बांग्लादेश में भगवान जगन्नाथ की ‘रथयात्रा’ (वापसी उत्सव) के पावन अवसर पर एक बेहद खौफनाक और हैरान कर देने वाली साजिश का खुलासा हुआ है. राजधानी ढाका के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक, मोतीझील मेट्रो रेल स्टेशन के पास एक छाते के भीतर छिपाकर रखा गया इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बरामद किया गया है. समय रहते इस जानलेवा बम का पता चलने से एक बड़ा नरसंहार और त्रासदी टल गई, लेकिन इस घटना ने बांग्लादेश में लगातार प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक, जब बम डिस्पोजल स्क्वॉड ने संदिग्ध छाते की जांच की, तो अंदर का नजारा देखकर उनके भी होश उड़ गए. छाते के अंदर एक मेटल पाइप में लगभग 1 से 1.5 किलोग्राम सल्फर और बारूद भरा हुआ था. धमाके के वक्त ज्यादा से ज्यादा लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए इसमें लोहे की सैकड़ों छोटी गेंदें (छर्रे) मिलाई गई थीं. इसमें एक बैटरी और इलेक्ट्रिकल सर्किट फिट किया गया था, जिसे दूर बैठकर महज एक बटन दबाकर ब्लास्ट किया जा सकता था. हालांकि, इस घातक बम को जब डिस्पोज किया जा रहा था, उस दौरान हुए एक छोटे धमाके के छर्रे लगने से 33 वर्षीय एक राहगीर घायल हो गया.
जांच एजेंसियों के सामने खड़े हुए 3 बड़े सवाल
घटना के बाद बांग्लादेशी सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. हालांकि, अभी तक आधिकारिक तौर पर इस साजिश के पीछे के मुख्य मास्टरमाइंड का पता नहीं चल पाया है. पुलिस की जांच मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित है:
1. रथयात्रा को निशाना बनाने की साजिश: क्या यह आईईडी विशेष रूप से हिंदू श्रद्धालुओं की भीड़ को निशाना बनाने के लिए ही रखा गया था?
2. सुरक्षा में चूक: इतने कड़े सुरक्षा घेरे और धार्मिक जुलूस के बीच कोई शख्स इतना खतरनाक आईईडी लेकर कैसे पहुंच गया?
3. बड़ा नेटवर्क: क्या इस साजिश के तार किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय या स्थानीय कट्टरपंथी आतंकी संगठन से जुड़े हैं?
2026 में लगातार निशाना बन रहे बांग्लादेशी हिंदू
ये घटना कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ रहे अत्याचारों की एक और खौफनाक कड़ी का हिस्सा है. बता दें कि 17 फरवरी (बीएनपी सरकार के गठन) से 30 अप्रैल के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ 111 अत्याचार की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 24 हत्याएं और जमीन कब्जे के 16 मामले शामिल हैं. वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में ही 133 सांप्रदायिक घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 25 मासूमों की जान चली गई. हत्या, मंदिरों में तोड़फोड़, जबरन जमीन हड़पने और डराने-धमकाने के इस सिलसिले के बीच रथयात्रा में मिले इस बम ने बांग्लादेशी हिंदुओं के मन में खौफ और गहरा कर दिया है. धार्मिक स्वतंत्रता और जीवन की रक्षा के लिए अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी हस्तक्षेप की मांग उठने लगी है.
Bureau Report
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