छात्र परेशान, CBSE मालामाल? राहुल गांधी का एजुकेशन सिस्टम पर निशाना, बताया कैसे लूटे जा रहे हैं करोड़ों रुपये

छात्र परेशान, CBSE मालामाल? राहुल गांधी का एजुकेशन सिस्टम पर निशाना, बताया कैसे लूटे जा रहे हैं करोड़ों रुपये

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं की कॉपी चेकिंग के ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के कारण विवादों में घिरा हुआ है. सीबीएसई कक्षा 12वीं के परिणाम जारी होने के बाद से ही ओएसएम की गड़बड़ी को लेकर तरह-तरह के दावे छात्रों और अभिभावकों की ओर से किया जा रहा है. इसके साथ ही एजुकेशन सिस्टम और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं. राहुल गांधी लगातार भारत के शिक्षा सिस्टम पर सवाल उठा रहे हैं. हाल ही में उन्होंने कक्षा 12वीं की री-इवैल्यूएशन और अंक वेरिफिकेशन प्रोसेस के लिए पोर्टल की शुरुआत न होने के कारण सीबीएसई से सवाल पूछे थे. वहीं, अब री-इवैल्यूएशन प्रोसेस फीस के जरिए सीबीएसई पर निशाना साधा है.

‘जेबकतरों से सावधान!’- राहुल गांधी

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने आधिकारिक अकाउंट @RahulGandh के जरिए CBSE और शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधा है. उन्होंने एक पोस्ट में बोर्ड को ‘जेबकतरा’ बताते हुए री-इवैल्यूएशन और अंक सत्यापन (वेरिफिकेशन) शुल्क पर सवाल उठाए. राहुल गांधी ने CBSE की फीस सूची साझा करते हुए पूछा कि आखिर 12वीं के छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका दोबारा जांचने के लिए 2000 रुपये तक क्यों खर्च करने पड़ रहे हैं. उन्होंने ये भी दावा किया कि इस प्रक्रिया के लिए करीब 4 लाख छात्रों ने आवेदन किया है, जिससे बोर्ड करोड़ों रुपये की कमाई कर सकता है.

एक्स पर राहुल गांधी ने क्या पोस्ट किया?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राहुल गांधी ने पोस्ट किया ‘सावधान रहें- आजकल जेबकतरे CBSE के भीतर बैठे हैं. एक बिल:- उत्तर पुस्तिका की डिजिटल स्कैन कॉपी: 100 रुपये प्रति विषय, री-टोटलिंग (अंकों का पुनर्गणना): 100 रुपये प्रति पेपर और री-इवैल्यूएशन (पुनर्मूल्यांकन): 25 रुपये प्रति प्रश्न है.’ आगे लिखा- ‘एक बच्चे को अपनी ही उत्तर पुस्तिका की सही जांच करवाने के लिए 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं.’

उन्होंने आगे लिखा ‘जरा सोचिए- जब 4 लाख बच्चों ने ऐसे आवेदन किए हैं, तो CBSE इससे कितनी कमाई कर रहा होगा? जब उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग मोबाइल फोन से की गई हो, तो गलत मूल्यांकन होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. लेकिन उस गलती को ठीक करवाने का खर्च भी बच्चे और उसके परिवार को ही उठाना पड़ता है. गलती CBSE की. सजा बच्चे की. कमाई सरकार की.  जब शिक्षा को सेवा के बजाय कारोबार बना दिया जाता है, तो गलतियां सुधारी नहीं जातीं- उन्हें बढ़ाया जाता है और इसकी सबसे बड़ी कीमत हमारे बच्चे चुकाते हैं- अपने समय, अपने आत्मविश्वास और अपने भविष्य के साथ.’

जानकारी के लिए बता दें कि सीबीएसई की ओर से छात्रों को अंक सुधार करने के लिए री-इवैल्यूएशन और अंक वेरिफिकेशन प्रोसेस को अपनाने के लिए आवेदन करने का मौका दिया जा रहा है. बोर्ड की ओर से प्रत्येक सब्जेक्ट के लिए 100 रुपये और प्रत्येक प्रश्न के री-इवैल्यूएशन और अंक वेरिफिकेशन की आवेदन फीस तय की गई है, लेकिन ये भी साफ कहा है कि अगर आवेदन करने के बाद अंक में सुधार होता है और नंबर बढ़ते हैं तो बोर्ड की ओर से लिए गए पैसों को वापस लौटा दिया जाएगा. जबकि, किसी तरह के अंक में बदलाव न होने पर स्टूडेंट्स को फीस रिफंड नहीं किया जाएगा.

Bureau Report

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