Jailer 2 Review: रजनीकांत का स्वैग, ऋतिक और मोहनलाल का दमदार कैमियो, सीटी बजाने पर मजबूर करता है हर सीन

Jailer 2 Review: रजनीकांत का स्वैग, ऋतिक और मोहनलाल का दमदार कैमियो, सीटी बजाने पर मजबूर करता है हर सीन

‘बॉर्डर 2’ से लेकर ‘दृश्यम 3’ तक, इस साल बॉलीवुड में कई फिल्मों के सीक्वल रिलीज हुए। कुछ फ्लॉप हुए तो कुछ हिट रहे। कुछ ने अच्छा बिजनेस तो किया पर फिल्म में उतना दम नहीं रहा। पर अब रिलीज हुई है साउथ की एक सीक्वल। नाम है ‘जेलर 2’… 

इस फिल्म के जरिए रजनीकांत एक बार फिर टाइगर मुथुवेल पांडियन बनकर पर्दे पर लौटे हैं। फिल्म में मोहनलाल और शिव राजकुमार जैसे सितारों की मौजूदगी है। बॉलीवुड से ऋतिक रोशन, विद्या बालन, मिथुन चक्रवर्ती, जैकी श्रॅाफ जैसे चेहरे हैं। 

नेल्सन दिलीपकुमार का डार्क ह्यूमर वाला निर्देशन है और सबसे ऊपर अनिरुद्ध रविचंदर का दमदार बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म है।  सब मिलकर इस फिल्म के जरिए आपको ऐसा अनुभव देते हैं कि आप हर 10 मिनट में सीटी बजाने और तालियां पीटने पर मजबूर हो जाते हैं। 

अब ‘जेलर 2’ में ऐसा क्या खास है, जो दर्शकों को सीटियां बजाने और तालियां पीटने पर मजबूर कर रही? पढ़िए इस फिल्म रिव्यू में।

कहानी: वर्मन की मौत के बाद शुरू होती है नई जंग 

साल 2023 में रिलीज हुई ‘जेलर’ की कहानी जहां खत्म हुई थी, वहीं से ‘जेलर 2’ आगे बढ़ती है। फिल्म के केंद्र में एक बार फिर मुथुवेल पांडियन है, जो पहले भाग में वर्मन (विनायकन) की मौत के बाद की घटनाओं से जूझ रहा है। वर्मन की हत्या के पीछे की सच्चाई और उससे जुड़े लोगों की तलाश कहानी को आगे बढ़ाती है।

एक पुलिस अधिकारी बेटे को खोने का मानसिक आघात अब भी मुथुवेल और उसके परिवार को परेशान करता है। इस बार उसका सामना ऐसे गिरोह से होता है, जिसका नेटवर्क वर्मन से भी बड़ा है। कहानी में नए किरदारों की एंट्री के साथ संघर्ष का दायरा बढ़ता जाता है।

निर्देशक नेल्सन दिलीपकुमार कहानी को सीधे बड़े एक्शन दृश्यों की ओर ले जाने के बजाय छोटे-छोटे घटनाक्रमों और हास्य से आगे बढ़ाते हैं। फिल्म का पहला हिस्सा डार्क कॉमेडी के सहारे किरदारों और घटनाओं को स्थापित करता है। धीरे-धीरे कहानी मुख्य संघर्ष की ओर बढ़ती है और मुथुवेल पांडियन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो जाती है।

अभिनय: रजनीकांत का जलवा बरकरार 

रजनीकांत को पर्दे पर कई अलग-अलग अंदाज में पेश किया गया है, लेकिन टाइगर मुथुवेल पांडियन के किरदार में उनका स्वैग खास है। ‘जेलर 2’ में भी उनका अंदाज दर्शकों को आकर्षित करता है। निर्देशक नेल्सन की खासियत यह है कि वह पहले से लोकप्रिय हो चुके किरदार को दोबारा पर्दे पर लाते हुए उसकी धार कम नहीं होने देते। यहां भी वही हुआ है। कोहनी मारकर गुंडे से उसका हथियार छीन लेना, सबको एक जगह इकट्ठा करके बम से उड़ा देना, पुलिस स्टेशन की दीवार तोड़कर निकल जाना। यह सब रजनीकांत का स्टाइल है, जो असल में नहीं होता पर उनके अभिनय से आप यह मानने पर मजबूर हो जाते हैं कि ऐसा हो सकता है।

मुथुवेल पांडियन की शख्सियत में मौजूद ठहराव, चेहरे के भाव, संवाद अदायगी और एक्शन के दौरान उनका आत्मविश्वास फिल्म को खास बनाते हैं। रजनीकांत के प्रशंसकों को उनके किरदार से जिस तरह के दमदार पलों की उम्मीद है, फिल्म उन्हें उसी दिशा में संतुष्ट करने की कोशिश करती है।

विजय कार्तिक कन्नन की सिनेमैटोग्राफी और अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक रजनीकांत के अभिनय में चार चांद लगा देते है। खासकर बड़े पर्दे पर देखे जाने वाले दृश्यों में संगीत और कैमरे का तालमेल फिल्म के मास अपील वाले अंदाज को मजबूती देता है। जब रजनी स्वैग देते हैं और पीछे बीजीएम में ‘हुकुम.. टाइगर का हुकुम’ सुनाई देता है तो आपके हाथ अपने आप ही तालियां पीटने लगते हैं। 

