महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भूचाल आ गया है. शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने जा रहे हैं. इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पहले ही अपना पत्र सौंप दिया है, जिसके बाद अब यह क्रॉसओवर महज एक औपचारिकता रह गया है. माना जा रहा है कि अगले हफ्ते यह दलबदल पूरी तरह मुकम्मल हो जाएगा.
इस बड़े राजनीतिक उलटफेर के बाद देश की संसद में एकनाथ शिंदे की शिवसेना के सांसदों की संख्या 7 से बढ़कर सीधे 13 हो जाएगी. सीटों के इस नए गणित के साथ ही शिंदे की शिवसेना अब महाराष्ट्र में लोकसभा सीटों के मामले में कांग्रेस (13 सीटें) के बराबर आ खड़ी हुई है.
दिल्ली में बढ़ेगा शिंदे का कद
इस घटना का सबसे बड़ा झटका भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लगा है. महाराष्ट्र में खुद को बड़े भाई की भूमिका में देखने वाली बीजेपी अब 9 लोकसभा सीटों के साथ राज्य में तीसरे नंबर पर खिसक जाएगी. हालांकि, सूत्रों का दावा है कि उद्धव गुट में लगी इस सेंधमारी यानी ‘ऑपरेशन टाइगर’ को खुद बीजेपी हाईकमान और गृह मंत्री अमित शाह की हरी झंडी मिली हुई थी. केंद्र सरकार को मानसून सत्र के दौरान महिला आरक्षण पैकेज के तहत परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की दरकार थी, जिसे पूरा करने के लिए यह रणनीति रची गई. हाल ही में अमित शाह ने शिंदे का हौसला बढ़ाते हुए कहा भी था कि अब कोई गुट नहीं, बल्कि सिर्फ एक ही असली शिवसेना बची है.
इस नई ताकत के दम पर अब दिल्ली के सियासी गलियारों में एकनाथ शिंदे की मोलभाव करने की शक्ति जबरदस्त तरीके से बढ़ गई है. वर्तमान में मोदी कैबिनेट में शिंदे गुट के पास सिर्फ एक स्वतंत्र प्रभार का मंत्रालय (प्रतापराव जाधव – आयुष मंत्री) है. लेकिन अब 13 सांसदों के साथ शिंदे केंद्रीय कैबिनेट में टीडीपी (16 सांसद) और जदयू (12 सांसद) की तर्ज पर कम से कम एक कैबिनेट और एक राज्य मंत्री पद की मांग कर सकते हैं.
उद्धव गुट में पुत्रमोह पर नाराजगी
एकनाथ शिंदे की नजरें सिर्फ केंद्र पर ही नहीं, बल्कि 2029 के विधानसभा और लोकसभा चुनावों पर भी टिकी हैं. उनके बेटे और सांसद श्रीकांत शिंदे अभी से राज्य की 160 विधानसभा सीटों का तूफानी दौरा कर रहे हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत अन्य स्थानीय निकायों में भी उद्धव गुट के पार्षदों को तोड़ने की बड़ी तैयारी है. दिलचस्प बात ये है कि शिवसेना (UBT) के जो 6 सांसद बगावत कर रहे हैं, वे उद्धव ठाकरे द्वारा बेटे आदित्य ठाकरे को जरूरत से ज्यादा प्रमोट किए जाने से नाराज चल रहे थे.
महायुति के भीतर नया सीट शेयरिंग विवाद
1. 2024 का गणित: पिछले चुनाव में बीजेपी ने 28 सीटों पर लड़कर सिर्फ 9 जीती थीं (स्ट्राइक रेट 32%), जबकि शिंदे गुट ने 15 में से 7 सीटें जीती थीं (स्ट्राइक रेट 46.66%)
2. 2029 की चुनौती: शामिल हो रहे 6 सांसदों में से 3 (हिंगोली, यवतमाल-वाशिम और शिरडी) ने 2024 में शिंदे गुट के ही उम्मीदवारों को हराया था, जबकि अन्य ने बीजेपी और एनसीपी को मात दी थी.
ये सभी सांसद इस शर्त पर आ रहे हैं कि 2029 में इन्हें दोबारा टिकट मिलेगा, जिसके लिए बीजेपी भी सहमत हो गई है. ऐसे में आगामी चुनावों में शिंदे गुट कम से कम 25 लोकसभा सीटों पर अपना दावा ठोकेगा, जो बीजेपी के लिए बड़ी सिरदर्दी बन सकता है. हालांकि, कुछ नेताओं का मानना है कि तब तक परिसीमन के बाद सीटें बढ़ जाएंगी, जिससे दोनों दलों को एडजस्ट करना आसान होगा. बहरहाल, शिंदे की इस छलांग ने महाराष्ट्र महायुति गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन को पूरी तरह बदल दिया है.
Bureau Report
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