रात 12 बजते ही बंद हो जाएगा सोशल मीडिया! अब यह देश बनाने जा रहा कानून, बच्चों के फोन में लगेगा ‘डिजिटल कर्फ्यू’!

रात 12 बजते ही बंद हो जाएगा सोशल मीडिया! अब यह देश बनाने जा रहा कानून, बच्चों के फोन में लगेगा 'डिजिटल कर्फ्यू'!

बच्चों को सोशल मीडिया की इस खतरनाक लत से बचाने के लिए दुनिया भर के कई देशों ने कमर कस ली है! एक ओर जहां ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है तो वहीं इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों ने भी इस साल नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया को पूरी तरह ब्लॉक करने वाले कड़े कानून पेश किए हैं. अब इसी बीच यूरोपीय यूनियन भी अब 13 से 15 साल के बच्चों पर कुछ अलग तरह की पाबंदियां लगाने की तैयारी कर रहा है.

स्मार्टफोन पर देर रात तक बिना वजह रील्स और वीडियो स्क्रॉल करने यानी डूमस्क्रॉलिंग की आदत से बच्चों को बचाने के लिए ब्रिटेन ने नई तैयारी कर ली है. ब्रिटिश सरकार ने 16 और 17 साल के लोगों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर रात का एक डिफॉल्ट कर्फ्यू लगाने की योजना बनाई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कदम का मकसद किशोरों की नींद सर्किल सही करना, स्कूल-कॉलेज में उनकी एकाग्रता बढ़ाना और उन्हें रात भर स्क्रीन से दूर रखना है.

रात 12 से सुबह 6 बजे तक रहेगा बंद

ब्रिटेन के नए नियमों के अनुसार, 16 और 17 साल के यूजर्स के लिए रात 12 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक सोशल मीडिया ऐप्स का एक्सेस अपने आप ब्लॉक हो जाएगा. हालांकि, यूजर्स के पास इस डिफॉल्ट सेटिंग को बदलने का ऑप्शन होगा. साथ ही, सोशल मीडिया कंपनियों को ऑटोप्ले वीडियो जैसे फीचर्स को भी डिफॉल्ट रूप से बंद करना होगा, जो युवाओं को लगातार वीडियो देखने के लिए मजबूर करते हैं.

ब्रिटेन के टेक्नोलॉजी मिनिस्टर लिज केंडल के मुताबिक ये उपाय युवाओं को पर्याप्त नींद लेने, अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और परिवार और दोस्तों के साथ क्वालिटी टाइम बिताने में बेहद मददगार साबित होंगे.

2027 से लागू हो सकते हैं नियम

सरकार का मानना है कि इस कदम से 16 साल के होते ही अचानक मिलने वाली ऑनलाइन आजादी के नुकसान से बच्चों को बचाया जा सकेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल के आखिरी तक इन नियमों को संसद में पेश किया जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद इसे बसंत 2027 से लागू कर दिया जाएगा. इससे पहले ब्रिटेन में किशोरों पर एक ट्रायल किया गया था, जिसमें सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने के बाद उनके फोकस, नींद और मानसिक स्वास्थ्य में काफी सुधार देखा गया था.

सही उम्र को लेकर कंपनियों पर प्रेशर

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के उदाहरण से पता चलता है कि सोशल मीडिया पर ऐसी पाबंदियों को लागू करना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि कंपनियां यूजर्स की सही उम्र का पता लगाने में संघर्ष कर रही हैं. दूसरी तरफ, अमेरिका में भी गूगल और टिकटॉक जैसी बड़ी कंपनियों पर युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने के आरोप में कानूनी मामले चल रहे हैं.

Bureau Report

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