केंद्र सरकार ने बुधवार को कई अहम फैसले लिए। इसकी जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि गेहूं की एमएसपी ₹160 प्रति क्विंटल बढ़ाकर ₹2,585 प्रति क्विंटल कर दिया गया है। वहीं रबी सीजन 2026-27 में सरकार 297 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का अनुमान लगा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘रबी सीजन की MSP बढ़ाने से कुल 84263 करोड़ रुपए हमारे किसानों भाईयों के मेहनत के इसमें जाएंगे…रबी सीजन 2026-27 के दौरान अनुमानित खरीद 297 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है और प्रस्तावित एमएसपी पर किसानों को भुगतान की जाने वाली राशि 84,263 करोड़ रुपये है।’
कैबिनेट के फैसलों पर प्रेस को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘रबी सीजन के लिए एमएसपी बढ़ाने के फैसले से हमारे किसानों को उनकी कड़ी मेहनत का लाभ मिलेगा। सीएसीपी की सिफारिशों के आधार पर, छह प्रमुख रबी फसलों, गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड, सरसों और सूरजमुखी के लिए एमएसपी को मंजूरी दी गई है। नीति यह सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक फसल के लिए एमएसपी उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50% का मार्जिन प्रदान करे।’
दालों में आत्मनिर्भरता का मिशन
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, ‘भारत, दुनिया के सबसे बड़े दाल उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है। 2024 के भाजपा घोषणापत्र में दालों के लिए एक मिशन बनाने की बात कही गई थी और हम आत्मनिर्भरता हासिल करने और आयात में कटौती के लिए 11,440 करोड़ रुपये का मिशन शुरू कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य बेहतर बीजों के साथ उत्पादकता में सुधार, खेती को 275 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 310 लाख हेक्टेयर करना और खेती से लेकर भंडारण तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना है। इसका लक्ष्य उपज को 881 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर करना है, जिससे उत्पादन में बढ़ोतरी और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित होगी।’
काजीरंगा से होकर नया हाईवे
केंद्रीय कैबिनेट ने असम में कालीआबर-नुमालिगढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-715 के 86 किमी हिस्से को चार लेन बनाने की मंजूरी दी है। इस परियोजना की लागत ₹6,957 करोड़ होगी। इसमें काजीरंगा नेशनल पार्क के बीच से गुजरते हुए 34 किमी लंबा ऊंचा पुलनुमा (एलिवेटेड वायाडक्ट) बनाया जाएगा।
बायोमेडिकल रिसर्च कार्यक्रम को भी मंजूरी
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ‘बायोमेडिकल रिसर्च करियर प्रोग्राम’ (फेज-3) को भी हरी झंडी दी है। इस योजना पर ₹1,500 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य मेडिकल और वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना है।
उन्होंने आगे कहा कि, ‘अगर आप गौर करें, तो प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक तीसरे कार्यकाल के दौरान, स्वीकृत की गई पहली नीतियों में से एक बायो-ई3 थी, जो आईटी, सेमीकंडक्टर और एआई जैसी क्षमता वाले बायोमेडिकल, बायोसाइंस और बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्रों पर केंद्रित थी। बायोमेडिकल, बायोफिजिक्स, बायोटेक्नोलॉजी और बायोसाइंस प्रमुख विकास क्षेत्रों के रूप में उभर रहे हैं और इन्हें उच्च प्राथमिकता दी जा रही है।’
Bureau Report
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