सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट, पत्नी बोलीं- भर्ती करने की जरूरत नहीं थी

सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी, सफदरजंग अस्पताल ने दिया हेल्थ अपडेट, पत्नी बोलीं- भर्ती करने की जरूरत नहीं थी

लद्दाख के मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे. कई दिनों से चल रहे इस धरने में उन्होंने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी थी. लेकिन अब उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें दिल्ली के सदरजंग अस्पताल में भर्ती करवा दिया है. अस्पताल ने सोनम वांगचुक के बारे में अस्पताल ने भी स्वास्थ्य बुलेटिन जारी किया और उन्हें लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन की वजह से कमजोर बताया, वहीं वांगचुक की पत्नी का कहना है कि उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाने की कोई जरूरत नहीं थी.

सोनम वांगचुक लद्दाख की पर्यावरण सुरक्षा और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर लंबे समय से आवाज उठाते आ रहे हैं. इस बार उन्होंने दिल्ली में जंतर मंतर पर अपना धरना दिया था, जहां वो अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बना रहे थे. प्रदर्शन के दौरान उन्होंने खुद को भूखा रखने का फैसला लिया, जिसके चलते उनकी हालत लगातार कमजोर होती गई.

28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे हैं सोनम वांगचुक

 NEET-UG पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन धरना 28 जून 2026 को दिल्ली के जंतर मंतर पर शुरू हुआ. पोटेस्टर्स की लगातार मांग NEET-UG पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा. इस प्रदर्शन में सोनमवांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. 18 जुलाई 2026 तक यह हड़ताल लगभग 20 से 21 दिन की हो चुकी थी. उनका वजन 8.5 से 9 किलो तक कम हो चुका था, स्वास्थ्य नाजुक हो गया था. 

वांगचुक के स्वास्थ्य पर आया अस्पताल का बयान

28 जून से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर सफदरजंग अस्पताल ने बताया, ‘सोनम वांगचुक को जरूरी इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है. लंबे समय तक उपवास और डिहाइड्रेशन की वजह से वे कमजोर हो गए हैं. हालांकि अभी उनकी हालत स्थिर है, लेकिन उनके शरीर के पैरामीटर्स को सामान्य करने के लिए लगातार निगरानी और इलाज की जरूरत है.”

सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर क्या बोले डॉक्टर?

सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. चारू बांबा ने सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य पर बताया, ‘सोनम वांगचुक सुबह करीब 7:40 बजे हमारे अस्पताल पहुंचे. लंबे समय तक उपवास रखने के कारण वे थोड़े कमजोर हैं और उन्हें हल्की डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) है; इसके अलावा, उनके सभी जरूरी पैरामीटर स्थिर हैं. उनकी लगातार जांच और निगरानी की जा रही है और उनका इलाज चल रहा है. वे पूरी तरह से होश में और स्थिर हैं. शुरू में, उनके आने पर इमरजेंसी मेडिसिन डिपार्टमेंट ने उन्हें देखा और अब उन्हें मेडिसिन डिपार्टमेंट में भर्ती किया गया है. वे पूरी तरह से होश में हैं और सभी पैरामीटर स्थिर हैं. हम उन्हें कुछ समय तक रखेंगे क्योंकि डिहाइड्रेशन के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट लेवल पर असर पड़ने के संकेत हैं. हम इन्हें ठीक करेंगे और फिर उनकी स्थिति की दोबारा समीक्षा करेंगे.’

दिल्ली हाईकोर्ट में सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और स्वास्थ्य को लेकर याचिका दायर की गई थी.

  • कोर्ट ने कहा कि ‘हर जान कीमती है’.
  • केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को रोजाना मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया.
  • डॉक्टरों और एक्सपर्ट्स की टीम को उनकी सेहत की निरंतर निगरानी रखने को कहा गया था.
  • सरकार ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि स्वास्थ्य की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है.

अस्पताल क्यों ले जाना पड़ा?

पुलिस और मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, वांगचुक की सेहत तेजी से बिगड़ रही थी. लंबे समय तक भूखे रहने के कारण उन्हें बेहोशी जैसे लक्षण नजर आने लगे थे. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस टीम ने उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाने का फैसला किया. अभी उनकी स्थिति पर ज्यादा जानकारी नहीं मिली है, लेकिन डॉक्टर उन्हें निगरानी में रखकर इलाज कर रहे हैं.

कार्यकर्ताओं में गुस्सा और चिंता

इस खबर के बाद सोनम वांगचुक के समर्थकों और दूसरे एक्टिविस्टों में नाराजगी फैल गई है. कई लोग इसे दबाने की कोशिश बता रहे हैं. वहीं कुछ का कहना है कि जान बचाने के लिए ये जरूरी कदम था. सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग वांगचुक की हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ सवाल उठा रहे हैं कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान क्यों नहीं दे रही.

लद्दाख मुद्दा फिर सुर्खियों में

सोनम वांगचुक का नाम लद्दाख की जमीन, पानी और संस्कृति की रक्षा के लिए जाना जाता है. खासकर क्लाइमेट चेंज और बड़े प्रोजेक्ट्स के खिलाफ उनकी लड़ाई काफी चर्चित रही है. इस बार का प्रदर्शन भी उसी सिलसिले में था. अब देखना होगा कि उनकी सेहत सुधरने के बाद आंदोलन किस दिशा में जाता है और सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है.अभी अस्पताल से कोई आधिकारिक अपडेट आने का इंतजार है. कार्यकर्ता की सेहत को लेकर चिंता बनी हुई है.

Bureau Report

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