एक तरफ अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बातचीत चल रही है. कुछ दिन में दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर ऐलान किया जाने वाला है. लेकिन डील के ऐलान से पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा ऐलान कर दिया है जिससे भारत के 90000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार को झटका लगा है. जी हां, यह कारोबार फॉर्मा सेक्टर से जुड़ा है. इसके बाद देश की दिग्गज फॉर्मा कंपनियों के शेयर में गिरावट देखी जा रही है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका में आयात की जाने वाली जेनेरिक दवाओं पर नई सिस्टेमेटिक टैरिफ पॉलिसी का ऐलान किया है.
ट्रंप की तरफ से किये गए ऐलान के अनुसार अमेरिका में दूसरे देशों से एक्सपोर्ट की जाने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो साल तक किसी तरह की कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी. लेकिन दो साल बाद इन दवाओं पर 200 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाया जाएगा. ट्रंप की तरफ से ‘ट्रुथ सोशल’ पर की गई पोस्ट में साफ किया गया कि इस पॉलिसी को 1 अगस्त 2026 से लागू किया जाएगा. इस पॉलिसी के तहत शुरुआत के दो साल 0 प्रतिशत टैरिफ रहने के बाद तीसरे साल यानी 2028 से पहले साल 100 प्रतिशत और उसके बाद इसे बढ़ाकर 200 प्रतिशत टैरिफ कर दिया जाएगा.
ट्रंप की पॉलिसी का क्या है मकसद?
ट्रंप की तरफ से जिस नई पॉलिसी का ऐलान किया गया है, उसका मकसद जेनेरिक मेडिसिन की मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका में फिर से बढ़ाना है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो कंपनियां दो साल के अंदर अमेरिका में अपने प्लांट शुरू नहीं कर पाएंगी, उन्हें टैरिफ की इस चोट का सामना करना पड़ेगा. उनके इस बयान के साफ मायने हैं कि भारत में काम करने वाली कंपनियों को भी इस टैरिफ का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप का मानना है कि इस पॉलिसी से अमेरिकी कस्टमर के हितों की रक्षा हो सकेगी. इस बीच राहत की बात यह है कि पेटेंट, ब्रांडेड और नई खोजी गई दवाओं पर मौजूदा पॉलिसी पहले जैसी ही बनी रहेंगी. एफडीए (FDA) के अनुसार अमेरिका में मिलने वाले दवाओं में से 90 प्रतिशत से ज्यादा जेनेरिक दवाएं होती हैं.
भारत के लिए क्यों अहम है ट्रंप का फैसला?
सस्ती जेनेरिक दवाओं के प्रोडक्शन के कारण भारत को दुनियाभर में ‘वर्ल्ड ऑफ फार्मेसी’ के रूप में जाना जाता है. यानी भारत में जेनेरिक दवाओं का प्रोडक्शन अच्छी मात्रा में होता है. ऐसे में ट्रंप के इस फैसले को इंडिया फार्मेसी सेक्टर के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने 2025 में अमेरिका को 9.7 अरब डॉलर (93600 करोड़ रुपये) की दवाओं का निर्यात किया था. यह देश के फॉर्मा सेक्टर से होने वाले एक्सपोर्ट 25.8 अरब डॉलर का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा है. भारत की तरफ से निर्यात की जाने वाली जेनेरिक मेडिसिन को अमेरिका में शुगर, हाई बीपी, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, संक्रामक रोग और मेंटल हेल्थ से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए यूज किया जाता है.
- फार्मा सेक्टर के 93,000 करोड़ रुपये के कारोबार को झटका
- डोनाल्ड ट्रंप ने 200 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने का ऐलान किया
- दो साल बाद 100% का टैरिफ, फिर यह बढ़कर 200% हो जाएगा
- भारत अमेरिका को कुल फार्मा निर्यात का 38% हिस्सा भेजता है
- जेनेरिक दवाओं की बिक्री में भारतीय कंपनियों की 47% हिस्सेदारी
सप्लाई में भारतीय कंपनियों की 47 प्रतिशत हिस्सेदारी
हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म ‘आईक्यूवीआईए’ (IQVIA) के आंकड़ों के अनुसार अमेरिकी फार्मेसियों में दी जाने वाली जेनेरिक मेडिसिन की सप्लाई में भारतीय कंपनियों की हिस्सेदारी 47 प्रतिशत है. भारतीय दवा निर्माता सिप्ला, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज आदि अमेरिकी मार्केट के प्रमुख सप्लायर हैं. आपको बता दें अमेरिकी हेल्थ सिस्टम को भारतीय दवाओं से बड़ी फाइनेंशियल सपोर्ट मिल रही है. एक अनुमान के अनुसार, 2022 में ही भारतीय जेनेरिक दवाओं ने अमेरिकी हेल्थ सर्विस सिस्टम के 219 अरब डॉलर बचाए थे. अमेरिका में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली डायबिटीज की दवा मेटफॉर्मिन, बीपी की लोसार्टन और एमोक्सिसिलिन जैसी एंटीबायोटिक्स भारत से ही जाती हैं.
अमेरिकी पॉलिसी का असर
ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी दवाओं के निर्माण को वापस अमेरिका में लाने और विदेशों से किये जाने वाले आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश का हिस्सा है. इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में प्रोडक्शन करने या कीमत कम करने के बदले चार्ज कम करने के कदम उठाए गए थे. ट्रंप की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में किया गया है, जब अमेरिकी सरकार भारत समेत दर्जनों देशों पर अतिरिक्त 10 से 12.5 प्रतिशत का नया आयात शुल्क लगाने की तैयारी कर रही है. अमेरिका के बिजनेस रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने भी इशारा दिया कि जल्द दूसरे कड़े व्यापारिक कदम उठाए जा सकते हैं. हालांकि, भारत और अमेरिका की तरफ से कई बार यह कहा जा चुका है कि दोनों देश व्यापारिक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब हैं.
Bureau Report
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