टाटा ग्रुप और RBI आमने-सामने! IPO से बचने की आखिरी उम्मीद भी टूटी? बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंची जंग

टाटा ग्रुप और RBI आमने-सामने! IPO से बचने की आखिरी उम्मीद भी टूटी? बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंची जंग

देश के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons) की लिस्टिंग को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से बड़ा कदम उठाया गया है. ईटी में प्रकाशित खबर के अनुसार आरबीआई (RBI) ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक कैविएट (Caveat) याचिका दाखिल की है. इस याचिका का सीधा सा मतलब यह है यदि टाटा संस या कोई दूसरा पक्ष आरबीआई (RBI) के फैसले के खिलाफ अदालत पहुंचता है या स्टे लेने की कोशिश करता है तो अदालत बिना आरबीआई का पक्ष सुने किसी तरह का अंतरिम आदेश जारी नहीं करेगा. रिजर्व बैंक (RBI) ने इस कानूनी कदम को लेकर टाटा संस को जानकारी दे दी है.

क्यों खड़ा हुआ यह बड़ा विवाद?

यह पूरा मामला टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर है. यह विवाद तब बना, जब आरबीआई (RBI) की तरफ से टाटा संस के उस आवेदन को खारिज कर दिया जिसमें कंपनी ने अपना कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सरेंडर करने को लेकर अनुमति मांगी थी. टाटा संस की प्लानिंग एक अनरजिस्टर्ड सीआईसी (CIC) बनना चाहती थी. कंपनी की तरफ से यह कोशिश इसलिए की जा रही है कि टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग नहीं होना पड़े. लेकिन आरबीआई की तरफ से 11 सितंबर के आदेश में साफ कहा गया कि टाटा संस ‘NBFC-अपर लेयर’ संस्था है और उसे इन नियमों का पालन पूरी तरह करना होगा. इस फैसले के बाद टाटा संस के लिए पब्लिकली लिस्ट होना यानी अपना आईपीओ (IPO) लाना जरूरी हो गया है.

नोएल टाटा और बोर्ड के पास क्या ऑप्शन?

आरबीआई के रुख से टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा और उनके सहयोगी हैरान हैं. रिपोर्ट के अनुसार नोएल टाटा इस फैसले को चुनौती देने के लिए अलग-अलग कानूनी रास्तों की तलाश कर रहे हैं. उनकी चिंता इस बात को लेकर है यदि टाटा संस लिस्ट होती है तो कंपनी पर रेगुलेटरी निगरानी काफी बढ़ जाएगी और निवेशकों की नजर अंदरूनी सौदों पर रहेगी. इससे टाटा ट्रस्ट के कंट्रोल और लीडरशिप मॉडल में बदलाव आ सकता है. बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि लिस्टिंग से ग्रुप में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी.

बोर्ड मीटिंग में हो सकता है बड़ा फैसला

टाटा संस की आगामी बोर्ड मीटिंग में इस मामले पर गहन चर्चा होने की संभावना है. रिपोर्ट के अनुसार ट्रस्टियों के बीच लिस्टिंग को लेकर राय बंटी हुई है. एक तरफ नोएल टाटा की मंशा कंपनी को प्राइवेट रखने की है, दूसरी तरफ बोर्ड के दूसरे सीनियर मेंबर लिस्टिंग के सपोर्ट में हैं. इसके अलावा कंपनी में स्थिरता बनाए रखने के लिए पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के कार्यकाल को बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है. यह देखने वाली बात होगी कि आने वाले दिनों में टाटा ग्रुप की तरफ से क्या कदम उठाया जाता है?

RBI ने टाटा संस को अपर लेयर NBFC क्यों माना?

टाटा संस का असल काम टाटा ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों में निवेश और होल्डिंग से जुड़ा है. इस तरह की कंपनियों का कैटेगराइजेशन कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में किया जाता है. सीआईसी (CIC) का काम ग्रुप की कंपनियों में निवेश कना और उनकी हिस्सेदारी बैन करने से जुड़ा होता है. लेकिन यदि ऐसी कंपनी फाइनेंशियल एक्टिविटी, निवेश और ग्रुप के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर में अहम भूमिका निभाती है तो सवाल उठ सकते हैं. आरबीआई के अनुसार किसी भी कंपनी की निगरानी इस आधार पर होनी चाहिए कि वह खुद कितना लोन देती है. इसके अलावा यह भी नोटिस किया जाना चाहिए कि पूरे ग्रुप के फाइनेंशियल स्ट्रक्चर में उसकी कितनी अहम भूमिका है.

Bureau Report

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