बुराड़ी में दावों की खुली पोल, मुख्य नाला जाम होने से जलभराव, मानसून में बढ़ी लोगों की मुसीबत

बुराड़ी में दावों की खुली पोल, मुख्य नाला जाम होने से जलभराव, मानसून में बढ़ी लोगों की मुसीबत

राजधानी दिल्ली की बुराड़ी विधानसभा में मानसून के बीच सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. फ्लड विभाग द्वारा मानसून से पहले बड़े नालों की सफाई के दावे किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है. मुख्य नाला जाम होने से कई रिहायशी इलाकों में जलभराव की समस्या बनी हुई है।.

कई इलाकों में जलभराव की समस्या
उत्तरी दिल्ली की बुराड़ी विधानसभा में मानसून के दौरान सफाई व्यवस्था के दावों की पोल खुलती दिखाई दे रही है. मानसून शुरू हुए 20 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन कई इलाकों में जलभराव की समस्या अभी भी बनी हुई है. इसकी सबसे बड़ी वजह फ्लड विभाग के मुख्य नाले की सफाई अधूरी रहना बताई जा रही है. नाले की सफाई पूरी न होने का असर संत नगर समेत आसपास की कई गलियों में साफ दिखाई दे रहा है.

सड़कों और गलियों में भर जाता है बारिश की पानी
तस्वीरों में दिखाई दे रहा यह बुराड़ी का प्रमुख ड्रेन है, जिसे पूरे इलाके की “लाइफ लाइन” माना जाता है. बुराड़ी के छोटे-बड़े नालों और नालियों का पानी इसी मुख्य नाले के जरिए आगे निकलता है. लेकिन फिलहाल यह नाला कई जगहों पर गाद और कचरे से भरा हुआ नजर आ रहा है, जिससे पानी की निकासी बाधित हो रही है. यहां हल्की बारिश के बाद भी सड़कों और गलियों में पानी भर जाता है, जिससे लोगों का आवागमन प्रभावित हो रहा है.

शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मानसून से पहले केवल कुछ दिनों तक सफाई अभियान चलाया गया नाले की कुछ सीमेंट स्लैब हटाकर किनारे रख दी गईं, लेकिन बाद में न तो पूरी सफाई हुई और न ही स्लैब दोबारा लगाई गईं. लोगों का कहना है कि खुले पड़े नाले और किनारे रखी भारी स्लैब बच्चों और राहगीरों के लिए हादसे का कारण बन सकती हैं. स्थानीय निवासियों का कहना है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया.

अब सवाल यह उठता है कि जब मानसून से पहले बड़े स्तर पर नालों की सफाई के दावे किए गए थे, तो फिर मुख्य नाला आज भी जाम क्यों है? क्या संबंधित विभाग इस लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करेगा? और क्या मुख्यमंत्री संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगेंगी? फिलहाल बुराड़ी के लोग जलभराव और बदहाल सफाई व्यवस्था से राहत मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

Bureau Report

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