सूरज और सूर्या ने जमकर डराया: फिल्म में इस बार नए कलाकारों और खलनायकों की मौजूदगी कहानी को नया रंग देती है। सूरज वेंजारामूडु और एसजे सूर्या मुख्य विलन के रूप में सामने आते हैं। सूरज का लुक उनके पहले के किरदारों से अलग नजर आता है और उनकी भूमिका उन्हें एक नए अंदाज में पेश करती है। एसजे सूर्या भी अपने किरदार के जरिए कहानी के टकराव को मजबूती देते हैं।

विद्या ने दी रजनी को टक्कर: मिथुन चक्रवर्ती और विद्या बालन की मौजूदगी भी फिल्म को खास बनाती है। रजनीकांत के साथ वाले एक सीन में विद्या ने जो काम किया है। यकीन मानिए रजनी के स्वैग के आगे उन्होंने जो स्वैग दिखाया है, वह कर पाना बड़े-बड़े कलाकारों के बस का नहीं। जाफर सादिक, योगी बाबू, राम्या कृष्णन, मिर्ना मेनन और अन्ना रेशमा समेत बाकी कलाकार फिल्म की दुनिया को विस्तार देते हैं।

ऋतिक-मोहनलाल समेत बाकी कलाकारों ने भी भरा जोश: ‘जेलर’ के पहले भाग में मोहनलाल, शिवराजकुमार और जैकी श्रॉफ की मौजूदगी ने दर्शकों को खासा उत्साहित किया था। सीक्वल में भी यह सिलसिला जारी रहता है। खास तौर पर मोहनलाल और शिवराजकुमार की एंट्री वाले दृश्य आकर्षण का केंद्र बनते हैं। मैथ्यूज (मोहनलाल) और नरसिम्हा (शिवराजकुमार) के किरदार में दोनों अभिनेता अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से प्रभावित करते हैं।

इसके अलावा फिल्म में सबसे ज्यादा सीटियां लूटीं ऋतिक रोशन (रोडी) के कैमियो ने। वह यहां सलमान खान को कॉपी करते भी दिखे। ऋतिक का यह इस साल का दूसरा कैमियो है। इससे पहले वह आलिया भट्ट की ‘अल्फा’ में भी नजर आए थे। इसके अलावा विजय सेतुपति का कैमियों भी अच्छा है पर नोरा फतेही का डांस नंबर इग्नोर किया जा सकता था। वह फिल्म की गति पर प्रभाव डालता है।

निर्देशन: डार्क ह्यूमर और संगीत है फिल्म की ताकत

नेल्सन दिलीपकुमार की फिल्मों में हास्य का अंदाज पारंपरिक कॉमेडी से अलग होता है। ‘जेलर 2’ में भी डार्क ह्यूमर कहानी के साथ चलता है। पहले हिस्से में नेल्सन बड़े पैमाने के एक्शन पर निर्भर रहने के बजाय छोटे-छोटे मजेदार दृश्य दर्शकों को बांधे रखने की कोशिश करते हैं।
वहीं दूसरे हिस्से में वह अपने सारे इक्के एक-एक करके खोलते हैं। अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के सबसे अहम पहलुओं में से एक है। रजनीकांत की एंट्री से लेकर बड़े टकराव वाले दृश्यों तक संगीत उनके किरदार का प्रभाव बढ़ाता है। 

हालांकि, सीक्वल के लिए केवल बड़े एक्शन दृश्य और जोरदार बैकग्राउंड म्यूजिक पर्याप्त नहीं हैं। कहानी की रफ्तार, दृश्यों के बीच तालमेल और भावनात्मक पक्ष भी उतने ही जरूरी हैं। जहां फिल्म इन पहलुओं को संतुलित रखती है, वहां मनोरंजन का असर बढ़ता है; वहीं धीमी गति दर्शकों के धैर्य की परीक्षा ले सकती है।

कुल मिलाकर फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसके किरदार, सितारों की स्क्रीन प्रेजेंस और दर्शकों के साथ जुड़ने वाले बड़े सिनेमाई पल हैं। वहीं, इसकी कहानी का विस्तार और एक्शन-केंद्रित अंदाज उन दर्शकों की पसंद से अलग हो सकता है, जो गहराई वाली पटकथा को प्राथमिकता देते हैं। नेल्सन ने फिल्म का पूरा अंदाज उन दर्शकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो सिनेमाघर में सिर्फ कहानी देखने नहीं, बल्कि सामूहिक उत्साह का अनुभव लेने भी जाते हैं।

क्यों देखें?

अगर आप रजनीकांत के प्रशंसक हैं और उनकी फिल्मों में दमदार एंट्री, स्टाइलिश एक्शन, जोरदार बैकग्राउंड म्यूजिक और बड़े सितारों की मौजूदगी पसंद करते हैं, तो ‘जेलर 2’ पहले से ही आपकी पहली पसंद है। 
फिल्म एंजॉय करने के इरादे से जाएंगे जो खूब एंजॉय करेंगे पर गहरी कहानी ढूंढने जाएंगे तो निराश हो सकते हैं।

यह फिल्म रजनीकांत के स्टारडम और बड़े पर्दे के उत्साह को केंद्र में रखकर बनाई गई है। अगर आप सिनेमाघर में सीटियां बजाने, तालियां पीटने और हर दमदार एंट्री पर उत्साहित होने वाला अनुभव चाहते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए ही है।

Bureau Report

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