दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के वाइस चांसलर के रूप में फिर से चुने गए प्रो. योगेश सिंह ने इतिहास रच दिया है. इस पद को लगातार दूसरी बार संभालने वाले पहले व्यक्ति हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी में कुलपति के रूप में उनका नया कार्यकाल तत्काल प्रभाव से लागू होगा. ये नियुक्ति राष्ट्रपति की ओर से केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई है. प्रो. योगेश सिंह का पहला कार्यकाल कई अहम शैक्षणिक सुधारों, नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन और विश्वविद्यालय में डिजिटल और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है.
उम्मीद की जा रही है कि दूसरी बार वाइस चांसलर बनने के बाद योगेश सिंह अपनी जिम्मेदारियों को पहले से और भी अच्छे तरीके से निभाएंगे. एक बार फिर दिल्ली विश्वविद्यालय की कमान उनके हाथों में होगी. आइए जानते हैं कि डीयू के वीसी प्रो. योगेश सिंह कौन हैं और उन्हें क्या पढ़ाई-लिखाई कर रखी है?
कौन हैं प्रो. योगेश सिंह?
देश के जाने-माने शिक्षाविद और प्रशासक के रूप में प्रो. योगेश सिंह को जाना जाता है. वो कंप्यूटर विज्ञान और उच्च शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में लंबा अनुभव रखते हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय का कुलपति बनने से पहले वे कई प्रमुख विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं.
कितने पढ़ें-लिखे हैं प्रो. योगेश सिंह?
प्रो. योगेश सिंह ने अपनी स्कूली शिक्षा उत्तर प्रदेश से पूरी की है. उसके बाद कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कंप्यूटर विज्ञान विषय में पीएचडी की डिग्री हासिल की. उनका शोध कार्य मुख्य रूप से सूचना प्रौद्योगिकी, कंप्यूटर नेटवर्क और उच्च शिक्षा से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा है.
प्रो. योगेश सिंह का करियर
बात करें प्रो. योगेश सिंह के प्रशासनिक करियर की तो वो दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से पहले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) हमीरपुर के निदेशक रहे हैं. इसके बाद उन्होंने महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय, वडोदरा (The Maharaja Sayajirao University of Baroda) में कुलपति के रूप में कार्य किया. जुलाई 2021 में उन्हें पहली बार दिल्ली विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर नियुक्त किया गया था. अब उन्हें लगातार दूसरी बार दिल्ली विश्वविद्यालय का वाइस चांसलर के रूप में नियुक्त किया गया है.
पहले कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां
- प्रो. योगेश सिंह के पहले कार्यकाल में नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) लागू किया गया.
- अंडरग्रेजुएट कोर्सों में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए.
- विश्वविद्यालय में डिजिटल शिक्षा और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार किया गया.
- शोध और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए कई नई पहल शुरू की गईं.
- उद्योग और यूनिवर्सिटी के बीच सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया.
Bureau Report
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