नईदिल्ली: AIMIM के अध्यक्ष एवं हैदराबाद से सांसद बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने छात्र आंदोलन और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों की मांग कर रहे छात्रों और युवाओं की आवाज़ को दबाने की कोशिश समाधान नहीं है।
PTI News से बातचीत के दौरान बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने कहा,
“सरकार सोच रही है कि वह नौजवानों को दबा देगी। आप जितना उन्हें दबाने की कोशिश करेंगे, वे उतने ही ताक़तवर होंगे।”
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने कहा,
“जिसके सीने में धड़कता हुआ दिल होगा, वही समझ सकता है कि Students के साथ कैसा सुलूक किया गया। उन पर लाठियां बरसाना पूरी तरह ग़लत है, यह सरकार की बहुत बड़ी नाकामी है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया जा रहा है और उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) लगाने जैसी बातें की जा रही हैं। ओवैसी ने सवाल उठाया कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखने वाले छात्रों को इस तरह क्यों देखा जा रहा है।
ओवैसी ने यह भी कहा कि केवल बहुमत के आधार पर युवाओं की आवाज़ को दबाने का प्रयास लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं है। उनके अनुसार, सरकार को छात्रों और युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए तथा संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।
हाल के दिनों में परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और जवाबदेही जैसे मुद्दों को लेकर देश के विभिन्न हिस्सों में छात्र आंदोलन जारी है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाए तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए।
ओवैसी के बयान को छात्र आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जा रहा है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और छात्रों की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी बात सुनी जानी चाहिए।
नोट: यह समाचार बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी के सार्वजनिक बयान पर आधारित है। लेख में व्यक्त आरोप और प्रश्न ओवैसी के बयान का हिस्सा हैं। इस संबंध में केंद्र सरकार का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाएगा।
Bureau Report
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