भारतीय रेलवे के एसी कोच (AC) से कंबल, तौलिये और चादर चोरी होने की घटनाएं पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी हैं. रेलवे को लगातार हो रहे नुकसान पर अब मंत्रालय ने बेहद सख्त रुख अपना लिया है. पिछले चार साल में करोड़ों बेडरोल चोरी होने की मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पर गहरी चिंता जताई है. रेलवे मिनिस्ट्री ने अधिकारियों को इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए तुरंत व्यापक और प्रभावी सुधार योजना तैयार करने का निर्देश दिया है. अब रेलवे के कदम से एसी कोच में सफर करने के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले यात्रियों पर नकेल कसी जा सकेगी.
एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान रेल मंत्री रेलवे की ’52 हफ्तों में 52 सुधार’ पहल से जुड़ी जानकारी दे रहे थे. उन्होंने चोरी से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का खासतौर पर हवाला दिया. अश्विनी वैष्णव ने मंच पर मौजूद शीर्ष रेलवे अधिकारियों से सवाल किया कि चोरी को रोकने के लिए कब तक ठोस कदम उठाए जाएंगे. इस पर अधिकारियों ने रेल मंत्री से दो महीने का समय मांगा है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया गया कि अगले दो महीने में इस समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने की पुख्ता कानूनी और व्यावहारिक रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी.
RFID लगाने की भी तैयारी
कुछ दिन पहले खबर आई थी कि रेलवे बोर्ड अपने बेडरोल (लिनन) मैनेजमेंट को पूरी तरह हाईटेक बनाने की तैयारी कर रहा है. खबर के अपडेट के अनुसार रेलवे बेडरोल से जुड़े सामान में बेहद बारीक RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) चिप लगाने की तैयारी कर रहा है. इससे रेलवे की चादर, तौलिये और कंबल आदि की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाएगी. कंबल और चादर में RFID लगाने के साथ ही ट्रेन के एग्जिट गेट्स (निकास द्वार) पर दिखाई नहीं देने वाले सेंसर भी फिट किये जाएंगे.
चार साल में सवा करोड़ बेडरोल चोरी
आपको बता दें कोविड के बाद जब जनवरी 2022 में ट्रेन के एसी कोच में बेडरोल सर्विस को पूरी तरह दोबारा बहाल किया गया था, तब से लेकर मई 2026 के बीच एक हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है. इस दौरान करीब 1.27 करोड़ बेडरोल चोरी हो गए. सूचना का अधिकार (RTI) के तहत 16 रेलवे जोन के 54 डिवीजन से मिले आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2025 के बीच इन चोरियों में 56 फीसदी का भारी उछाल आया है. इस चोरी के कारण बेडरोल का ठेका लेने वाले ठेकेदारों को 104.51 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.
चोर को सीधे गिरफ्तार करने का मिलेगा अधिकार!
इस तरह की समस्या से निपटने के लिए रेलवे कई बड़े और कड़े विकल्प पर विचार कर रहा है. वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को ऐसे चोरों को सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार देने पर विचार किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि चलती ट्रेन से उतरने वाले संदिग्ध यात्रियों को ट्रैक करना मुश्किल होता है, इसलिए ऐसे कड़े कदम उठाना जरूरी हो गया है. नए नियमों के तहत, यदि कोई यात्री उतरने से पहले बेडरोल वापस नहीं करता है, तो आरपीएफ को उस यात्री के सामान की तलाशी लेने की छूट दी जा सकती है.
30 मिनट पहले बेडरोल सौंपने की सलाह
आपको बता दें कि रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत ट्रेन के तौलिए या चादर चुराना पहले से ही गैर-जमानती अपराध की कैटेगरी में आता है. साल 2015 में भी रेलवे बोर्ड ने गाइडलाइन जारी कर यात्रियों को ट्रेन से उतरने से कम से कम 30 मिनट पहले अपना बेडरोल स्टाफ को सौंपने की सलाह दी थी. फिलहाल, इस चोरी को रोकने के लिए रेलवे डिवीजन में तैनात बेडरोल अटेंडेंट को ज्यादा सतर्क रहने, सामान की त्वरित वसूली करने और ड्यूटी के दौरान पैनी नजर रखने के लिए लगातार काउंसिलिंग दी जा रही है.
Bureau Report
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