Assam Flood: बाढ़ की तबाही से हाहाकार, 80 मौतें और 7 लाख लोग बेघर….इन राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त

Assam Flood: बाढ़ की तबाही से हाहाकार, 80 मौतें और 7 लाख लोग बेघर....इन राज्यों में जनजीवन अस्त-व्यस्त

असम में कुदरत का ऐसा कहर है कि हर तरफ सिर्फ पानी ही पानी नजर आ रहा है. इस तबाही से अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 7 लाख लोग बेघर हो चुके हैं. पिछले 6 दशकों में आई इस सबसे भयावह बाढ़ ने  फसलों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है, जबकि जनजीवन अस्तव्यस्त है. राहत शिविरों में हजारों लोग पनाह लेने को मजबूर हैं.

असम के अलावा गुजरात, ओडिशा और कश्मीर घाटी में भी बाढ़ का कहर है. कश्मीर घाटी के ऊपरी इलाकों में बादल फटने से दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले के कई गांव अचानक आई बाढ़ की चपेट में आ गए हैं. उधर, दक्षिण गुजरात के वलसाड, नवसारी, खेड़ा, अमरेली और सूरत जिलों में स्थिति भयावह बनी हुई है, जहां पानी उतरने के साथ शव बहते पाए गए हैं और प्रशासन ने अब तक 30 से अधिक मौतों की पुष्टि की है.

ओडिशा में भी लगातार बारिश से हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे 2 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 3 लोगों की जान जा चुकी है.

असम में बाढ़ से कितनी तबाही, नीचे जानिए…

1. 80 से अधिक लोगों की मौत, 7 लाख से ज्यादा प्रभावित

असम में बाढ़ की आफत से अब तक 80 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. 11 जिलों में करीब 7.21 लाख लोग और लगभग 900 गांव इस बाढ़ की सीधी चपेट में हैं.

2. 3 गुना चौड़ी हुई ब्रह्मपुत्र नदी

बाढ़ की कहानी का मुख्य केंद्र ब्रह्मपुत्र नदी मानी जाती है, जिसका विस्तार सामान्य सीमा से तीन गुना बढ़कर करीब 21 किलोमीटर चौड़ा हो गया है. नदी के इस रौद्र रूप ने आसपास के इलाकों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है.

3. ये 4 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित

असम में चराईदेव, शिवसागर, जोरहाट और गोलाघाट जिले बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. अकेले चराईदेव में ही करीब 80,000 लोग संकट का सामना कर रहे हैं. गोलाघाट, बिश्वनाथ, कामरूप और धेमाजी सहित अन्य क्षेत्रों के 437 गांव पानी में डूबे हैं.

4. 21,000 हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद

बाढ़ के पानी ने राज्य की खेती-किसानी को बर्बाद कर दिया है. 21,523 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र जलमग्न है, जबकि पानी के तेज बहाव में अब तक 11,000 से अधिक मवेशी और अन्य जानवर बह चुके हैं.

5. 13 हजार घरों में 11 दिनों से अंधेरा

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह चरमरा गया है. कई इलाकों में बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर बह जाने की वजह से लगभग 13,000 घरों में पिछले 11 दिनों से बिजली नहीं है.

6. राहत शिविरों में 71 हजार से ज्यादा लोग

बाढ़ की तबाही से निपटने में बचाव और राहत दल जुटे हैं. असम भर में 216 राहत शिविर और 1,788 राहत वितरण केंद्र बनाए गए हैं. इन शिविरों में 71,416 लोग आश्रय लिए हुए हैं, जिन्हें भोजन, दवाइयां और पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है.

7. मौसम विभाग की अगली भारी बारिश की चेतावनी

बाढ़ की तबाही के चलते कुछ हिस्सों में पानी धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन संकट अभी टला नहीं है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 3 अगस्त तक असम के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है.

8. हर साल 19 साल पीछे चला जाता है असम

असम का कुल 40% हिस्सा (31,500 वर्ग किमी) बाढ़ प्रभावित है. हर साल बाढ़ से राज्य को औसतन 200 करोड़ रुपये का नुकसान होता है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जितनी मूलभूत सुविधाएं खड़ी करने में 10 साल लगते हैं, बाढ़ में नष्ट हो जाने से असम हर साल विकास के मामले में 19 साल पीछे खिसक जाता है.

असम में क्यों होती है हर साल बाढ़ की तबाही?

दरअसल, असम पूरी तरह नदी घाटियों पर बसा है. राज्य के कुल 78,438 वर्ग किमी क्षेत्रफल में से 56,194 वर्ग किमी हिस्सा अकेले ब्रह्मपुत्र नदी घाटी में आता है, जबकि 22,244 वर्ग किमी हिस्सा बराक नदी घाटी में आता है. यही वजह है कि मानसून आते ही नदियां उफान पर आ जाती हैं और बाढ़ से राज्य में करोड़ों का नुकसान होता है.

Bureau Report

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*