किया कि आर्थिक दबाव के कारण परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए अपनी बचत तक खर्च करनी पड़ रही है।
रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि वेतन में या तो बढ़ोतरी नहीं हो रही है या महंगाई के हिसाब से उसकी वास्तविक क्रय शक्ति घट रही है। उन्होंने कहा कि एक ओर अमीरों की संपत्ति और कंपनियों का मुनाफा बढ़ रहा है, वहीं मध्यम वर्ग के परिवारों को घरेलू बजट संभालने में मुश्किल हो रही है।
‘जीडीपी से पूरी तस्वीर नहीं मिलती’
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार जीडीपी के आंकड़ों का हवाला देकर आर्थिक संकट की चिंताओं को खारिज करती है, जबकि गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के दावे तभी सार्थक हैं, जब उसका लाभ आम लोगों तक पहुंचे।
उनके मुताबिक, यदि आय और संपत्ति का बड़ा हिस्सा कुछ लोगों तक सीमित रह जाता है और आम परिवार महंगाई, कर्ज तथा घटती बचत के दबाव में रहते हैं, तो केवल जीडीपी के आंकड़े जमीनी स्थिति नहीं बता सकते। कांग्रेस लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना करती रही है। पार्टी ने इन नीतियों को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताया है। वहीं, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए जीडीपी के आंकड़ों का हवाला दिया है।
Bureau Report
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