कहते हैं कि सियासत में जो दिखता है, वो होता नहीं और जो होता है वो दिखता नहीं. महाराष्ट्र में ऐसा अक्सर होता है. हाल ही में विधान भवन में दो दिग्गजों की मुलाकात ने सबका ध्यान खींचा. कहने को तो ये सिर्फ 15 मिनट की एक शिष्टाचार मुलाकात थी जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं. एनसीपी शरद पवार गुट के मुखिया शरद पवार ने मंगलवार को सूबे के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से विधान भवन में मुलाकात हुई. इस मुलाकात के समय और तरीके को देखकर सियासी गलियारों में गहरी रणनीति के कयास लगाए जा रहे हैं.
शरद पवार महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद पर महाराष्ट्र एकीकरण समिति की बैठक में शामिल होने के लिए विधान भवन पहुंचे थे. वहां से वह सीधे एकनाथ शिंदे के केबिन में गए. उनके साथ जयंत पाटील, जितेंद्र आव्हाड और शशिकांत शिंदे भी मौजूद थे. उस समय शिंदे कैबिनेट की बैठक में व्यस्त थे, लेकिन पवार के पहुंचने की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैठक बीच में रोक दी. उन्होंने पवार का गर्मजोशी से स्वागत किया और करीब 15 मिनट तक उनसे बातचीत की. राजनीतिक हलकों में शिंदे के इस कदम को पवार के प्रति सम्मान और सकारात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं शरद पवार
दरअसल, शरद पवार सियासत के माहिर खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और ऐसे में महाराष्ट्र में सांसदों और विधायकों को तोड़ने की जो होड़ लगी हुई है उसको देखते हुए शरद पवार ने अपने बचे हुए सियासी कुनबे को बचाने के लिए ये कदम उठाया और सीएम देवेंद्र फडणवीस से न मिलकर सीधे एकनाथ शिंदे से मुलाकात की. इसके पहले शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हो गए थे, जिसके बाद सियासी गलियारों में इस बात की कानाफूसी होनी शुरू हो गई थी कि अब शिंदे की नजर पवार गुट के सांसदों पर है. ऐसे में पवार ने सीधे शिंदे से मुलाकात कर एक बड़ा सियासी संदेश दिया है.
शरद पवार के इस कदम से क्या होगा?
शरद पवार के इस कदम के बाद उनकी पार्टी के विधायकों और सांसदों को मजबूती से इस बात पर भरोसा हो गया है कि सूबे की सियासत में चल रही हलचल के बीच पवार अपनी पार्टी के नेताओं पर पैनी नजर बनाए रखे हैं. ऐसे में संभावित तोड़-फोड़ के खतरे के बीच पार्टी का मनोबल न गिरने पाए. इस मुलाकात को सत्तारूढ़ महायुति के रणनीतिक समीकरणों के नजरिए से भी अहम माना जा रहा है. डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मिलकर शरद पवार ने परोक्ष रूप से यह संकेत दिया कि उनकी पहुंच राज्य के हर प्रभावशाली सत्ता केंद्र तक बनी हुई है, चाहे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हों या कोई और. पवार की राजनीति की यही खासियत रही है कि वे संवाद की संभावनाओं को कभी पूरी तरह खत्म नहीं होने देते.
…तो क्या ये शरद पवार की रणनीतिक चाल है?
अब तक दोनों नेताओं में से किसी ने भी 15 मिनट चली इस मुलाकात का वास्तविक एजेंडा सामने नहीं रखा है. राजनीतिक जानकार इसे शरद पवार की रणनीतिक चाल मान रहे हैं. उनका मानना है कि इसके जरिए पवार एक ओर अपना राजनीतिक प्रभाव दिखाना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर विरोधियों को भी असमंजस में बनाए रखना चाहते हैं. इस मुलाकात के असली मायने आने वाले दिनों में बनने वाले राजनीतिक समीकरणों से ही स्पष्ट होंगे.
Bureau Report
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