हरियाणा में अपनी लंबित मांगों को लेकर आशा वर्कर्स का गुस्सा एक बार फिर फूट पड़ा है. मंगलवार को तेज बारिश की परवाह किए बिना प्रदेशभर से हजारों की संख्या में आशा वर्कर पंचकूला पहुंचीं. पंचकूला बस स्टैंड पर एकत्रित होकर इन कर्मचारियों ने आशा वर्कर्स यूनियन हरियाणा (सीटू) के बैनर तले राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया. उनकी प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपये प्रति माह करना और उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है.
21 सालों की सेवा, फिर भी बढ़ रहा है शोषण
इस विशाल विरोध प्रदर्शन की अध्यक्षता यूनियन की प्रदेश उपाध्यक्ष रानी ने की, जबकि मंच का संचालन राज्य अध्यक्ष सुनीता द्वारा किया गया. प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए यूनियन नेताओं ने रोष जताया कि आशा वर्कर पिछले 21 सालों से स्वास्थ्य विभाग की हर छोटी-बड़ी योजना को जमीनी स्तर पर सफल बनाने का काम कर रही हैं. इसके बावजूद सरकार उनकी बुनियादी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है. उनका साफ आरोप है कि उन पर काम का दबाव तो लगातार बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उस अनुपात में मानदेय और प्रोत्साहन राशि में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. सीटू के प्रदेश महासचिव जय भगवान और कार्यकारी अध्यक्ष विनोद कुमार ने भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि सरकार स्थायी प्रकृति के काम अस्थायी कर्मचारियों से करवाकर उनका सीधा शोषण कर रही है. उन्होंने पूर्व में कर्मचारी संगठनों के साथ हुए समझौतों को तुरंत लागू करने की मांग उठाई.
28 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री के साथ होगी वार्ता
आशा वर्कर्स के इस कड़े रुख और विरोध के बीच, राज्य की स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने यूनियन को बातचीत का न्योता दिया है. यह वार्ता 28 जुलाई को तय की गई है. इस महत्वपूर्ण बैठक में स्वास्थ्य मंत्री के अलावा स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक भी मौजूद रहेंगे. इसके मद्देनजर यूनियन ने अपनी मांगों का 21 सूत्रीय ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री को सौंप दिया है और उम्मीद जताई है कि बैठक में कोई ठोस समाधान निकलेगा.
मांगें नहीं मानीं तो 10 अगस्त को ‘जेल भरो’ आंदोलन
अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आ रहीं आशा वर्कर्स ने सरकार को खुली चेतावनी दी है. यूनियन ने साफ कर दिया है कि अगर 28 जुलाई की वार्ता विफल रहती है और उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो 10 अगस्त को पूरे प्रदेश में ‘जेल भरो’ आंदोलन किया जाएगा. दावा किया जा रहा है कि इस आंदोलन में लगभग 20 हजार आशा वर्कर हिस्सा लेंगी. इसके बाद, आंदोलन को और तेज करने की रणनीति बनाने के लिए 17 अगस्त को रोहतक में एक राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन भी किया जाएगा.
Bureau Report
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