सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कई वीडियो में दावा किया जा रहा है कि E20 फ्यूल यानी सरकार की तरफ से पेट्रोल में मिलाए जाने वाले 20% इथेनॉल गाड़ियों के इंजन को तबाह कर रहा है. कई वायरल वीडियो में पर्यावरण को नुकसान पहुंचने और चीटियों के पेट्रोल टैंक की तरफ आने के अजीबोगरीब दावे भी किये जा रहे हैं. इन सभी अफवाहों पर खुद पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मिनिस्ट्री ने सामने आकर पूरी सच्चाई देश के सामने रख दी है. सरकार ने एक-एक करके इन सभी मिथ को खारिज कर दिया है और बताया कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है. आइए समझते हैं सरकार का क्या है पूरा पक्ष?
Q. सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि E20 फ्यूल से गाड़ी का इंजन खराब हो रहा है?
A. सरकार का कहना है कि यह दावा पूरी तरह गलत है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने इस पर लंबी रिसर्च की है. ARAI ने कारों को 40,000 किमी और टू-व्हीलर्स को 20,000 किमी तक चलाकर टेस्ट किया है. टेस्टिंग में सामने आया कि गाड़ी के चलने या इंजन की लाइफ पर किसी तरह का असर नहीं पड़ता. माइलेज में मामूली बदलाव देखा गया है. इथेनॉल के हाई ऑक्टेन रेटिंग की वजह से गाड़ियां और बेहतर परफॉर्म कर सकती हैं.
Q. क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी के मेटल या प्लास्टिक पार्ट्स गल जाते हैं?
A. बिल्कुल नहीं. ARAI ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के साथ मिलकर इसकी जांच की है. जांच में मेटल या प्लास्टिक के किसी भी हिस्से में खराबी या जंग की बात सामने नहीं आई है. पुरानी गाड़ियों के कुछ रबर पार्ट्स को समय से पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है.
Q. E20 पेट्रोल डालने से गाड़ी की वारंटी और इंश्योरेंस खत्म हो जाएगा, क्या यह सही है?
A. यह केवल एक अफवाह है. सरकार ने साफ किया है कि सभी वाहन निर्माताओं और इंश्योरेंस कंपनियों ने यह लिखित में साफ किया कि जो गाड़ियां E20 के लिए डिजाइन की गई हैं या मंजूर हैं, उनकी वारंटी और इंश्योरेंस क्लेम पूरी तरह से सुरक्षित रहेंगे.
Q. E20 पेट्रोल में चीनी होने के कारण चीटियां और मधुमक्खियां पेट्रोल टैंक की तरफ आ रही हैं, क्या यह सही है?
A. मिनिस्ट्री की तरफ से इसे खारिज कर दिया गया. जिस इथेनॉल को पेट्रोल में मिलाया जाता है, उसे बहुत ही मॉर्डन डिस्टिलेशन प्रोसेस से गुजारा जाता है, जिससे उसमें चीनी का एक भी अंश नहीं बचता. साथ ही, इसमें कुछ ऐसे तत्व मिलाए जाते हैं जिससे कीड़े-मकौड़े दूर भागते हैं. पेट्रोल की अपनी गंध भी इतनी तेज होती है कि कोई भी जीव इसके पास नहीं आएगा.
Q. वीडियो में दिखाया जा रहा है कि सीधा गन्ने का जूस पेट्रोल में मिलाया जा रहा है, क्या भारत में ऐसा हो रहा है?
A. यह वीडियो फर्जी और एडिटेड है. गन्ने के जूस को सीधे पेट्रोल में कभी नहीं मिलाया जा सकता. इथेनॉल को फैक्ट्रियों में तय प्रोसेस और बेहद कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड के तहत तैयार किया जाता है. इसके बाद ही इसे पेट्रोल में मिक्स किया जाता है.
Q. क्या एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी बर्बाद होता है?
A. यह आंकड़ा बढ़ा-चढ़ाकर और झूठ फैलाने के लिए बताया जा रहा है. असलियत यह है कि एक लीटर इथेनॉल बनाने में महज 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी यूज होता है. देश की सभी डिस्टिलरीज ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) सिस्टम पर काम करती हैं, यानी वे इस्तेमाल किये गए पानी को रिसाइकल करके दोबारा यूज करती हैं.
Q. क्या इथेनॉल बनाने के लिए देश का अनाज खत्म किया जा रहा है?
A. नहीं, देश की फूड सिक्योरिटी सरकार की पहली प्राथमिकता है. देश की जरूरत पूरी होने के बाद जो अतिरिक्त (Surplus) चावल बचता है, केवल उसी का यूज इथेनॉल बनाने में किया जाता है. इथेनॉल बनाने के लिए मक्का का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया गया है, जो कुल सप्लाई का 40% से ज्यादा है.
Q. E20 बिना जांचा हुआ ‘एक्सपेरिमेंट’ है, क्या दुनिया में कहीं और इसका इस्तेमाल होता है?
A. यह कोई नया प्रयोग नहीं है. दुनिया के कई बड़े देश जैसे अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपीय देश पिछले कई दशक से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाकर गाड़ियों में यूज कर रहे हैं. भारत ने भी पूरी दुनिया की बेस्ट प्रैक्टिस देखने के बाद ही इसे अपनाया है.
Q. क्या E20 पेट्रोल से गाड़ी की टंकी में पानी घुसने का खतरा बढ़ जाता है?
A. नहीं, आज आधुनिक गाड़ियों और पेट्रोल पंपों के फ्यूल इंफ्रास्ट्रक्चर में पानी को रोकने के लिए बेहद एडवांस सेफ्टी फीचर्स होते हैं. इसलिए पानी घुसने का कोई खतरा नहीं है. पर्यावरण के लिहाज से भी इन प्लांट्स को सख्त सरकारी नियमों और ग्राउंड वाटर रेगुलेशन का पालन करना पड़ता है.
Q. इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम से देश को अब तक क्या हासिल हुआ?
A. इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और देश को आत्मनिर्भर बनाने वाले हैं. साल 2014-15 से अब तक इसकी वजह से 1.9 लाख करोड़ की विदेशी मुद्रा (Foreign Exchange) की बचत हुई है. जो क्रूड ऑयल की खरीद में बाहर जाती. इसके अलावा देश के किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है, जिससे रूरल इकोनॉमी को मजबूती मिली.
Bureau Report
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