झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव का ऐलान हो गया है, जिसके बाद से राजनीतिक सरगर्मी तेज होती दिख रही है. चुनाव में इस बार इंडिया ब्लॉक का पलड़ा भारी दिख रहा है, लेकिन विपक्षी एनडीए भी मुकाबले के लिए कमर कस चुका है. बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने का ऐलान कर दिया है और उसकी कोशिश है कि चुनाव को दिलचस्प कैसे बनाया जाए. विधानसभा में इंडिया ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं तो एनडीए के पास केवल 24. एक विधायक अन्य के रूप में है. महागठबंधन 56 विधायकों के दम पर अपने दोनों प्रत्याशियों को जिताने में सक्षम है, लेकिन अगर क्रॉस वोटिंग हुई तो यह एनडीए के लिए लॉटरी से कम नहीं होगा. याद कीजिए कि बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव में भी एनडीए को 5वीं सीट के लिए 4 विधायकों की जरूरत थी और अब झारखंड में भी एनडीए को अपना प्रत्याशी जिताने के लिए 4 विधायकों की ही जरूरत है.
झारखंड विधानसभा में दलीय स्थिति
महागठबंधन: 56 विधायक
झारखंड मुक्ति मोर्चा: 34 विधायक
कांग्रेस: 16 विधायक
राष्ट्रीय जनता दल+ 4
सीपीआई एमएल: 2 विधायक
एनडीए: कुल 24 विधायक
बीजेपी: 21 विधायक
आजसू: 1 विधायक
जेडीयू: 1 विधायक
लोजपा रामविलास: 1 विधायक
अन्य: जेकेएलएम का 1 विधायक
जीत के लिए जरूरी विधायकों का कोटा
झारखंड विधानसभा में 81 विधायक हैं. राज्यसभा चुनाव चूंकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली से होता है. इस बार 2 सदस्यों के लिए चुनाव होना है तो जीत के लिए जरूरी कोटे का फॉर्मूला ऐसे निकाला जाता है.
सत्तारूढ़ महागठबंधन में खींचतान
सत्तारूढ़ महागठबंधन का पलड़ा भले ही झारखंड के राज्यसभा चुनाव में भारी दिख रहा है, लेकिन इसके दलों के बीच खींचतान के चलते इसका फायदा विपक्षी एनडीए उठा सकता है. झारखंड मुक्ति मोर्चा सदन में सबसे बड़ा दल होने के नाते दोनों सीटों पर अपना दावा ठोक रहा है तो कांग्रेस गठबबंधन धर्म की दुहाई देते हुए एक सीट पर अपना हक जमा रही है.
दूसरी ओर, बीजेपी के पास केवल 24 विधायक हैं और वह एक सीट के लिए अपना प्रत्याशी उतारने की रणनीति बना रही है. बीजेपी के नेता इस बात का दावा कर रहे हैं कि असंतुष्ट विधायक अंतरात्मा की आवाज पर उसके प्रत्याशी के पक्ष में वोटिंग कर सकते हैं. इससे पहले बिहार और ओडिशा में बीजेपी और उसके समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में ऐसा हो चुका है.
सौ बात की एक बात यह है कि अगर इंडिया ब्लॉक या महागठबंधन के सभी विधायक एकजुट रहते हैं तो फिर बीजेपी प्रत्याशी को मुह की खानी पड़ेगी, लेकिन यदि विधायकों में किसी भी प्रकार का असंतोष होता है तो क्रॉस वोटिंग की संभावना बढ़ेगी और बीजेपी प्रत्याशी की जीत आसान हो जाएगी.
Bureau Report
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