देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. टाटासंस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति से भड़ने नोएल टाटा ने अब बोर्ड से वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की है. टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड को पत्र लिखकर चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर सवाल किए हैं. नोएल ने बोर्ड से मीटिंग के मिनट्स और वीडियो रिकॉर्डिंग की माग की है.
चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति की मीटिंग का वीडियो
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नोएल ने बोर्ड से मीटिंग के मिनट्स और वीडियो रिकॉर्डिंग की डिमांड की है. इसके साथ ही कानूनी राय और उन्हें मांगने के आधार पर भी सवाल उठाए हैं. नोएल ने 30 सितंबर के एक ईमेल के जरिए सवाल किया है कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का मामला मीटिंग के एजेंडा में शामिल नहीं था. इसे “NRC की तरफ से जानकारी” वाले हिस्से में उठाया गया था.
उन्होंने पहले इस बात से इनकार किया था कि 17 सितंबर की बोर्ड मीटिंग में कोई प्रस्ताव पास हुआ था. ग्रुप की सबसे बड़ी शेयरहोल्डर, टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन को तीसरे कार्यकाल के लिए दोबारा नियुक्त करने वाले बोर्ड के प्रस्ताव को “गैर-कानूनी” और “कानूनी रूप से अमान्य” बताया है.
वोटिंग के खिलाफ नोएल
ट्रस्ट के कड़े शब्दों वाले बयान में कहा गया है कि नोएल, जो टाटा संस बोर्ड में नॉमिनी डायरेक्टर भी हैं, ने इस बैठक के दौरान दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया. टाटा संस ने एन चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के तौर पर दोबारा नियुक्त करने के अपने फैसले के समर्थन में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्ण की कानूनी राय का हवाला दिया था.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों जजों ने इस प्रस्ताव को सही तरीके से पारित माना, क्योंकि जब आर्टिकल 104(बी) के तहत नियुक्त डायरेक्टर बराबर बंटे हुए थे, तो कास्टिंग वोट ने आर्टिकल 121 की शर्तों को पूरा किया. टाटा ट्रस्ट्स का कहना था कि दोनों नॉमिनी डायरेक्टरों का दोबारा नियुक्ति का समर्थन करना जरूरी था और उसने अपने पक्ष के समर्थन में पूर्व चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की राय का हवाला दिया.
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन. खासकर नॉमिनी डायरेक्टर और चेयरमैन के ‘कास्टिंग वोट’ (निर्णायक वोट) से जुड़े नियम इस विवाद की मुख्य वजह थे. टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया, जबकि चंद्रशेखरन खुद इस प्रक्रिया से अलग रहे और स्वतंत्र निदेशक हरीश मनवानी ने चर्चा की अध्यक्षता की. यह प्रस्ताव चेयरमैन के ‘कास्टिंग वोट’ के जरिए पास किया गया.
Bureau Report
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