अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है. दोनों देशों के बीच लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों की खबरों के बीच ईरान के मशहद शहर में हुए हमले ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने मशहद में दो पुलों को निशाना बनाया. यह शहर इसलिए भी बेहद अहम माना जाता है क्योंकि इसे ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई का गृह नगर बताया जाता है.
ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि यह कार्रवाई ऐसे समय की गई है जब खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही हैं. उनका कहना है कि इस हमले का मकसद अंतिम यात्रा को प्रभावित करना था. हालांकि अमेरिका की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ABC News की एक रिपोर्ट के मुताबिक संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, एक MQ-9 रीपर ड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर (30 मिलियन डॉलर) है. यदि यह आंकड़ा सही साबित होता है, तो केवल ड्रोन के नुकसान से ही अमेरिका को सैकड़ों मिलियन डॉलर का आर्थिक झटका लगा है.
ट्रंप के खिलाफ गुस्सा, होटल पर लगे बैनर ने खींचा ध्यान
मशहद में तनावपूर्ण माहौल के बीच एक होटल पर लगा बैनर भी चर्चा का विषय बना हुआ है. बैनर पर अंग्रेजी में “We will kill Trump” लिखा दिखाई दिया, जिसने स्थानीय लोगों के गुस्से और अमेरिका विरोधी माहौल को लेकर नई बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर भी इस बैनर की तस्वीरें तेजी से साझा की जा रही हैं. इस बीच ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है. खबरों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना मुख्यालय के आसपास भी हमले की कोशिश की गई. घटनाक्रम के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है.
अमेरिकी ड्रोन को हुआ बड़ा नुकसान
वेंस का कहना है कि ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों पर हमले दोबारा शुरू करके हालिया समझौते की भावना का उल्लंघन किया है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही रोकने की कोशिश की, तो अमेरिका उसका सख्त जवाब देगा. युद्ध के बीच अमेरिका को भी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा है. ABC News की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद अब तक अमेरिकी वायुसेना के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए गए हैं.
कैसे होती है शिया परंपरा में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया?
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के 4 महीनों के बाद अब उनका अंतिम संस्कार की प्रक्रिया मुख्य रूप से इस्लामी (शिया) परंपराओं और ईरान के सरकारी प्रोटोकॉल के अनुसार होगी.
1. आधिकारिक घोषणा
ईरान की सरकार और सर्वोच्च नेतृत्व कार्यालय (Office of the Supreme Leader) आधिकारिक रूप से निधन की घोषणा के बाद देश में कई दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी.
2. गुस्ल (शव को धोना)
इस्लामी परंपरा के अनुसार शव को धार्मिक नियमों के तहत धोया (गुस्ल) जाएगा. यह कार्य प्रशिक्षित और अधिकृत लोगों द्वारा किया जाएगा.
3. कफन
शव को सफेद कपड़े (कफन) में लपेटा जाएगा. शिया परंपरा के अनुसार कुछ अतिरिक्त धार्मिक प्रथाएं भी अपनाई जा सकती हैं.
4. नमाज-ए-जनाजा
बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी में जनाजे की नमाज अदा की जाएगी. इसमें ईरानी शीर्ष नेता, सैन्य अधिकारी, धार्मिक विद्वान और विदेशी प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं.
5. अंतिम दर्शन
यदि सरकार निर्णय ले, तो कुछ समय के लिए जनता को अंतिम दर्शन की अनुमति दी जा सकती है. सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रहने की संभावना होगी.
6. दफन
इस्लाम में सामान्यतः शव को जल्द से जल्द दफ़न किया जाता है, अक्सर 24 घंटे के भीतर, हालांकि राज्य स्तर के आयोजनों के कारण इसमें कुछ विलंब हो सकता है.
दफ़न का स्थान ईरानी सरकार और परिवार के निर्णय पर निर्भर करेगा. वर्तमान में इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है कि उनका अंतिम विश्राम स्थल कहां होगा.
7. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय श्रद्धांजलि
देशभर में शोक सभाएं आयोजित हो सकती हैं. कई देशों के नेता संवेदना संदेश भेज सकते हैं और कुछ प्रतिनिधि अंतिम संस्कार में शामिल हो सकते हैं.
Bureau Report
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