अमेरिका और ईरान के बीच ‘होर्मुज स्ट्रेट’ खोलने को लेकर हुए समझौते के बाद भले ही क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट देखी जा रही है. लेकिन दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई अभी सामान्य होने वाली नहीं है. दोनों देशों के बीच हुई डील पर एनर्जी से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऊंचे दाम और सप्लाई की किल्लत से रातोंरात राहत मिलने वाली नहीं है. तेल कंपनियों को दुनिया की डिमांड के अनुसार दोबारा पूरी कैपेसिटी से ऑपरेशनल करने में अभी कई महीने का समय लग सकता है. जानकारों के अनुसार क्रूड ऑयल की शिपिंग, रिफाइन करने का स्लो प्रोसेस और समुद्री रास्ते की सिक्योरिटी को लेकर तेल कंपनियों के मन में बैठी शंका के कारण डील का जमीन पर असर दिखने में समय लगेगा.
जंग शुरू होने से पहले दुनिया की जरूरत का तेल और गैस क्राइसिस का करीब पांचवां हिस्सा (20%) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से गुजरता था. लेकिन पिछले तीन महीने से क्रूड ऑयल से लदे कई बड़े जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हैं. सुरक्षा कारणों से ये जहाज आगे नहीं बढ़ पा रहे. एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी के रिफाइनिंग रिसर्च हेड डेनियल इवांस का कहना है कि समुद्री इंश्योरेंस कंपनियों को दोबारा भरोसा दिलाने और सुरक्षा इंतजाम पुख्ता करने में समय लगेगा. इसके अलावा, बंद पड़े तेल के कुओं और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को दोबारा चालू करने के लिए तकनीकी कर्मचारियों को जमीनी स्तर पर तैनात करने में भी समय लगेगा.
इंटरनेशनल मार्केट में टूटा क्रूड ऑयल
सोमवार को डील से जुड़ी खबर आते ही इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमत में गिरावट देखी गई. लेकिन यह गिरावट उतनी बड़ी नहीं है जिससे लोगों को तुरंत राहत मिल सके. ब्रेंट क्रूड गिरकर 83.89 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड 80.85 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. इवांस का कहना है कि कीमत में बड़ी गिरावट तब आएगी, जब पहले से फंसे जहाजों को बाहर निकाला जाएगा और नए टैंकरों में तेल की लोडिंग शुरू होगी.
कंपनियों को सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करना होगा
जानकारों का कहना है कि किसी भी बड़े तेल टैंकर को समुद्री रास्ते में लाने के लिए कंपनियों को सुरक्षा को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना पड़ेगा. तेल टैंकरों की अपनी एक रफ्तार होती है. खाड़ी देशों से तेल लोड होकर दूर-दराज के देशों तक पहुंचने, वहां रिफाइनरी में प्रोसेस होने और पेट्रोल पंपों तक पहुंचने के प्रोसेस में महीनों का समय लगता है. यही नहीं, जंग के दौरान जब स्टोरेज की जगह खत्म हो गई तो कई मिडिल ईस्ट के देशों ने जमीन से तेल निकालना बंद कर दिया.
इन देशों ऑयल प्रोडक्शन हो सकता है सामान्य
इस डील के बाद सऊदी अरब और यूएई जैसे देश सबसे पहले अपने ऑयल प्रोडक्शन को सामान्य कर सकते हैं. उनके पास होर्मुज स्ट्रेट के अलावा भी पाइपलाइन और दूसरे रास्ते हैं. लेकिन इराक जैसे देशों के सामने चुनौती बड़ी है, क्योंकि वहां लंबे समय से प्रोडक्शन पूरी तरह ठप पड़ा है और उनके तेल के कुओं की बनावट भी जटिल है. इराक को अपने पुराने लेवल पर लौटने में एक साल का समय लग सकता है. इसके साथ ही, जंग के कारण ऑयल सेक्टर में नया निवेश पूरी तरह रुक गया. इसे दोबारा पटरी पर आने में समय लगेगा.
जिन देशों ने अपना तेल प्रोडक्शन बंद कर दिया, वे तब तक इसे दोबारा शुरू नहीं करेंगे जब तक उन्हें यह भरोसा न हो जाए कि यह शांति और युद्ध विराम केवल 30 या 60 दिन के लिए नहीं बल्कि हमेशा के लिए है.
Bureau Report
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