क्‍या है ‘डार्क पैटर्न’? ज‍िसके जर‍िये SpiceJet ने ग्राहकों को चूना लगाया; CCPA की पकड़ में आया मामला; अब क्‍या बदलेगा?

क्‍या है 'डार्क पैटर्न'? ज‍िसके जर‍िये SpiceJet ने ग्राहकों को चूना लगाया; CCPA की पकड़ में आया मामला; अब क्‍या बदलेगा?

ऑनलाइन एयर टिकट की बुक‍िंग करते समय क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है क‍ि आपने केवल फ्लाइट के टिकट का ही स‍िलेक्‍शन क‍िया. लेकिन पेमेंट पेज तक पहुंचते-पहुंचते उसमें ‘सीट सिलेक्शन फीस’, ‘ट्रैवल इंश्योरेंस’ या ‘कन्वेनिएंस फी’ जुड़ गई? अगर हां, तो आप भी ‘डार्क पैटर्न’ का शिकार हुए हैं. जी हां, ये वहीं ‘डार्क पैटर्न’ है ज‍िसको लेकर सीसीपीए ने स्‍पाइसजेट पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है. सीसीपीए की जांच में सामने आया था क‍ि टिकट बुक‍िंग प्रोसेस के दौरान SpiceClub लॉयल्टी प्रोग्राम में शामिल होने का ऑप्शन पहले से ही स‍िलेक्‍ट रहता था.

डिजिटल वर्ल्‍ड का यह एक ऐसा मायाजाल है, ज‍िसमें कंपनियां कस्‍टमर को बिना उनकी मर्जी के ज्यादा पैसे खर्च करने पर मजबूर कर देती हैं. स्पाइसजेट एयरलाइन इसी डार्क पैटर्न का इस्तेमाल करके ग्राहकों को ठगने के आरोपों के घेरे में आई थी. मामले पर सख्‍ती दिखाते हुए सरकार और एयरलाइन रेग्‍युलेटर ने कड़े कदम उठाए हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा खेल क्या है और अब कस्‍टमर्स के लि‍ए क्या बदलने वाला है?

क्या होता है ‘डार्क पैटर्न’?

डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म (वेबसाइट या ऐप) के यूजर इंटरफेस का ऐसा चालाकी वाला डिजाइन होता है, जिसका एकमात्र मकसद कस्‍टमर को गुमराह करना होता है. इसके जरिये कंपनियों की कोशिश होती है कि कस्‍टमर वह काम कर दे या वह चीज खरीद ले, जो क‍ि वह सामान्‍य तौर पर नहीं करना चाहता था. मसलन, किसी ऑप्शन को इतना छोटा या छिपाकर लिखना कि कस्‍टमर उसे देख ही न पाए या फिर किसी महंगे ऑप्शन को ‘बाय डिफॉल्ट’ (पहले से ही स‍िलेक्‍ट) रखना. यह सीधे तौर पर ग्राहक के अधिकारों से जुड़ा उल्‍लंघन है.

स्पाइसजेट पर क्या-क्‍या आरोप लगे?

  • स्पाइसजेट पर आरोप लगा क‍ि वेबसाइट और ऐप से टिकट बुकिंग के दौरान कस्‍टमर को गुमराह करने वाले डार्क पैटर्न का यूज क‍िया.
  • जब कोई कस्‍टमर टिकट बुक करता था, तो कुछ महंगे ऑप्‍शन पहले से ही टिक रहते थे. ध्यान नहीं देने पर उसके बिल में एक्‍स्‍ट्रा पैसे जुड़ जाते थे.
  • यद‍ि कस्‍टमर एक्‍स्‍ट्रा सर्विस नहीं लेना चाहता तो ‘स्किप’ या ‘नो’ का बटन ढूंढना बेहद मुश्किल या कन्फ्यूजिंग बना दिया गया.
  • स्क्रीन पर ‘सीटें तेजी से भर रही हैं’ या ‘2 सीटें बची हैं’ जैसे मैसेज दिखाकर कस्‍टमर्स को जल्दी फैसला लेने के लिए उकसाया जाता था.

अब कस्‍टमर के ल‍िए क्‍या बदलेगा?

उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और डीजीसीए जैसी नियामक संस्थाओं की सख्ती के बाद स्पाइसजेट समेत सभी एयरलाइंस को अपने बुक‍िंग स‍िस्‍टम में बड़े बदलाव करने पड़ रहे हैं. एक यात्री के तौर पर देखें तो अब कंपनियां अपनी मर्जी से इंश्योरेंस, खाना या खास सीट को पहले से टिक करके नहीं रख सकतीं. जब तक ग्राहक खुद उस पर क्लिक नहीं करेगा, वह सर्विस बिल में नहीं जुड़ेगी. इसके अलावा एक्‍स्‍ट्रा सर्विस नहीं चाहिए का ऑप्‍शन अब स्क्रीन पर साफ और बड़े अक्षरों में द‍िखेगा.

क‍िराया और टैक्‍स साफ द‍िखाई देगी

इसके अलावा टिकट बुकिंग के पहले स्टेप पर टैक्स और जरूरी फीस समेत कुल किराया साफ द‍िखाई देगा. पेमेंट पेज पर जाकर अचानक ‘सरप्राइज चार्ज’ जोड़ना अब एयरलाइन के लि‍ए मुमकिन नहीं होगा. टिकट कैंसिल करने के प्रोसेस को जानबूझकर जटिल बनाने वाले ‘डार्क पैटर्न’ पर रोक लगेगी. रिफंड की शर्तें भी साफ-साफ लिखनी होंगी. साथ ही ‘टिकट बुक‍िंग के लि‍ए महज 2 मिनट बचे हैं’ जैसे फर्जी टाइमर द‍िखाकर कस्‍टमर पर प्रेशर बनाने वाले हथकंडों पर लगाम लग सकेगी.

ग्राहक के तौर पर आपके लि‍ए ट‍िप्‍स

  • भले ही नियम सख्त हो रहे हैं लेकिन डिजिटल फ्रॉड से बचने के लिए आपका अलर्ट रहना जरूरी है.
  • पेमेंट करने से पहले आपको हमेशा पूरी डिटेल (किराया, टैक्स, अन्य चार्ज) को ध्‍यान से पढ़ना चाह‍िए.
  • बुकिंग के दौरान हर पेज पर आने वाले पॉप-अप को बिना पढ़े ‘कंटीन्‍यू’ या ‘ओके’ न करें.
  • यद‍ि आपको किसी भी ऐप या वेबसाइट पर डार्क पैटर्न का एक्‍सपीर‍ियंस होता है तो नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (1915) पर इसकी शिकायत कर सकते हैं.

Bureau Report

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