आठवें वेतन आयोग को लेकर केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर के बीच चर्चा जोरों पर है. लाखों कर्मचारियों को वेतन आयोग के लागू होने और सैलरी बढ़कर मिलने का बेसब्री से इंतजार है. हालांकि, इस बीच आ रही मीडिया रिपोर्ट कर्मचारियों की उम्मीद पर पानी फेर सकती है. खबरों की मानें तो सरकार कर्मचारी यूनियन की तरफ से की जा रही डिमांड को पूरी तरह स्वीकार करने के पक्ष में नहीं दिख रही. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इस बार केंद्रीय कर्मचारियों को बंपर सैलरी हाइक मिलने की उम्मीद कम है. ऐसे में सरकार बीच का रास्ता चुन सकती है.
पिछले कुछ हफ्तों के दौरान केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों ने आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के सामने सैलरी बढ़ाने को लेकर कई अहम प्रस्ताव और सुझाव सौंपे हैं. इस बारे में आयोग के पैनल के साथ यूनियनों की लंबी चर्चा हुई है. यूनियन की अहम मांगों में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने के साथ ही महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक पे में शामिल करना रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब खुद कर्मचारी यूनियनों के बीच भी चर्चा है कि शायद सरकार उनकी सभी मांगों को हरी झंडी न दिखाए.
फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर 3.83 करने की मांग
इस मामले में ट्रेड यूनियन की सबसे अहम और बड़ी डिमांड फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.83 करने की है. इस मांग के पीछे यूनियन नेताओं का तर्क है कि पिछले कुछ साल में महंगाई और लिविंग कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. बढ़ती महंगाई के कारण आम कर्मचारियों की खर्च करने की क्षमता में काफी गिरावट आई है. यूनियनों का कहना है कि कर्मचारियों की आर्थिक गिरावट की भरपाई करने और उनके लाइफस्टाइल लेवल को बनाए रखने के लिए फिटमेंट फैक्टर में भारी बढ़ोतरी करना समय की सबसे बड़ी डिमांड है.
क्या है फिटमेंट फैक्टर और इसकी कैलकुलेशन?
आसान भाषा में बात करें तो फिटमेंट फैक्टर एक मल्टीप्लायर (Multiplier) है, जिसका इस्तेमाल केंद्रीय वेतन आयोग कर्मचारियों की पुरानी बेसिक सैलरी को नए और संशोधित वेतन ढांचे में बदलने के लिए करता है. इसका सीधा सा फॉर्मूला होता है. इसके जरिये नई सैलरी तय करने के लिए मौजूदा बेसिक पे को फिटमेंट फैक्टर से मल्टीप्लाय किया जाता है. इसके आधार पर नई बेसिक पे तय की जाती है. उदाहरण के लिए जब सातवां वेतन आयोग आया था, तब सरकार ने फिटमेंट फैक्टर 2.57 को लागू किया था. इसके तहत छठे वेतन आयोग की 7,000 रुपये की मिनिमम बेसिक सैलरी को 2.57 से गुणा करके 18,000 रुपये कर दिया गया था.
सरकार नहीं देना चाहती बड़ी सैलरी हाइक?
यूनियन नेताओं के हवाले से कहा गया कि सरकार इस बार फिटमेंट फैक्टर में ज्यादा बढ़ोतरी करने के मूड में नहीं है. इसका कारण यह है कि इससे देश के खजाने पर अचानक बड़ा फाइनेंशियल बोझ पड़ेगा. केंद्र सरकार के फैसले का असर राज्यों पर भी पड़ता है. अगर केंद्र की तरफ से सैलरी में भारी बढ़ोतरी की जाती है तो राज्य सरकार पर अपने कर्मचारियों की सैलरी को उसी रेश्यो में संशोधित करने का दबाव बन जाएगा. इससे न केवल मौजूदा सैलरी का खर्च बढ़ेगा, बल्कि लॉन्ग टर्म में पेंशन और रिटायरमेंट से जुड़े खर्चों में भी भारी उछाल आएगा. इसी को मैनेज करने के लिए सरकार बढ़ोतरी के बजाय एक संतुलित फॉर्मूला चुन सकती है.
करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनर्स पर असर
आठवें वेतन आयोग का गठन और इसके फैसले बेहद अहम हैं क्योंकि इनका सीधा असर देश के एक करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों पर पड़ने वाला है. इनमें केंद्रीय कर्मचारी, पेंशनर्स और उनके परिवार शामिल हैं. पिछले सालों पर नजर डालें तो देश में अब तक सात वेतन आयोग आ चुके हैं. इनमें से पहले वेतन आयोग का गठन जनवरी 1946 में हुआ था. इसके बाद आमतौर पर हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित करने की परंपरा रही है. इसी क्रम में केंद्र सरकार की तरफ से 3 नवंबर 2025 को आठवें वेतन आयोग का गठन किया गया था.
Bureau Report
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