1 कचौड़ी 2 समोसा… सोशल मीडिया पर कैसे मूवमेंट बना प्रोटेस्ट का स्लोगन? इस ट्रेंड से क्या समझाना चाह रहीं लड़कियां

1 कचौड़ी 2 समोसा... सोशल मीडिया पर कैसे मूवमेंट बना प्रोटेस्ट का स्लोगन? इस ट्रेंड से क्या समझाना चाह रहीं लड़कियां

दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन चल रहा है. सैकड़ों युवतियां और छात्राएं वनुम सेफ्टी को लेकर रैली और मार्च कर रही हैं. इस बीच तरह-तरह के नारे भी लगे रहे हैं. इंटरनेट पर महिलाओं की ओर से लगाया गया नारा ‘एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों पर क्या भरोसा’ खूब वायरल हो रहा है. एक जमाने में जब लोग बिल्कुल सीरियस होकर प्रोटेस्ट करते थे, तो वहीं अब मीम कल्चर और चुटीले नारों ने प्रदर्शन की तरफ लोगों का ध्यान खींचा है.  

अगर आपने टीवी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ देखा है, तो उसके गोकुलधाम प्रीमियर लीग वाला एपिसोड तो देखा होगा, जिसमें क्रिकेट मैच से पहले दया अहमदाबाद के पोल में गली के लोगों से बात कर रही होती है. इस दौरान एक शख्स एक प्लेट में 1 कचौड़ी और 2 समोसा लिए दया से बोलता है कि हैलो दया बेन मैं सचिन बोल रहा हूं. एक कचौड़ी, दो समोसा, जीजा की टीम का क्या भरोसा. इसी लाइन को ही प्रोटेस्ट में नारे के लिए इस्तेमाल किया गया.   

एक कचौड़ी दो समोसा का नारा क्यों लगा रही लड़कियां? 

आज के समय में इंटरनेट की पहुंच हर जगह है. ऐसे में लोगों के पास क्रिएटिविटी दिखाने और उसे ढूंढने के लिए पहुंच काफी आसान है. प्रोटेस्ट में भी लोग काफी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्योंकि इससे लोगों का ध्यान आसानी से खींचा जा सकता है. जुलाई 2026 में जंतर-मंतर में हुए प्रोटेस्ट में भी यही नजारा देखने को मिला था. नारेबाजी के इस तरीके से साफ पता चलता है कि छात्राएं-महिलाएं उन पुराने और दम तोड़ते नारों को छोड़कर कटाक्ष और व्यांग्यत्मक तरीके से अपनी परेशानी को देश के सामने रख रही हैं.  

एक कचौड़ी दो समोसा… क्या है इसका अर्थ? 

‘एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों पर क्या भरोसा’ के नारे के जरिए लड़कियां उनके खिलाफ यौन हिंसा और अपराधों के मामलों पर सवाल खड़े कर रही हैं कि आखिर पुरुषों की जवाबदेही कब सामने आएगी. अक्सर उनके खिलाफ हुए अपराधों में समाज का रवैया केवल महिलाओं पर ही पाबंदी लगाता है, जबकि पुरुषों को कहीं जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता. इन नारों के जरिए लड़कियां उनकी सुरक्षा, छेड़छाड़ और हाल ही में हुए अपराधों पर तीखा कटाक्ष कर रही हैं. वे अपने लिए खुलकर जीने के सुरक्षित माहौल की मांग कर रही हैं. लड़कियों ने पारंपरिक तरीके से गुस्सा जाहिर करने के बदले तुकबंदी और मजेदार स्लोगन के साथ समाज की पितृसत्तात्मक सोच पर कटाक्ष किया है, ताकि सभी का ध्यान इस ओर खींचा जाए.     

क्यों हो रहा प्रदर्शन?

बता दें कि छात्राओ का यह प्रदर्शन हाल ही में साउथ दिल्ली के कालकाजी में एक 17 साल की लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म की खौफनाक घटना के बाद शुरू हुआ है. घटना के विरोध में लेडी श्रीराम, गार्गी और मिरांडा हाउस जैसे कई बड़ी यूनिवर्सिटी की लगभग 200 से ज्यादा छात्राएं सड़कों पर उतरी हैं. छात्राओं की मांग है कि उन्हें  मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, सुरक्षित पब्लिक ट्रांसपोर्ट और बेहतर स्ट्रीट लाइटिंग मिले. इसके अलावा छात्राओं प्रदर्शनों में पितृसत्तात्मक सोच का भी विरोध कर रही हैं, अपराध होने पर लड़कियों को घर या हॉस्टल के अंदर बंद कर दिया जाता है.   

Bureau Report

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