Meta के स्मार्ट AI चश्मों को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है. यह विवाद सिर्फ प्राइवेसी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कर्मचारियों की नौकरी जाने और काम करने की स्थितियों जैसे गंभीर मुद्दे भी जुड़ गए हैं. शुरुआत में यह प्रोजेक्ट AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन अब यह इस बात पर बहस छेड़ रहा है कि यूजर्स का डेटा कैसे इकट्ठा किया जाता है और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाता है.
प्राइवेट मोमेंट्स रिकॉर्ड होने का मामला
एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक घटना में AI चश्मा बेडरूम में रिकॉर्डिंग मोड में छोड़ दिया गया था. इस दौरान एक महिला के कपड़े बदलने का वीडियो रिकॉर्ड हो गया. ऐसे वीडियो बाद में उन कर्मचारियों तक पहुंचे, जिन्हें AI को ट्रेन करने के लिए डेटा एनोटेशन का काम दिया गया था. इन कर्मचारियों का काम था कि वे वीडियो और तस्वीरों को देखकर AI सिस्टम को समझने और सुधारने में मदद करें.
कर्मचारियों का अनुभव: “हम सब कुछ देखते हैं”
इन डेटा एनोटेटर्स ने दावा किया कि उन्हें सिर्फ सामान्य वीडियो ही नहीं, बल्कि बेहद निजी और संवेदनशील कंटेंट भी देखना पड़ता था. कुछ कर्मचारियों के अनुसार, उन्हें ऐसे वीडियो भी देखने पड़े जिनमें लोग टॉयलेट का इस्तेमाल कर रहे थे या यौन गतिविधियों में शामिल थे. एक कर्मचारी ने कहा, “हम सब कुछ देखते हैं, लिविंग रूम से लेकर लोगों के निजी पलों तक.”
Meta और Sama के बीच विवाद
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद Meta ने अपने आउटसोर्सिंग पार्टनर Sama के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया. Meta का कहना था कि Sama उनके मानकों पर खरा नहीं उतरा. हालांकि Sama ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उसने हमेशा सभी ऑपरेशन, सुरक्षा और क्वालिटी मानकों का पालन किया है. इस फैसले का सबसे बड़ा असर कर्मचारियों पर पड़ा, क्योंकि करीब 1,108 लोगों की नौकरी चली गई. इससे लेबर कंडीशंस और कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
क्या कर्मचारियों की आवाज उठाने की सजा मिली?
कुछ कर्मचारी संगठनों का मानना है कि यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के खिलाफ की गई, जिन्होंने अपने काम के बारे में खुलकर बात की थी. अफ्रीका टेक वर्कर्स मूवमेंट से जुड़े एक प्रतिनिधि ने कहा कि “यह मानक नहीं, बल्कि चुप्पी बनाए रखने का तरीका है.” हालांकि Meta ने इस आरोप पर सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया है.
Meta का पक्ष: यूजर की सहमति का दावा
Meta का कहना है कि AI सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए इंसानों द्वारा कंटेंट रिव्यू करना आम प्रक्रिया है और इसके लिए यूजर्स की सहमति ली जाती है. कंपनी ने यह भी कहा कि यूजर्स के फोटो और वीडियो प्राइवेट रहते हैं और उनका इस्तेमाल सीमित दायरे में ही किया जाता है.
रेगुलेटर्स की एंट्री और जांच
यह मामला अब रेगुलेटर्स तक पहुंच चुका है. यूके के Information Commissioner’s Office ने इसे “चिंताजनक” बताया है और Meta से संपर्क किया है. वहीं केन्या की डेटा प्रोटेक्शन एजेंसी ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है. इससे साफ है कि यह विवाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है.
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहली बार नहीं है जब Meta और Sama की साझेदारी पर सवाल उठे हैं. इससे पहले Facebook के कंटेंट मॉडरेशन को लेकर भी कर्मचारियों ने शिकायत की थी कि उन्हें परेशान करने वाले और मानसिक रूप से कठिन कंटेंट का सामना करना पड़ता है. अब यह मामला AI इंडस्ट्री में काम करने की स्थितियों और नैतिकता पर भी सवाल उठा रहा है.
Bureau Report
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