NCERT को मिला डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा, अब PhD और नए अकादमिक प्रोग्राम शुरू करने का रास्ता साफ

NCERT को मिला डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा, अब PhD और नए अकादमिक प्रोग्राम शुरू करने का रास्ता साफ

शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ यानी डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है. मंत्रालय के अनुसार, NCERT की ओर से इसके लिए आवेदन किया गया था, जिसकी जांच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की विशेषज्ञ समिति ने की. 

समिति ने यूजीसी (इंस्टीट्यूशन्स डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटीज) रेगुलेशन, 2023 के तहत आवेदन का परीक्षण करने के बाद एनसीईआरटी को यह दर्जा देने की सिफारिश की थी.

दर्जा देने का फैसला कब हुआ?

यूजीसी की सलाह के आधार पर शिक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च को जारी अधिसूचना के माध्यम से नई दिल्ली स्थित NCERT को यूजीसी एक्ट, 1956 की धारा 3 के तहत ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ घोषित किया. हालांकि, ये दर्जा कुछ शर्तों के साथ दिया गया है. मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एनसीईआरटी को रिसर्च प्रोग्राम, डॉक्टोरल प्रोग्राम और नए तरह के इनोवेटिव अकादमिक प्रोग्राम शुरू करने की दिशा में कदम उठाने होंगे.

एनसीईआरटी की भूमिका में क्या बदलाव आएगा?

डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी की भूमिका केवल स्कूली शिक्षा से जुड़े पाठ्यक्रम, किताबों और शैक्षणिक संसाधनों तक सीमित नहीं रहेगी. संस्था अब उच्च शिक्षा और अकादमिक रिसर्च के क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार कर सकेगी. इसके तहत डॉक्टोरल स्तर के कार्यक्रम और नए अकादमिक कोर्स विकसित करने की संभावना बढ़ेगी. इससे शिक्षा के क्षेत्र में शोध और नवाचार को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.

रिसर्च के क्षेत्र में क्या फायदा होगा?

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा एनसीईआरटी की शैक्षणिक रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करेगा. इससे संस्था राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ सहयोग कर सकेगी. एनसीईआरटी को शिक्षा क्षेत्र में एक थिंक टैंक और राष्ट्रीय संसाधन संस्थान के रूप में भी अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर मिलेगा. इसके जरिए केंद्र और राज्य सरकारों को तकनीकी और शैक्षणिक सहायता देने की उसकी क्षमता को और विस्तार मिल सकता है.

एनसीईआरटी के कितने संस्थान इसके दायरे में आएंगे?

यह घोषणा केवल नई दिल्ली स्थित NCERT तक सीमित नहीं है. इसके तहत NCERT की छह घटक इकाइयां भी शामिल हैं. इनमें अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर और शिलांग स्थित Regional Institutes of Education (RIEs) शामिल हैं. इसके अलावा भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (पीएसएससीआईवीई) भी इस व्यवस्था का हिस्सा होगा. इस तरह नई व्यवस्था का असर NCERT के व्यापक संस्थागत ढांचे पर पड़ेगा.

डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा पाने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई?

एनसीईआरटी ने डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा हासिल करने के लिए यूजीसी पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया था. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अगस्त 2023 में एनसीईआरटी को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था. इसके बाद एनसीईआरटी ने पिछले साल नवंबर में अनुपालन रिपोर्ट यानी compliance report जमा की. यूजीसी की विशेषज्ञ समिति ने इस रिपोर्ट की जांच की और इसे स्वीकार किया. इसके बाद प्रस्ताव को यूजीसी आयोग की 30 जनवरी 2026 को हुई 595वीं बैठक में मंजूरी दी गई.

नए कोर्स के लिए कौन से नियम लागू होंगे?

डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद एनसीईआरटी को पूरी तरह स्वतंत्र तरीके से कोई भी अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की छूट नहीं होगी. अधिसूचना के अनुसार, NCERT के अकादमिक प्रोग्राम को UGC के नियमों और मानकों के अनुरूप होना होगा. नए कोर्स और ऑफ-कैंपस सेंटर शुरू करने के लिए भी संबंधित UGC दिशानिर्देशों का पालन करना होगा. इसके अलावा संस्था को व्यावसायिक या मुनाफा कमाने वाली गतिविधियों से दूर रहना होगा.

NIRF और NAAC से जुड़ी क्या जिम्मेदारी होगी?

नई व्यवस्था के तहत NCERT को उच्च शिक्षा संस्थानों की तरह कई प्रक्रियाओं का पालन करना होगा. संस्था को हर साल National Institutional Ranking Framework (NIRF) की रैंकिंग प्रक्रिया में भाग लेना होगा. इसके साथ ही उसे National Assessment and Accreditation Council (NAAC) और National Board of Accreditation (NBA) जैसे मान्यता देने वाले संस्थानों से accreditation लेने की दिशा में भी कदम उठाने होंगे.

छात्रों के क्रेडिट रिकॉर्ड का क्या होगा?

एनसीईआरटी को अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) स्थापित करना होगा. इसके साथ ही छात्रों के क्रेडिट रिकॉर्ड को डिजिटल लॉकर में अपलोड करना होगा, जैसा कि मान्यता प्राप्त उच्च शिक्षा संस्थानों में किया जाता है. इससे अकादमिक क्रेडिट को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखने और उच्च शिक्षा की मौजूदा व्यवस्था के साथ एनसीईआरटी को जोड़ने में मदद मिलेगी.

क्या इस फैसले पर पहले सवाल उठे थे?

एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने की प्रक्रिया के दौरान संस्था के भीतर इसके प्रभावों को लेकर चिंताएं भी सामने आई थीं. पहले की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2022 में एनसीईआरटी के एक असिस्टेंट प्रोफेसर ने तत्कालीन एनसीईआरटी निदेशक को इस बदलाव के संभावित प्रभावों को लेकर आगाह किया था. चिंता यह थी कि डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलने के बाद संस्था की अकादमिक स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है और UGC के नियमों पर निर्भरता बढ़ सकती है.

राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बनाने का प्रस्ताव क्यों नहीं आया?

सरकार ने पहले एनसीईआरटी को ‘Institution of National Importance’ का दर्जा देने पर भी विचार किया था. हालांकि, बाद में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा और सरकार ने डीम्ड यूनिवर्सिटी का रास्ता अपनाया. इस बदलाव से NCERT को एक ओर उच्च शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में विस्तार का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उसे UGC से जुड़े अकादमिक और संस्थागत मानकों का पालन भी करना होगा.

छात्रों और शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

NCERT का नया दर्जा भारतीय शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बदलाव माना जा सकता है. अब संस्था स्कूल शिक्षा में अपनी पारंपरिक भूमिका के साथ-साथ उच्चस्तरीय शोध, PhD, अकादमिक कार्यक्रम और नवाचार पर भी अधिक ध्यान दे सकती है. हालांकि, इस बदलाव का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि NCERT नए शोध कार्यक्रम और पाठ्यक्रम किस तरह विकसित करता है और उन्हें UGC के निर्धारित मानकों के अनुरूप कैसे लागू करता है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी यह अपडेट महत्वपूर्ण है, क्योंकि NCERT, UGC, डीम्ड यूनिवर्सिटी और शिक्षा नीति से जुड़े प्रश्न UPSC, UGC NET, शिक्षक भर्ती और अन्य परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं.

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*