दिल्ली में पानी की किल्लत, आने वाले सालों में और खराब हो सकते हैं हालात!

दिल्ली में पानी की किल्लत, आने वाले सालों में और खराब हो सकते हैं हालात!

दिल्ली में आने वाले साल में भूजल संकट बढ़ सकता है. CGWA और जल शक्ति मंत्रालय की तरफ से NGT में जमा रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो 2030 तक राजधानी में भूजल की स्थिति काफी खराब हो सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में यमुना बाढ़ क्षेत्र और रिज एरिया ही दो बड़े भूजल रिचार्ज जोन है. वहीं दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में भूजल का लेवल कम नीचे जा रहा है.    

इन जगहों में भारी धातुओं की मात्रा ज्यादा पाई गई
कुछ जगहों के भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड, खारापन और भारी धातुओं की मात्रा ज्यादा पाई गई है.  रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, आर्टिफिशियल रिचार्ज, भूजल दोहन को रेगुलेट करने और रिचार्ज जोन को सुरक्षित रखने की सख्त जरूरत है. रिपोर्ट के अनुसार, 2017 के बाद बढ़ी बारिश, भूजल दोहन में कमी और जमीन के नीचे की संरचना पानी को गहराई तक जाने से रोक रही है. 

इसी कारण इलाके में भूजल स्तर लगातार बढ़ रहा है. अध्ययन में 37 बड़े जलभराव वाले जगहों की पहचान की गई है. वहीं बंद पड़े 124 ट्यूबवेल में से 57 को दोबारा चालू करने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और आर्टिफिशियल रिचार्ज सिस्टम को बढ़ावा देने की भी सलाह दी गई है, ताकि जलभराव की समस्या को कम किया जा सके.

रिपोर्ट में क्या है? 
जगपुरा, आईटीओ, प्रगति मैदान और सराय काले खां जैसे इलाकों में जमीन के नीचे मौजूद चिकनी मिट्टी और सिल्ट की परतों की वजह से पानी जमीन में नहीं समा पा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, इन क्षेत्रों में भूजल स्तर काफी ऊपर आ गया है, जिसके चलते जलभराव की समस्या बढ़ रही है. विशेषज्ञों ने उथले ट्यूबवेल चालू करने, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज मजबूत करने और अतिरिक्त पानी को यमुना की ओर मोड़ने की सिफारिश की है.

स्टडी में भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइट के आसपास भूजल प्रदूषण की गंभीर स्थिति भी सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, लैंडफिल से निकलने वाला दूषित पानी जमीन के अंदर पहुंच रहा है, जिससे भूजल में नाइट्रेट, फ्लोराइड, क्लोराइड और भारी धातुओं का स्तर बढ़ गया है. विशेषज्ञों ने इस समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक तरीके से लैंडफिल प्रबंधन जरूरी बताया है.

वहीं दिल्ली जल बोर्ड ने पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए हरियाणा से 125 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मांगा है. हालांकि हरियाणा की ओर से फिलहाल 56 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है. अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा जल आपूर्ति दिल्ली की जरूरतों के मुकाबले कम पड़ रही है और कई इलाकों में पानी संकट बना हुआ है.

Bureau Report

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