मेरठ के शास्त्रीनगर स्थित सेंट्रल मार्केट में शनिवार को आवास विकास परिषद ने बड़े पैमाने पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया. भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में शुरू हुई इस कार्रवाई ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी. अभियान की शुरुआत हिस्ट्रीशीटर अमित मिरिंडा के दो मंजिला मकान से की गई, जहां कथित तौर पर निर्धारित सेटबैक क्षेत्र में किए गए निर्माण को बुलडोजर से हटाया गया.
अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की जा रही है. टीम ने मकान के आगे बने हिस्से को ध्वस्त करते हुए अन्य चिन्हित परिसरों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी.
800 से अधिक भवनों को नोटिस
सेंट्रल मार्केट क्षेत्र में आवास विकास परिषद पहले ही 800 से अधिक मकान मालिकों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर चुकी है. परिषद का कहना है कि आवासीय परिसरों में नियमों के विपरीत किए गए निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान चलाया जा रहा है.
शनिवार को कई मकानों की दीवारें, गोदामों के हिस्से और अन्य निर्माण भी हटाए गए. अधिकारियों का कहना है कि चिन्हित परिसरों पर चरणबद्ध तरीके से आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी.
व्यापारियों और स्थानीय लोगों का विरोध
ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान स्थानीय व्यापारियों और निवासियों ने विरोध भी दर्ज कराया. कई दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कार्रवाई चयनात्मक तरीके से की जा रही है. कुछ व्यापारियों का कहना था कि बड़े व्यावसायिक कॉम्प्लेक्सों को छोड़कर छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई की जा रही है.
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि संबंधित पक्षों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके थे और कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है.
अदालत में लंबित है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक सेंट्रल मार्केट में आवासीय भवनों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन है. इसी प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को संबंधित निर्माणों और गतिविधियों के संबंध में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे.
इन निर्देशों के बाद आवास विकास परिषद और प्रशासन ने क्षेत्र का सर्वेक्षण कर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की थी.
14 जुलाई की सुनवाई पर टिकी निगाहें
मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को प्रस्तावित है. इस बीच क्षेत्र के व्यापारियों और परिवारों में भविष्य को लेकर असमंजस बना हुआ है. प्रशासन का कहना है कि आगे की हर कार्रवाई न्यायालय के आदेशों और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप ही की जाएगी, जबकि प्रभावित लोग मामले के समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं.
Bureau Report
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